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छपरा कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास और भारी अर्थदंड की सजा दी; समाज के लिए कड़ा संदेश

January 28, 20261 Mins Read
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बिहार के सारण जिले से एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला सामने आया है। छपरा व्यवहार न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम से जुड़े जघन्य अपराध में दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और भारी अर्थदंड की सजा सुनाई है। न्यायालय ने यह फैसला समाज में नाबालिगों के विरुद्ध अपराध के प्रति कड़ा संदेश देने के लिए लिया गया है।

मामले का विवरण:

सारण जिले के मकेर थाना क्षेत्र अंतर्गत फुलवरिया गांव के दो युवक, सत्येंद्र महतो (परमा महतो के पुत्र) और मुकेश साह (दिन दयाल साह के पुत्र) पर नाबालिग से दुष्कर्म करने का आरोप था। आरोप था कि दोनों ने पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर अपराध किया।

छपरा व्यवहार न्यायालय की विशेष पॉक्सो न्यायाधीश स्मिता राज ने इस मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (डीबी) के तहत आजीवन कारावास और 50-50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया जाता है, तो प्रत्येक अभियुक्त को छह-छह माह अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

साथ ही न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 4/6 के तहत दोषियों को 20-20 वर्ष का कठोर कारावास और 25-25 हजार रुपये अर्थदंड की अतिरिक्त सजा भी सुनाई। इसके भुगतान में विफल रहने पर भी अभियुक्तों को अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

अभियोजन पक्ष की भूमिका:

इस मामले में अभियोजन पक्ष ने गुणवत्तापूर्ण और साक्ष्य-आधारित अनुसंधान प्रस्तुत किया। चिकित्सक, अनुसंधानकर्ता और कुल 10 साक्षियों की गवाही के आधार पर न्यायालय ने स्पष्ट रूप से साबित किया कि दोषियों ने नाबालिग से यौन अपराध किया।

लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा और सहायक लोक अभियोजक अश्वनी कुमार ने न्यायालय में अपने मजबूत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से मामले को निर्णायक मोड़ तक पहुँचाया।

पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया:

सारण जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार ने बताया कि वर्ष 2026 में जिले के गंभीर अपराधों की पहचान कर उन्हें त्वरित विचारण के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि नाबालिगों के विरुद्ध अपराध को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समाज में संदेश और महत्व:

यह निर्णय केवल पीड़िता को न्याय दिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग के लिए चेतावनी भी है। न्यायालय ने अपने फैसले के माध्यम से यह सुनिश्चित किया कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध करने वालों को कठोरतम सजा दी जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के कठोर फैसले नाबालिगों के प्रति अपराधियों के हौसले को रोकने में मदद करेंगे और समाज में सुरक्षा की भावना को मजबूत करेंगे।

संक्षिप्त निष्कर्ष:

छपरा व्यवहार न्यायालय का यह निर्णय न केवल कानून की मजबूती दिखाता है, बल्कि यह संदेश देता है कि नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस फैसले से अपराधियों को चेतावनी मिलेगी और समाज में यह विश्वास बढ़ेगा कि न्याय प्रणाली हर स्तर पर गंभीर अपराधों के खिलाफ सख्त

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