बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। सेमरा रेफरल अस्पताल में परिवार नियोजन के तहत कराए गए बंध्याकरण ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई। इस घटना से न केवल पीड़ित परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, बल्कि इलाके में भारी जनाक्रोश भी देखने को मिला। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए धरना-प्रदर्शन किया और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।

मृतका की पहचान सेमरा थाना क्षेत्र के दढिया गांव निवासी रामजी उरांव की 30 वर्षीय पत्नी हेमंती देवी के रूप में हुई है। हेमंती देवी अपने पीछे दो मासूम बच्चों को छोड़ गई है, जिनमें एक तीन साल का बेटा और एक साल की बेटी शामिल है। मां की असमय मौत से पूरा परिवार सदमे में है और गांव का माहौल गमगीन हो गया है।
स्वस्थ हालत में पहुंची थी अस्पताल
परिजनों के अनुसार, हेमंती देवी सोमवार को पूरी तरह स्वस्थ अवस्था में सेमरा रेफरल अस्पताल पहुंची थी। वह परिवार नियोजन कार्यक्रम के तहत नसबंदी कराने आई थी। अस्पताल में डॉक्टरों ने उसका बंध्याकरण ऑपरेशन किया और बाद में भर्ती कर निगरानी में रखा गया। शुरुआती कुछ घंटों तक उसकी स्थिति सामान्य बताई गई और परिजनों को भरोसा दिलाया गया कि ऑपरेशन सफल रहा है।
रात में बिगड़ी तबीयत
लेकिन देर रात अचानक हेमंती देवी की हालत बिगड़ने लगी। मृतका के भाई राजेश उरांव ने बताया कि रात करीब 12 बजे के बाद उसे बेचैनी महसूस होने लगी। उसकी सांस तेज चलने लगी और शरीर में कमजोरी बढ़ती गई। परिजनों ने तुरंत इसकी सूचना अस्पताल में मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को दी। दवाइयां दी गईं, लेकिन हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ।
परिजनों का आरोप है कि लंबे समय तक महिला की गंभीर स्थिति के बावजूद समुचित और प्रभावी इलाज नहीं किया गया। जब हालात बेहद नाजुक हो गए, तब डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए बगहा रेफर करने की बात कही।
एंबुलेंस नहीं मिलने का आरोप
सबसे गंभीर आरोप यह है कि रेफर किए जाने के बावजूद अस्पताल में एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार एंबुलेंस की मांग की, लेकिन कोई व्यवस्था नहीं की गई। मजबूर होकर मृतका का भाई निजी वाहन की तलाश में अस्पताल परिसर से बाहर गया। इसी दौरान, भोर के समय अस्पताल परिसर में ही हेमंती देवी ने दम तोड़ दिया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
महिला की मौत की खबर मिलते ही पति रामजी उरांव बेसुध हो गए। दो छोटे-छोटे बच्चों के सिर से मां का साया उठ जाने से पूरे परिवार की हालत दयनीय हो गई। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं। हर कोई यही सवाल कर रहा है कि एक सामान्य ऑपरेशन के बाद आखिर ऐसी नौबत क्यों आई।
अस्पताल में हंगामा, धरना-प्रदर्शन
घटना की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण सेमरा रेफरल अस्पताल पहुंच गए। गुस्साए लोगों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अगर समय पर सही इलाज और एंबुलेंस की सुविधा मिल जाती, तो हेमंती देवी की जान बचाई जा सकती थी।
लोगों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषी डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति को उजागर करती है। परिवार नियोजन जैसे संवेदनशील कार्यक्रमों में सुरक्षा, निगरानी और आपात सुविधाओं की कितनी जरूरत है, यह मामला इसका उदाहरण बन गया है। सवाल यह भी है कि रेफरल अस्पताल होने के बावजूद वहां आपात स्थिति से निपटने की व्यवस्था क्यों नहीं थी।
फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मामले की जानकारी जुटा रहे हैं। प्रशासन की ओर से जांच का भरोसा दिया गया है, लेकिन पीड़ित परिवार और ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और मां को इस तरह अपनी जान न गंवानी पड़े।







