बिहार में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के नए लाभुकों की सूची को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है। ग्रामीण विकास विभाग ने इस प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश जिलों को दे दिए हैं। योजना के तहत पहले किए गए सर्वेक्षण के आधार पर लगभग एक करोड़ चार लाख परिवारों की संभावित सूची तैयार की गई थी। अब इस सूची की सत्यापन प्रक्रिया चल रही है, जिसमें यह तय किया जा रहा है कि कौन से परिवार योजना के तहत लाभ लेने के योग्य हैं और कौन से नहीं।

सत्यापन के दौरान यह देखा जा रहा है कि परिवारों द्वारा सर्वे में दी गई जानकारी सही है या नहीं। इसके अलावा, यह भी जांच की जा रही है कि सूची में शामिल परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी मानकों को पूरा कर रहे हैं या नहीं। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 40 प्रतिशत परिवार इस योजना के लिए अयोग्य पाए जा सकते हैं। इसका मतलब है कि सूची में शामिल कुल एक करोड़ चार लाख परिवारों में से केवल 60 से 65 लाख परिवारों को ही अंतिम रूप से लाभार्थी माना जा सकता है।
वर्तमान में सत्यापन का कार्य जिले और प्रखंड स्तर पर तेजी से किया जा रहा है। प्रत्येक प्रखंड में कमेटियां बनाई गई हैं जो आवेदकों की जानकारी की जांच कर रही हैं। इसके अलावा, यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्रत्येक परिवार के विवरण में कोई गलती या अनियमितता न हो। इस प्रक्रिया के बाद ही आवेदकों को योग्य और अयोग्य की श्रेणी में रखा जाएगा।
सत्यापन के बाद अंतिम सूची को ग्राम सभा में अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। ग्राम सभा की मंजूरी के बाद ही यह तय होगा कि कौन से परिवार योजना के लाभार्थी होंगे। प्रत्येक प्रखंड में कम से कम दस प्रतिशत परिवारों की सैम्पल जांच की जाएगी, ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। जिला और प्रखंड स्तर पर जांच पूरी होने के बाद ही फाइनल सूची तैयार होगी।
राज्य में पीएम आवास योजना का सर्वेक्षण कार्य 15 मई 2025 तक चलाया गया था। इस सर्वेक्षण के आधार पर सूची तैयार की गई थी, लेकिन अब सत्यापन प्रक्रिया के दौरान यह साफ हो रहा है कि कई परिवार योजना के मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। इसमें सबसे सामान्य कारणों में परिवार की आय, संपत्ति की स्थिति और अन्य सामाजिक-आर्थिक मानदंड शामिल हैं। इस वजह से लगभग 40 प्रतिशत आवेदकों के अयोग्य घोषित होने की संभावना जताई जा रही है।
नई सूची के आधार पर अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 से योजना का लाभ मिलने लगेगा। फाइनल सूची तैयार होने के बाद केंद्र सरकार की तरफ से चरणबद्ध तरीके से हर वर्ष आवास निर्माण के लिए स्वीकृति दी जाएगी। वर्तमान में जो पूर्व में हुए सर्वे के आधार पर घर बन रहे हैं, उनमें लगभग 12 लाख 20 हजार लाभुक परिवारों के पक्के मकान बनाये जाने हैं। इनमें से करीब तीन लाख मकानों का निर्माण पहले ही पूरा हो चुका है। बाकी का निर्माण पूरा करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग ने केंद्र सरकार से लंबित राशि की जल्द भुगतान करने का आग्रह किया है।
पीएम आवास योजना के तहत हर लाभुक परिवार को एक लाख 20 हजार रुपये की राशि दी जाती है, जिससे वे अपना पक्का घर बना सकें। योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर ग्रामीण परिवार को रहने के लिए सुरक्षित और पक्का मकान मिले। बिहार जैसे राज्य में जहां ग्रामीण आबादी अधिक है, इस योजना की सही और पारदर्शी कार्यवाही बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि 40 प्रतिशत परिवारों के अयोग्य होने की संभावना चिंता का विषय हो सकती है, लेकिन ग्रामीण विकास विभाग का कहना है कि यह प्रक्रिया योजना की पारदर्शिता और सही लाभार्थियों तक संसाधन पहुँचाने के लिए जरूरी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया के बाद ही यह साफ होगा कि कौन से परिवार योजना का लाभ प्राप्त करेंगे।
ग्राम स्तर पर अनुमोदन के बाद तैयार फाइनल सूची लाभार्थियों के घर तक योजना का लाभ पहुँचाने में मदद करेगी। यह भी देखा गया है कि योजना का लाभ उन परिवारों तक पहुँचे जो वास्तव में आवास निर्माण के योग्य हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि योजना का उद्देश्य, यानी गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना, पूरी तरह से पूरा हो।
वहीं, विभाग की योजना है कि प्रत्येक जिले और प्रखंड में कमेटियों के जरिए जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि कोई परिवार किसी भी तरह से सूची में शामिल होने का गलत दावा तो नहीं कर रहा। इससे योजना में धोखाधड़ी या अनियमितताओं की संभावना न्यूनतम हो जाएगी।
इस पूरे सत्यापन और अनुमोदन की प्रक्रिया को 31 जनवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद ही नए वित्तीय वर्ष में योजना का लाभ चरणबद्ध तरीके से दिया जाएगा। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद लाभार्थियों की अंतिम सूची तैयार होगी, और योजना के तहत हर परिवार को पक्का मकान मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।
कुल मिलाकर, बिहार में पीएम आवास योजना की नई सूची तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत आवेदक अयोग्य हो सकते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया योजना की पारदर्शिता और सही लाभार्थियों तक संसाधन पहुँचाने के लिए जरूरी है। नई सूची के आधार पर अगले वित्तीय वर्ष से योजना का लाभ शुरू होगा, और लाखों परिवार अपने पक्के मकान का सपना पूरा कर सकेंगे।







