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कोचिंग संचालक को 10 साल की सजा, कोर्ट ने दिया सख्त संदेश

February 4, 20261 Mins Read
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शिक्षा को समाज में सबसे पवित्र और भरोसेमंद व्यवस्था माना जाता है, लेकिन जब इसी व्यवस्था की आड़ में कोई हैवानियत को अंजाम दे, तो यह पूरे समाज को झकझोर कर रख देता है। बिहार के अररिया जिले से सामने आए एक ऐसे ही शर्मनाक मामले में पॉक्सो कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कोचिंग संचालक को नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म का दोषी ठहराया है। अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है और भारी जुर्माना भी लगाया है। यह फैसला न सिर्फ पीड़िता को न्याय दिलाने की दिशा में अहम है, बल्कि समाज को यह स्पष्ट संदेश भी देता है कि शिक्षा के नाम पर किए गए अपराध किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।

 

अररिया जिले के विशेष पॉक्सो न्यायालय ने कोचिंग संचालक अमित कुमार अमन को नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म करने का दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई। कुल मिलाकर आरोपी को 10 साल का सश्रम कारावास और 90 हजार रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही अदालत ने पीड़िता को 3 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी निर्देश दिया है, ताकि उसके पुनर्वास और भविष्य में सहायता मिल सके।

आधार सुधार के बहाने रची गई साजिश

अदालत में सामने आए तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने बेहद शातिर तरीके से इस अपराध को अंजाम दिया। वह एक कोचिंग संस्थान का संचालक था, जिस पर छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों को भरोसा था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उसने पीड़िता को अपने जाल में फंसाया। आरोपी ने छात्रा को आधार कार्ड में सुधार कराने का झांसा दिया और 7 जुलाई 2023 को उसे रानीगंज ले गया। वहां उसने अपने एक मित्र के किराए के मकान में छात्रा को ले जाकर नशीला पदार्थ पिलाया और उसके बाद उसके साथ दुष्कर्म किया। यह पूरी घटना आरोपी की सोची-समझी साजिश और विश्वासघात को उजागर करती है।

भरोसे का घोर दुरुपयोग

कोर्ट ने अपने फैसले में इस बात पर विशेष रूप से जोर दिया कि आरोपी न सिर्फ एक अपराधी था, बल्कि वह एक शिक्षक और मार्गदर्शक की भूमिका में भी था। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति से यह अपेक्षा की जाती है कि वह बच्चों की सुरक्षा और भविष्य को संवारने का काम करे, लेकिन आरोपी ने इस जिम्मेदारी को ताक पर रखकर नाबालिग छात्रा के भरोसे का घोर दुरुपयोग किया। अदालत ने इसे एक गंभीर सामाजिक अपराध मानते हुए कड़ी सजा देना जरूरी समझा।

पीड़िता की हिम्मत से सामने आया सच

इस मामले में सबसे अहम भूमिका पीड़िता की हिम्मत और साहस की रही। घटना के बाद उसने डरकर चुप रहने के बजाय आगे आकर महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई। उसकी शिकायत के आधार पर कांड संख्या 28/2023 के तहत मामला दर्ज किया गया। बाद में इस मामले की सुनवाई विशेष पॉक्सो वाद संख्या 7/2024 के तहत शुरू हुई। जांच के दौरान पुलिस ने साक्ष्य जुटाए, गवाहों के बयान दर्ज किए और तकनीकी सबूत भी अदालत के सामने पेश किए। पीड़िता के बयान और अन्य सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।

धाराओं के तहत सख्त सजा

पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत 3 वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। आईटी एक्ट की धारा 67(ए) के तहत भी आरोपी को 3 वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया। अदालत ने आदेश दिया कि आरोपी को दी गई सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

पीड़िता के पुनर्वास के लिए मुआवजा

अदालत ने पीड़िता के भविष्य को ध्यान में रखते हुए विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत उसे 3 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश दिया। न्यायालय का मानना है कि यह राशि पीड़िता के इलाज, शिक्षा और मानसिक पुनर्वास में मददगार साबित होगी। साथ ही यह फैसला अन्य पीड़ितों को भी यह भरोसा देता है कि न्याय व्यवस्था उनके साथ खड़ी है।

अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें

मामले में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्याम लाल यादव ने मजबूती से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत के सामने सभी सबूतों और गवाहों के बयानों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं बचाव पक्ष ने भी आरोपी के पक्ष में दलीलें दीं, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों के सामने उनकी दलीलें टिक नहीं सकीं। अदालत ने सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया।

समाज के लिए सख्त संदेश

इस फैसले के बाद अदालत ने आरोपी को तत्काल जेल भेज दिया। यह निर्णय समाज के लिए एक कड़ा संदेश है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराध, खासकर शिक्षा संस्थानों की आड़ में किए गए अपराध, किसी भी हाल में माफ नहीं किए जाएंगे। यह फैसला न सिर्फ कानून के प्रति लोगों का भरोसा मजबूत करता है, बल्कि उन लोगों को भी चेतावनी देता है जो अपने पद और विश्वास का गलत फायदा उठाने की सोचते हैं।

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