बिहार के वैशाली जिले से एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक पंचायत मुखिया पर नाबालिग लड़के के साथ गलत हरकत करने की कोशिश का आरोप लगा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना ने इलाके में चिंता और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला वैशाली जिले के बरांटी थाना क्षेत्र की काशीपुर चकबीबी पंचायत से जुड़ा है। यहां के मुखिया अर्जुन सिंह पर आरोप है कि उन्होंने एक नाबालिग को सरकारी योजना की जानकारी देने के बहाने बुलाया और उसके साथ अनुचित व्यवहार करने का प्रयास किया।
शिकायत में बताया गया है कि यह घटना 9 फरवरी 2026 की शाम करीब छह बजे की है। नाबालिग के अनुसार, मुखिया ने उसे फोन कर किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी योजना की जानकारी देने के नाम पर मिलने को कहा था। आरोपी ने मिलने के लिए पंचायत क्षेत्र के एक सुनसान स्थान, कचड़ा भवन नहर के पास बुलाया।
नाबालिग ने पुलिस को बताया कि जब वह बताए गए स्थान पर पहुंचा, तो मुखिया उसे जबरन एक बंद पड़े भवन के अंदर ले गए। वहां आरोपी ने उसके साथ जबरदस्ती करने की कोशिश की और अनुचित दबाव बनाया। बच्चे ने आरोप लगाया कि आरोपी ने उसके साथ शारीरिक छेड़छाड़ की, जिससे वह डर गया और चिल्लाने की कोशिश की।
पीड़ित के अनुसार, जब उसने विरोध किया तो आरोपी ने उसका मुंह दबाने का प्रयास किया और उसे काट भी लिया। किसी तरह मौका देखकर वह वहां से भाग निकला और सीधे घर पहुंचकर अपने माता-पिता और ग्रामीणों को पूरी घटना बताई।
परिवार के अनुसार, उस समय बच्चे के पिता बाहर नौकरी करते थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद वह 12 फरवरी को घर लौटे और उसी दिन बरांटी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
थाना प्रभारी ने बताया कि मामले को गंभीरता से लिया गया है और जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम पीड़ित के बयान, चिकित्सकीय परीक्षण और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। यदि आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस रिकॉर्ड की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी मुखिया के खिलाफ पहले से कुछ आपराधिक मामले दर्ज हैं। बताया गया कि उनके खिलाफ पूर्व में भी बरांटी थाना में दो मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें वे जेल भी जा चुके हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि वर्तमान मामले की जांच तथ्यों के आधार पर स्वतंत्र रूप से की जा रही है।
घटना सामने आने के बाद पंचायत क्षेत्र में लोगों के बीच नाराजगी देखी जा रही है। कई ग्रामीणों ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का दायित्व लोगों की सुरक्षा और विश्वास बनाए रखना होता है, ऐसे में इस तरह के आरोप बेहद गंभीर हैं और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज को और अधिक सतर्क होने की जरूरत है। विशेषज्ञों के अनुसार, अभिभावकों को बच्चों को यह समझाना चाहिए कि किसी भी व्यक्ति के बुलाने पर अकेले सुनसान स्थान पर न जाएं और किसी असहज स्थिति में तुरंत शोर मचाकर मदद लें।
फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आरोपी की तलाश तथा साक्ष्य जुटाने का काम जारी है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी।
यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी और जवाबदेही कितनी महत्वपूर्ण है। साथ ही यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई हो।







