गया जिले के डुमरिया प्रखंड के गोटीबांध गांव पर गुरुवार को ऐसा दुख टूटा कि पूरा गांव शोक में डूब गया। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार स्थित एक निजी स्टील प्लांट में हुए भीषण विस्फोट में गांव के छह मजदूरों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। यह हादसा उन गरीब मजदूरों की त्रासदी है, जो बेहतर जीवन और दो वक्त की रोटी की तलाश में परदेस गए थे

गांव में मातम का आलम था। सुबह घर से निकलते वक्त पिता ने बच्चों के सिर पर हाथ फेरा, पत्नी से कहा, “चार-पांच दिन में लौट आएंगे।” माता ने माथे पर टीका लगाया था। लेकिन किसे पता था कि यह उनका अंतिम सफर होगा। बुजुर्ग बार-बार बेटे का नाम लेकर बेहोश हो रहे थे। महिलाएं अपने पति की तस्वीर से बातें कर रही हैं और बच्चों को गले से लगाकर फूट-फूटकर रो रही हैं।
भीषण हादसे की स्थिति
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार सुबह करीब 10 बजे स्टील प्लांट के कोयला भट्ठे के पास अचानक विस्फोट हुआ। तेज आग और गैस रिसाव के कारण छह मजदूर मौके पर ही झुलस गए। सभी मृतक गोटीबांध गांव के निवासी थे। हादसे की खबर गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। जिन घरों से पिता या बेटे मजदूरी के लिए निकले थे, वहां अब केवल चीत्कार और विलाप का माहौल है।
मृतकों की पहचान
इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर हैं – श्रवण कुमार (22), राजदेव कुमार (22), जितेंद्र (37), बदरी भुइयां (42), विनय भुइयां (40) और सुंदर भुइयां (40)। सभी डुमरिया थाना क्षेत्र के गोटीबांध गांव के निवासी थे।
घायलों का हाल
हादसे में पांच मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं – कल्पू भुइयां (44), रामू भुइयां (34), झारखंड के शबीर अंसारी (34), मुमताज अंसारी (26) और शराफत अंसारी (32)। सभी का इलाज अस्पताल में चल रहा है। कुल 11 मजदूरों को रेस्क्यू किया गया था, जिनमें छह की मौत हो चुकी थी।
परिवारों की त्रासदी
हादसे ने कई परिवारों को पूरी तरह तबाह कर दिया। शुनर भारती और उनके बेटे राजदेव की एक साथ मौत हो गई। विनय भारती अपने पीछे चार बेटियों और एक मानसिक रूप से अस्वस्थ बेटे को छोड़ गए हैं। जितेंद्र भारती की चार महीने की बेटी शायद कभी अपने पिता को पहचान भी नहीं पाएगी।
ठेकेदार पर आरोप
मृतकों के साथी मजदूरों का कहना है कि वे 7 जनवरी को 25 मजदूरों के साथ घर से निकले थे। झारखंड के ठेकेदार ने हल्का काम बताया था, लेकिन प्लांट में जोखिम भरा कार्य कराया गया। श्रवण भारती के पिता शंकर भारती ने कहा, “ठेकेदार ने धोखा दिया। सरकार से हमारी यही मांग है कि बच्चों की मौत व्यर्थ न जाए। उचित मुआवजा और कार्रवाई हो।”
मुख्यमंत्री ने जताया दुःख, मुआवजा की घोषणा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हादसे को अत्यंत दुखद बताया और मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये, घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। साथ ही घायलों के समुचित इलाज और शवों को शीघ्र बिहार भेजने के निर्देश दिए।
गोटीबांध गांव में हादसे के बाद चूल्हे नहीं जले। हर घर से रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। महिलाएं बेसुध हैं, बच्चे सहमे हुए हैं और बुजुर्गों की आंखें सूनी हो गई हैं। यह हादसा न केवल मजदूरों की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि पूरे समाज और नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी भी है कि मजदूरों की सुरक्षा और ठेकेदारों की जवाबदेही बेहद महत्वपूर्ण है।







