बिहार के औरंगाबाद से आई यह खबर रिश्तों की हर मर्यादा को तोड़ देने वाली है। जिस चाचा के कंधों पर बच्चों को बैठाकर घुमाया जाता है, उसी ने हैवानियत की सारी हदें पार करते हुए अपने ही 11 साल के भतीजे को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। जमीन के लालच में खून का रिश्ता इतना अंधा हो गया कि मासूम की सांसें तक छीन ली गईं।

घर के बाहर खेल रहा था सूरज, भरोसे में लेकर ले गया चाचा
राजा गरड़ी गांव का रहने वाला सूरज कुमार रोज़ की तरह स्कूल से लौटकर घर के बाहर खेल रहा था। घर में निर्माण कार्य चल रहा था, परिजन व्यस्त थे और सूरज बेखौफ था — क्योंकि आसपास अपने ही लोग थे।
इसी भरोसे का फायदा उठाकर रिश्ते का चाचा सोनू कुमार उसे अपने साथ ले गया। किसी को शक नहीं हुआ कि यह आखिरी बार होगा जब सूरज को जिंदा देखा जा रहा है।
शाम ढली, बच्चा नहीं लौटा… फिर शुरू हुआ खौफ
जब देर शाम तक सूरज घर नहीं लौटा तो मां की बेचैनी डर में बदल गई। गांव में खोजबीन शुरू हुई। हर गली, हर खेत, हर रास्ता छाना गया — लेकिन सूरज कहीं नहीं मिला।
तभी गांव के मुखिया ने वो बात कही, जिसने सबको सन्न कर दिया —
“सूरज को आखिरी बार सोनू के साथ बगीचे की ओर जाते देखा गया था।”
झूठ, बहाने और फिर 12 घंटे बाद सच
परिजनों ने सोनू से सवाल किए, लेकिन वह टालमटोल करता रहा। जवाबों में डर और घबराहट साफ झलक रही थी। शक गहराया तो पुलिस को सूचना दी गई।
सलैया थाना पुलिस ने सोनू को हिरासत में लिया। थाने में वह घंटों तक ड्रामा करता रहा — कभी अनजान बनता, कभी कहानी बदलता। लेकिन करीब 12 घंटे की सख्त पूछताछ के बाद उसका झूठ टूट गया।
कबूलनामा: “जमीन का बदला लेना था”
आरोपी ने जो बताया, वह सुनकर पुलिस भी सन्न रह गई।
उसने स्वीकार किया कि जमीन को लेकर मृतक के परिवार से पुरानी रंजिश थी। कुछ महीने पहले मारपीट भी हुई थी। उसी नफरत में उसने मासूम बच्चे को निशाना बना लिया।
उसने सूरज का गला रेतकर हत्या की, फिर शव को बोरी में भरकर मदार नदी के पास झाड़ियों में फेंक दिया — ताकि कोई सुराग न मिले।
झाड़ियों में मिला बोरी से बंधा मासूम
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस टीम जब झाड़ियों में पहुंची और बोरी खोली, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें भर आईं। 11 साल का सूरज — बेजान, खामोश, हमेशा के लिए।
शव को पोस्टमार्टम के लिए औरंगाबाद सदर अस्पताल भेजा गया। मौके पर फोरेंसिक टीम ने भी जांच की।
मां का रोना, गांव का गुस्सा
सूरज चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। मां सरिता देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं। पिता मंटू दास दूसरे राज्य में मजदूरी करते हैं। बेटे की मौत की खबर ने परिवार को तोड़ दिया।
गांव में सन्नाटा है, लेकिन भीतर-ही-भीतर गुस्सा उबाल मार रहा है। हर कोई यही पूछ रहा है —
“अगर अपनों से ही बच्चे सुरक्षित नहीं, तो भरोसा किस पर करें?”
पुलिस का बयान
एसडीपीओ-2 चंदन कुमार ने बताया कि आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि इस साजिश में कोई और शामिल तो नहीं था।







