बिहार सरकार ने सड़क निर्माण कार्यों में लापरवाही और गुणवत्ता से समझौता करने वाले ठेकेदारों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। दरभंगा में सड़क निर्माण में गंभीर अनियमितता पाए जाने पर निर्माण कंपनी आर.एल. चौधरी इंफ्राटेक प्रा. लि. को दस वर्षों के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। यह निर्णय विभागीय जांच और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर लिया गया।
राजस्व एवं भूमि सुधार तथा पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने बताया कि कंपनी को दरभंगा पथ प्रमंडल क्षेत्र में महात्मा गांधी कॉलेज से अलीनगर पीडब्ल्यूडी सड़क, खर्गा सहनी चौक, परमेश्वर चौक होते हुए बेला दुर्गा मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का कार्य सौंपा गया था।
जांच के दौरान सड़क के एक किलोमीटर हिस्से में बनाए गए सीमेंट कंक्रीट पेवमेंट की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गई। तकनीकी परीक्षण में सड़क की मजबूती जहां लगभग 407.888 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर होनी चाहिए थी, वहीं वास्तविक मजबूती केवल 166.828 किलोग्राम प्रति वर्ग सेंटीमीटर दर्ज की गई, जो मानक से बहुत कम है।
विभाग ने निर्माण कंपनी से कई बार स्पष्टीकरण मांगा। मई और जुलाई 2025 में नोटिस जारी किए गए, जबकि सितंबर में जांच रिपोर्ट साझा कर पुनः जवाब देने को कहा गया। कंपनी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण की भी स्वतंत्र तकनीकी संस्था से जांच कराई गई। दिसंबर 2025 में प्राप्त अंतिम रिपोर्ट में भी निर्माण कार्य को गुणवत्ताहीन बताया गया।
इन तथ्यों के आधार पर विभाग ने बिहार ठेकेदारी निबंधन नियमावली, 2007 के प्रावधानों के तहत कंपनी को आदेश की तिथि से अगले दस वर्षों तक विभागीय निविदाओं से प्रतिबंधित कर दिया। इस अवधि में कंपनी राज्य सरकार के किसी भी सड़क या निर्माण कार्य में भाग नहीं ले सकेगी।
मंत्री ने कहा कि सरकार सार्वजनिक परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर पूरी तरह गंभीर है और भ्रष्टाचार, लापरवाही या घटिया निर्माण किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि हाल के दिनों में इंडो-नेपाल सड़क परियोजना से जुड़े एक अन्य ठेकेदार पर भी कार्रवाई की गई है और आगे भी दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से निर्माण एजेंसियों में जवाबदेही बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिल सकेंगी।








