डिब्रूगढ़ से नई दिल्ली जा रही राजधानी एक्सप्रेस एक बार फिर असामाजिक तत्वों के निशाने पर आ गई। मानसी स्टेशन से आगे बढ़ते ही ट्रेन पर अज्ञात बदमाशों ने पत्थरबाजी कर दी, जिससे ए-4 कोच की एक खिड़की का शीशा पूरी तरह टूट गया। घटना के बाद ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच अफरा-तफरी और डर का माहौल बन गया। हालांकि गनीमत यह रही कि किसी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई।

लगातार ट्रेनों पर हो रही ऐसी घटनाओं ने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन के अलावा वंदे भारत, मौर्य एक्सप्रेस और अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी हाल के दिनों में पत्थरबाजी, छिनतई और चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। इससे यात्रियों के मन में असुरक्षा की भावना गहराती जा रही है।
बताया जा रहा है कि जैसे ही ट्रेन मानसी स्टेशन से आगे बढ़ी, अचानक तेज धमाके की आवाज सुनाई दी। ए-4 कोच में बैठे यात्रियों को कुछ समझ आता, उससे पहले खिड़की का शीशा चकनाचूर होकर बिखर गया। 17 नंबर बर्थ पर दीमापुर से नई दिल्ली जा रहे एक यात्री के पास ही पत्थर आकर लगा था। यात्री ने बताया कि आवाज इतनी तेज थी कि कुछ क्षण के लिए लगा जैसे कोई बड़ा हादसा हो गया हो। शीशा टूटते ही आसपास बैठे यात्री घबरा गए और बच्चों व महिलाओं में चीख-पुकार मच गई।
संयोग से पत्थर सीधे यात्री को नहीं लगा, वरना बड़ा हादसा हो सकता था। ट्रेन स्टाफ ने तुरंत स्थिति संभाली और यात्रियों को शांत कराया। घटना की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम और संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को दी गई। जब ट्रेन मुजफ्फरपुर स्टेशन पहुंची तो वहां आरपीएफ की टीम ने कोच का निरीक्षण किया और यात्रियों से घटना की जानकारी ली।
ट्रेन में मौजूद सीएनडब्ल्यू (कोच एंड वैगन) विभाग के रेलकर्मियों ने टूटी खिड़की का शीशा तत्काल बदल दिया ताकि आगे की यात्रा सुरक्षित ढंग से पूरी हो सके। हालांकि इस दौरान कुछ समय के लिए ट्रेन में असहज माहौल बना रहा। कई यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से सवाल किया कि आखिर प्रीमियम ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है।
घटना के बाद विभिन्न स्टेशनों की आरपीएफ इकाइयों के बीच समन्वय को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी रही। सूत्रों के अनुसार, एस्कॉर्ट पार्टी द्वारा बयान लेकर कंट्रोल को भेजा गया, लेकिन इस मामले में कोई भी अधिकारी स्पष्ट रूप से कुछ भी बताने से बचता नजर आया। इससे यात्रियों में यह संदेश गया कि सुरक्षा एजेंसियां अभी भी इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
रेलवे सूत्रों का कहना है कि ट्रेन पर पत्थर चलने की सूचना कई बार एस्कॉर्ट पार्टी तक तुरंत नहीं पहुंच पाती। ट्रेन तेज रफ्तार से आगे बढ़ जाती है और करीब 100 से 150 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद घटना की जानकारी अगले स्टेशन को दी जाती है। तब तक संभावित आरोपी काफी दूर निकल चुके होते हैं। यही कारण है कि जीआरपी और आरपीएफ के लिए दोषियों को पकड़ पाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
यात्रियों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब ऐसी घटना हुई हो। पिछले कुछ महीनों में कई ट्रेनों पर पत्थरबाजी की खबरें सामने आई हैं। राजधानी और वंदे भारत जैसी ट्रेनों को देश की प्रतिष्ठा से जोड़ा जाता है, ऐसे में उन पर हमला होना गंभीर चिंता का विषय है। यात्रियों ने मांग की है कि संवेदनशील इलाकों की पहचान कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएं।
रेलवे प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। आरपीएफ और जीआरपी संयुक्त रूप से छानबीन कर रही हैं। आसपास के गांवों और संभावित स्थानों की पहचान की जा रही है, जहां से पत्थर फेंके गए हो सकते हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रेन पर पत्थरबाजी केवल शरारत नहीं, बल्कि गंभीर अपराध है। इससे यात्रियों की जान को खतरा होता है और रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचता है। कई बार ऐसे हमलों से बड़ी दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। इसलिए रेलवे को तकनीकी उपायों जैसे सीसीटीवी निगरानी, ड्रोन सर्विलांस और संवेदनशील ट्रैक सेक्शन पर गश्त बढ़ाने जैसे कदम उठाने चाहिए।
इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। जब तक सूचना तंत्र को मजबूत नहीं किया जाएगा और स्थानीय स्तर पर सतर्कता नहीं बढ़ेगी, तब तक ऐसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा।
फिलहाल राजधानी एक्सप्रेस अपनी यात्रा पूरी कर चुकी है, लेकिन यात्रियों के मन में जो डर बैठ गया है, उसे खत्म करने के लिए रेलवे प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे। यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि वे बिना भय के अपनी यात्रा कर सकें।







