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पटना

शंभू गर्ल्स हॉस्टल केस: NEET छात्रा की मौत पर गहराता रहस्य, तीन एंगल से जांच, निर्णायक सबूत की तलाश में पुलिस

January 19, 20261 Mins Read
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पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत ने बिहार में सनसनी फैला दी है। यह मामला आत्महत्या है या फिर एक सोची-समझी हत्या, इसका जवाब अब तक साफ नहीं हो पाया है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि छात्रा के साथ मृत्यु से पहले गंभीर आपराधिक कृत्य हुआ था। इसके बाद न सिर्फ जांच की दिशा बदली, बल्कि पटना पुलिस की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।

पटना पुलिस अब दावा कर रही है कि जांच अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और जल्द ही ऐसा खुलासा होगा, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुल जाएंगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, केस की दिशा तय करने के लिए केवल एक ठोस प्रमाण का मिलना बाकी है।

शुरुआती दावों पर उठे सवाल

घटना के सामने आने के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस ने इसे आत्महत्या करार दिया था। थानाध्यक्ष से लेकर एएसपी और एसपी तक ने एक सुर में कहा कि छात्रा ने खुदकुशी की है। यहां तक कि एसएसपी स्तर के अधिकारी ने भी यह स्पष्ट शब्दों में कहा था कि छात्रा के साथ किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा या दुष्कर्म नहीं हुआ।

पुलिस का यह दावा भी सामने आया कि छात्रा के कमरे से बड़ी संख्या में नींद की गोलियां बरामद की गई थीं, जिससे आत्महत्या की थ्योरी को मजबूत करने की कोशिश की गई। लेकिन यह सवाल भी उठा कि इतनी बड़ी मात्रा में नींद की गोलियां एक सामान्य छात्रा को आखिर कैसे और कहां से मिलीं।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से बदला पूरा घटनाक्रम

जब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सामने आई तो पुलिस के शुरुआती दावों की सच्चाई पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए। रिपोर्ट में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न की पुष्टि हुई, जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया। इसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर तीखी आलोचना शुरू हो गई और यह आरोप लगने लगे कि जांच को शुरू से ही गलत दिशा में मोड़ा गया।

इसी बीच, बढ़ते दबाव के चलते पुलिस ने हॉस्टल मालिक मनीष राज उर्फ मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि पुलिस का कहना है कि वह अभी अप्राथमिक अभियुक्त हैं और जांच के दायरे में अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं।

SIT का गठन, लेकिन परिजन संतुष्ट नहीं

मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी के नेतृत्व में एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया। पुलिस का दावा है कि SIT हर पहलू की गहनता से जांच कर रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।

इसके बावजूद छात्रा के परिजन पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि जिन अधिकारियों ने शुरुआती जांच में गलत बयान देकर मामले को भटकाने की कोशिश की, उन्हें भी आरोपी बनाया जाना चाहिए। परिजनों का आरोप है कि थानाध्यक्ष ने झूठी रिपोर्ट दी और वरिष्ठ अधिकारियों ने बिना ठोस आधार के आत्महत्या की बात को सार्वजनिक किया।

हॉस्टल प्रबंधन पर उठे सवाल

परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश हॉस्टल प्रबंधन को लेकर भी है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि हॉस्टल संचालक नीलम अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल और उनके पुत्र अंशु अग्रवाल से पुलिस ने पूछताछ की या नहीं। अगर पूछताछ हुई है तो उसका विवरण सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया, और अगर नहीं हुई तो इसके पीछे क्या कारण है?

लोगों का यह भी आरोप है कि पुलिस किसी दबाव में आकर कुछ लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है, जिससे जांच की निष्पक्षता पर संदेह गहरा रहा है।

तीन थ्योरी पर टिक गई जांच

अब पटना पुलिस ने आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है कि जांच तीन प्रमुख थ्योरी पर केंद्रित है।

पहली थ्योरी के अनुसार, छात्रा जब जहानाबाद से पटना के लिए रवाना हुई थी, उस समय उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति कैसी थी, इसकी जांच की जा रही है। यह जानने की कोशिश हो रही है कि यात्रा से पहले या यात्रा के दौरान उसके साथ कोई अप्रिय घटना तो नहीं हुई।

दूसरी थ्योरी इस बात पर केंद्रित है कि पटना पहुंचने के बाद छात्रा किसी अन्य व्यक्ति या स्थान के संपर्क में आई थी या नहीं। अगर वह किसी से मिली थी, तो वहां क्या हुआ और हॉस्टल लौटते समय उसकी हालत कैसी थी, यह जांच का अहम हिस्सा है।

तीसरी और सबसे संवेदनशील थ्योरी यह मानकर चल रही है कि यदि छात्रा हॉस्टल लौटते वक्त सामान्य थी, तो फिर अपराध हॉस्टल परिसर के भीतर ही हुआ। इस एंगल से हॉस्टल के कमरों, वहां मौजूद लोगों, आने-जाने वालों और उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।

तकनीकी जांच से खुल सकती है गुत्थी

पुलिस के अनुसार, अब जांच पूरी तरह तकनीकी और वैज्ञानिक तरीकों पर आधारित है। मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन, डिलीट किए गए डेटा, छात्रा की मूवमेंट हिस्ट्री और फॉरेंसिक साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि जांच में तीन संभावित घटनास्थलों की पहचान की गई है—एक पटना आने से पहले, दूसरा पटना पहुंचने के बाद किसी अन्य स्थान पर और तीसरा शंभू गर्ल्स हॉस्टल। इन तीनों स्थानों से जुड़े सबूतों को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की कड़ी तैयार की जा रही है।

निर्णायक मोड़ की ओर मामला

पटना पुलिस का दावा है कि जांच अब अंतिम पायदान पर है और बहुत जल्द वह सबूत सामने आ जाएगा, जो यह तय करेगा कि छात्रा की मौत आत्महत्या थी या फिर उसके पीछे कोई संगठित अपराध छिपा है।

फिलहाल यह मामला न सिर्फ एक छात्रा की मौत का रहस्य है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करता है कि क्या सच तक पहुंचने में व्यवस्था पूरी ईमानदारी से काम कर रही है या फिर सच्चाई अभी भी किसी दबाव के नीचे दबी हुई है। पूरे बिहार की निगाहें अब उस एक सबूत पर टिकी हैं, जो इस केस की दिशा और दशा दोनों तय

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