बिहार में चर्चित नीट छात्रा से जुड़े मामले की जांच अब तेज होती दिखाई दे रही है। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीम मंगलवार को जहानाबाद जिले के पतियावा गांव पहुंची, जहां उसने छात्रा के परिजनों से लंबी पूछताछ की और घटनाक्रम से जुड़े कई पहलुओं की जानकारी जुटाई। टीम करीब ढाई से तीन घंटे तक गांव में रही और इस दौरान परिवार के सदस्यों से विस्तार से सवाल किए गए।

जांच टीम के गांव पहुंचने की खबर फैलते ही आसपास के लोग भी मामले को लेकर चर्चा करने लगे। ग्रामीणों के अनुसार, अधिकारियों ने घर के भीतर बैठकर शांतिपूर्वक पूछताछ की और घटना से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जानने की कोशिश की।
छात्रा के पिता ने बाद में मीडिया से बातचीत में बताया कि जांच एजेंसी ने उनसे और उनकी पत्नी से अलग-अलग बातचीत की। उन्होंने कहा कि उन्होंने टीम को वही तथ्य बताए हैं, जिन्हें वे अब तक सही मानते आए हैं। पिता ने यह भी दोहराया कि उनका परिवार शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच की मांग करता रहा है और उन्हें उम्मीद है कि सच्चाई जल्द सामने आएगी।
पूछताछ के दौरान एजेंसी ने परिवार से छात्रा की पढ़ाई, दिनचर्या, दोस्तों, संपर्कों और घटना से पहले के हालात के बारे में भी जानकारी ली। जांच टीम ने यह जानने की कोशिश की कि छात्रा किन लोगों के संपर्क में थी और क्या हाल के दिनों में उसके व्यवहार में कोई बदलाव देखा गया था।
इस बीच, परिवार ने बताया कि अधिकारियों ने छात्रा और उसकी मां के मोबाइल फोन के बारे में भी जानकारी मांगी। पिता के अनुसार, पहले भी टीम मोबाइल फोन के बारे में पूछ चुकी थी। उन्होंने बताया कि दोनों मोबाइल खराब होने के कारण उन्हें ठीक कराने के लिए स्थानीय मिस्त्री के पास भेजा गया था।
पूछताछ के बाद एजेंसी ने छात्रा के भाई को भी अपने साथ ले लिया। इस कदम से गांव में कुछ देर के लिए हलचल बढ़ गई और लोग विभिन्न तरह की चर्चाएं करने लगे। हालांकि, बाद में जानकारी मिली कि उससे पूछताछ कर कुछ घंटों बाद उसे छोड़ दिया गया। इससे परिवार को अस्थायी राहत जरूर मिली, लेकिन मामले को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
परिवार का कहना है कि वे जांच में पूरा सहयोग कर रहे हैं और चाहते हैं कि मामले का सच जल्द सामने आए। पिता ने कहा कि वे न्याय की उम्मीद में लगातार अपनी आवाज उठाते रहे हैं और आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि जांच निष्पक्ष होगी तो उन्हें भरोसा है कि वास्तविक परिस्थितियां सामने आएंगी।
गांव के लोगों का भी कहना है कि मामला शुरू से ही संवेदनशील रहा है और सभी चाहते हैं कि सच सामने आए। कुछ ग्रामीणों का मानना है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से अब मामले में तेजी आ सकती है और लंबे समय से उठ रहे सवालों के जवाब मिल सकते हैं।
बताया जाता है कि इस प्रकरण की शुरुआत में राज्य स्तर की विशेष जांच टीम इस मामले की जांच कर रही थी। बाद में राज्य सरकार ने 31 जनवरी को इसे केंद्रीय एजेंसी को सौंप दिया, ताकि मामले की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। इसके बाद से जांच टीम समय-समय पर संबंधित स्थानों का दौरा कर रही है और साक्ष्य जुटाने में लगी है।
जांच एजेंसी के सूत्रों के अनुसार, टीम अब सभी पहलुओं को जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां समझने की कोशिश कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं की पुष्टि की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में तकनीकी साक्ष्य, डिजिटल डेटा और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए जांच एजेंसी द्वारा मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल जानकारी की पड़ताल भी अहम हो सकती है।
फिलहाल गांव में इस बात को लेकर चर्चा है कि जांच की दिशा अब निर्णायक मोड़ ले सकती है। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले समय में एजेंसी की जांच से स्थिति स्पष्ट होगी और लंबे समय से उठ रहे सवालों का जवाब मिलेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखाया है कि संवेदनशील मामलों में निष्पक्ष जांच कितनी जरूरी होती है। परिवार, गांव और प्रशासन सभी की निगाहें अब जांच एजेंसी की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।







