बलिया जिले में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत ‘नो मैपिंग’ मतदाताओं की सुनवाई अब तेज हो गई है। बैरिया विधानसभा क्षेत्र में ऐसे 13 हजार से अधिक मतदाता हैं, जिनकी मैपिंग अब तक नहीं हो सकी है। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक उन्हें बार-बार नोटिस भेजे जा रहे हैं, लेकिन बड़ी संख्या में मतदाता या तो सुनवाई में उपस्थित नहीं हो रहे हैं या फिर पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पा रहे हैं। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जिन लोगों ने दूसरी नोटिस के बाद भी आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं किए हैं, उन्हें तीसरी बार नोटिस जारी किया जाएगा।

दरअसल, एसआईआर के तहत मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाने के लिए व्यापक स्तर पर सत्यापन और मैपिंग की प्रक्रिया चलाई जा रही है। बैरिया विधानसभा क्षेत्र में कुल 3 लाख 53 हजार 356 मतदाताओं की मैपिंग की जानी थी। इनमें से 3 लाख 35 हजार 997 मतदाताओं की मैपिंग पूरी कर ली गई है, जबकि 17 हजार 399 मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो सका। इन्हीं को ‘नो मैपिंग’ की श्रेणी में रखा गया और उन्हें नोटिस जारी किए गए।
मैपिंग और सुनवाई की प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 15 सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों (एईआरओ) की तैनाती की गई है। पहले चरण में जारी नोटिस के बाद मात्र 4 हजार 111 मतदाता ही निर्धारित तिथि पर सुनवाई के लिए पहुंचे। हालांकि, इन उपस्थित मतदाताओं में से भी अधिकांश लोग ऐसे थे, जो चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। कई लोगों के कागजात अधूरे पाए गए, जबकि कुछ के प्रमाणपत्रों में विसंगतियां थीं।
प्रशासन की ओर से उन्हें आवश्यक दस्तावेजों के साथ दोबारा उपस्थित होने का निर्देश दिया गया। इसके बाद दूसरी नोटिस जारी की गई। दूसरी बार 1,465 मतदाता सुनवाई के लिए पहुंचे, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिखा। अधिकारियों के अनुसार, इन मतदाताओं के पास भी पर्याप्त और वैध साक्ष्य नहीं थे, जिससे उनकी मैपिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।
उपजिलाधिकारी आलोक प्रताप सिंह ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ प्रक्रिया चलाई जा रही है। जिन मतदाताओं ने नोटिस मिलने के बावजूद सुनवाई में भाग नहीं लिया है, उन्हें पुनः नोटिस जारी की जा रही है। साथ ही, जो लोग अधूरे दस्तावेज लेकर पहुंचे थे, उन्हें भी स्पष्ट रूप से निर्देश दिया गया है कि वे संपूर्ण साक्ष्य के साथ पुनः उपस्थित हों। यदि तीसरी बार भी वे आवश्यक प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर पाए, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, अब तक कुल 4,111 मतदाता पहली नोटिस पर और 1,465 मतदाता दूसरी नोटिस पर उपस्थित हुए हैं। इसके बावजूद 13 हजार 288 मतदाता ऐसे हैं, जो नोटिस मिलने के बाद भी सुनवाई में शामिल नहीं हुए। यह संख्या निर्वाचन प्रक्रिया के लिहाज से गंभीर मानी जा रही है, क्योंकि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है।
इस पूरे प्रकरण में एक और अहम पहलू सामने आया है। कई परिवारों ने शिकायत की है कि उनकी बहुएं, जो बिहार या अन्य राज्यों से विवाह के बाद बलिया आई हैं, उनके पास वैध निवास या पहचान प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले लड़कियों का नाम मतदाता सूची में शामिल कराने को लेकर जागरूकता कम थी, जिसके कारण अब दस्तावेजों की कमी सामने आ रही है। ऐसे मामलों में महिलाओं को अपने नए निवास स्थान पर मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने में दिक्कत हो रही है।
मतदाताओं का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड या जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध न होने से समस्या और बढ़ जाती है। कई मामलों में मायके के दस्तावेज और ससुराल के पते में अंतर होने के कारण भी सत्यापन अटक जाता है। प्रशासन का कहना है कि ऐसे मामलों में आयोग की गाइडलाइन के अनुरूप वैकल्पिक दस्तावेज स्वीकार किए जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन अनिवार्य है।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में केवल उन्हीं लोगों का नाम बरकरार रहेगा, जो निर्धारित नियमों के तहत अपने निवास और पहचान का प्रमाण प्रस्तुत करेंगे। आयोग का उद्देश्य किसी को वंचित करना नहीं, बल्कि सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है। इसी कारण बार-बार नोटिस देकर अवसर प्रदान किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मतदाता सूची का सटीक और अद्यतन होना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है। यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं की मैपिंग अधूरी रह जाती है, तो भविष्य में चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए प्रशासन और मतदाताओं दोनों की जिम्मेदारी है कि वे समय रहते आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं।
फिलहाल बलिया में ‘नो मैपिंग’ मतदाताओं की सुनवाई जारी है। तीसरी नोटिस की प्रक्रिया शुरू होने से पहले प्रशासन लोगों से अपील कर रहा है कि वे स्वेच्छा से उपस्थित होकर अपने दस्तावेज जमा करें। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि कितने मतदाता इस अवसर का लाभ उठाकर अपनी मैपिंग पूरी कराते हैं। निर्वाचन आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून और नियमों के दायरे में पारदर्शी ढंग से संपन्न की जाएगी, ताकि मतदाता सूची पूरी तरह सटीक और विश्वसनीय बन सके।







