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भागलपुर में जल-सफाई शुल्क की नई वसूली शुरू, व्यवसायियों पर बढ़ा आर्थिक बोझ

February 11, 20261 Mins Read
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भागलपुर नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से शहर के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर पेयजल उपयोग शुल्क और सफाई यूजर चार्ज की वसूली शुरू कर दी है। बिहार सरकार की ‘पेयजल उपयोग शुल्क नीति-2021’ को अब नगर निगम क्षेत्र में पूरी तरह लागू कर दिया गया है। इस फैसले के बाद व्यापारियों और होटल संचालकों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि कई प्रतिष्ठानों को भारी-भरकम नोटिस थमाए जा रहे हैं। एक व्यवसायी को तो करीब 1.81 लाख रुपये का नोटिस जारी किया गया है, जिससे कारोबारी वर्ग में चिंता साफ दिख रही है।

पहले चरण में व्यवसायिक प्रतिष्ठान निशाने पर

नगर निगम ने फिलहाल पहले चरण में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से जल उपयोग शुल्क की वसूली शुरू की है। निगम प्रशासन का कहना है कि जो प्रतिष्ठान निर्धारित समय सीमा के भीतर शुल्क जमा नहीं करेंगे, उनका जल कनेक्शन काट दिया जाएगा। इतना ही नहीं, दोबारा कनेक्शन जोड़ने के लिए अलग से शुल्क देना होगा और बकाया राशि पर ब्याज भी वसूला जाएगा।

नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा के निर्देश पर होल्डिंग टैक्स से जुड़ी एजेंसी ‘लाजीकूफ’ के माध्यम से नोटिस जारी किए जा रहे हैं। एजेंसी के प्रबंधक अमित श्रीवास्तव के अनुसार, लगभग 12 हजार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की गई है, जिनमें से दो हजार को नोटिस भेजा जा चुका है। आने वाले दिनों में बाकी प्रतिष्ठानों को भी नोटिस भेजे जाएंगे।

कैसे जोड़ा गया शुल्क?

नगर निगम प्रतिमाह 150 रुपये की दर से जल उपयोग शुल्क वसूल रहा है। इस हिसाब से एक वर्ष में 1800 रुपये का अतिरिक्त भार व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर पड़ेगा। वहीं होटल संचालकों के लिए यह दर काफी अधिक रखी गई है—उनसे प्रतिमाह 5000 रुपये जल उपयोग शुल्क लिया जाएगा।

इसके अलावा सफाई यूजर चार्ज को होल्डिंग टैक्स के साथ जोड़ दिया गया है। पिछले तीन वर्षों का बकाया जोड़कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इसी कारण एक व्यवसायी को सफाई शुल्क के रूप में लगभग 1.80 लाख रुपये का नोटिस दिया गया है। वहीं एक होटल संचालक को होल्डिंग टैक्स, जल उपयोग शुल्क और सफाई यूजर चार्ज मिलाकर करीब 3.5 लाख रुपये का नोटिस मिला है।

दोहरी मार से परेशान व्यापारी

व्यवसायियों का कहना है कि पहले से ही महंगाई और बाजार की मंदी के बीच यह नया शुल्क आर्थिक दबाव बढ़ाने वाला है। कई छोटे दुकानदारों और मध्यम वर्गीय व्यापारियों का तर्क है कि जल मीटर लगाए बिना फ्लैट रेट से शुल्क वसूली उचित नहीं है। उनका कहना है कि जब तक वास्तविक खपत का आकलन नहीं होगा, तब तक एक समान शुल्क लगाना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।

पेयजल उपयोग शुल्क नीति-2021 क्या है?

बिहार सरकार की पेयजल उपयोग शुल्क नीति-2021 का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में हर घर तक पाइपलाइन के माध्यम से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री शहरी पेयजल निश्चय योजना, अमृत योजना, राज्य योजना और एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) से मिले ऋण के जरिए यह योजना लागू की जा रही है।

योजना के तहत जलापूर्ति व्यवस्था के संचालन और रख-रखाव के लिए संवेदकों को हर साल भुगतान किया जाता है। लेकिन संविदा अवधि समाप्त होने के बाद रख-रखाव की जिम्मेदारी नगर निकायों पर आ जाएगी। इसी संभावित वित्तीय बोझ से निपटने के लिए जल उपयोग शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया है।

वाटर मीटर अब तक नहीं लगे

नीति के अनुसार होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, सिनेमा हॉल, सर्विस स्टेशन और अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में अधिक जल खपत को देखते हुए वाटर मीटर अनिवार्य किया गया है। हालांकि, नगर निगम ने अभी तक घरों या अधिकांश प्रतिष्ठानों में मीटर नहीं लगाए हैं। जलापूर्ति योजना के तहत भविष्य में मीटर लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन फिलहाल फ्लैट दर से शुल्क वसूला जा रहा है।

संपत्ति कर आधारित जल शुल्क

आवासीय उपभोक्ताओं के लिए जल शुल्क होल्डिंग टैक्स के आधार पर तय किया गया है।

0 से 1000 रुपये होल्डिंग टैक्स वालों के लिए 480 रुपये प्रतिवर्ष (40 रुपये प्रति माह)

1001 से 2000 के लिए 780 रुपये प्रतिवर्ष (65 रुपये प्रति माह)

2001 से 3000 के लिए 1440 रुपये प्रतिवर्ष (120 रुपये प्रति माह)

3001 और उससे अधिक के लिए 1800 रुपये प्रतिवर्ष (150 रुपये प्रति माह)

कचरा कलेक्शन शुल्क भी तय

सफाई यूजर चार्ज के तहत अलग-अलग प्रतिष्ठानों के लिए अलग दरें निर्धारित की गई हैं।

आवासीय घर: 30 रुपये

मिठाई दुकान, ढाबा, छोटी दुकान: 100 रुपये

रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, छोटे होटल: 500 रुपये

स्टार होटल: 5000 रुपये

सरकारी दफ्तर, बैंक, कोचिंग, शिक्षा संस्थान: 500 रुपये

क्लिनिक, डिस्पेंसरी, लैब: 250 रुपये

अस्पताल: 1500 रुपये

50 बेड तक के अस्पताल: 3000 रुपये

गोदाम और कोल्ड स्टोरेज: 1000 रुपये

मैरेज हॉल और फेस्टिव हॉल: 2500 रुपये

खुले में कचरा डंप करने वाले होटलों पर 2000 रुपये का जुर्माना भी तय किया गया है।

आगे क्या?

नगर निगम का कहना है कि शुल्क से प्राप्त राशि जलापूर्ति और सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी। वहीं व्यवसायियों की मांग है कि पहले जल मीटर लगाए जाएं और फिर वास्तविक खपत के आधार पर शुल्क लिया जाए।

भागलपुर में जल और सफाई शुल्क की यह नई व्यवस्था आने वाले दिनों में बड़ा मुद्दा बन सकती है। एक ओर निगम इसे व्यवस्था सुधार की दिशा में जरूरी कदम बता रहा है, तो दूसरी ओर व्यापारिक वर्ग इसे आर्थिक बोझ के रूप में देख रहा है। फिलहाल नोटिस जारी होने का सिलसिला जारी है और शहर में इस फैसले को लेकर चर्चा तेज है।

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