बिहार के सारण जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो आस्था और व्यवस्था के बीच फंसे हालात को बयां करती है। यहां मंदिर में भगवान के बिना पूजा हो रही है, जबकि भगवान राम, माता जानकी और भ्राता लक्ष्मण की अष्टधातु मूर्तियां पिछले एक महीने से थाने के मालखाने में बंद हैं। यह मामला मशरक थाना परिसर से सटे करीब 200 साल पुराने राम-जानकी-शिव मंदिर से जुड़ा है, जहां श्रद्धालु खाली गर्भगृह के सामने दीप जलाकर आरती करने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, मंदिर से चोरी गई मूर्तियां पुलिस ने समय रहते बरामद कर लीं, लेकिन कानूनी प्रक्रिया के कारण अब तक उन्हें वापस मंदिर में स्थापित नहीं किया जा सका है। इस स्थिति से भक्तों में निराशा और बेचैनी दोनों देखने को मिल रही हैं।
कानूनी प्रक्रिया में उलझी आस्था
मंदिर के पुजारी टुन्ना बाबा ने बताया कि बरामद मूर्तियां अदालत के आदेश के बाद ही मंदिर को सौंपी जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है, जिस वजह से मूर्तियां थाने के मालखाने में रखी गई हैं। हालांकि उन्हें भरोसा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण की मूर्तियां पुनः मंदिर में स्थापित कर दी जाएंगी।
पुजारी और स्थानीय भक्तों का कहना है कि मंदिर में रोज पूजा-अर्चना और आरती तो हो रही है, लेकिन भगवान की प्रतिमाएं न होने से श्रद्धालुओं का मन व्यथित है। उनका कहना है कि खाली मंदिर में पूजा करना किसी परीक्षा से कम नहीं है।
कैसे हुई थी सनसनीखेज चोरी
यह घटना 5 जनवरी की रात की बताई जा रही है, जब घने कोहरे और कुहासे का फायदा उठाकर अज्ञात चोरों ने मंदिर के पीछे की कुंडी काट दी। इसके बाद गर्भगृह में प्रवेश कर भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण की अष्टधातु की मूर्तियां चोरी कर ली गईं। इतना ही नहीं, चोर मंदिर में लगे सीसीटीवी कैमरे और उसकी हार्ड डिस्क भी साथ ले गए, ताकि पहचान न हो सके।
चोरी की खबर मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखने को मिला, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच शुरू की।
एसआईटी की कार्रवाई, मूर्तियां बरामद
सारण के तत्कालीन वरीय पुलिस अधीक्षक डॉ. कुमार आशीष के निर्देश पर मढ़ौरा अनुमंडल के एसडीपीओ-2 संजय कुमार सुधांशु के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। टीम ने महज सात दिनों के भीतर चोरी का खुलासा करते हुए पूर्वी चंपारण से सभी मूर्तियां बरामद कर लीं।
पुलिस जांच में सामने आया कि ये मूर्तियां बेहद प्राचीन हैं और स्थानीय मान्यता के अनुसार इनकी उम्र करीब 200 साल बताई जाती है। बरामदगी के बाद पुलिस ने मूर्तियों को साक्ष्य के तौर पर थाने के मालखाने में सुरक्षित रख दिया।
तीन आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल
पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में मशरक थाना क्षेत्र के तख्त टोला गांव निवासी अखिलेश तिवारी, पूर्वी चंपारण के केसरिया थाना क्षेत्र के गोपी छपरा गांव निवासी मुन्ना सहनी और भोपतपुर थाना क्षेत्र के जमुनिया गांव निवासी संजय सिंह शामिल हैं।
आरोपियों की निशानदेही पर चोरी गई मूर्तियां भी बरामद की गईं। श्रीराम और लक्ष्मण की अष्टधातु मूर्तियां सोनू सहनी के घर से मिलीं, जबकि माता जानकी की अष्टधातु मूर्ति राजन सहनी के फूस के मड़ई में जमीन के नीचे दबाकर रखी गई थी।
भक्तों की मांग—जल्द लौटें भगवान
अब स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पुलिस प्रशासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर जल्द से जल्द मूर्तियों को मंदिर में वापस स्थापित कराया जाए। लोगों का कहना है कि भगवान का स्थान मंदिर है, न कि थाने का मालखाना।
श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि प्रशासन आस्था की भावना को समझते हुए जल्द फैसला लेगा, ताकि मंदिर फिर से अपने पूर्ण स्वरूप में लौट सके और भक्त बिना किसी पीड़ा के विधिवत पूजा-अर्चना कर सकें।








