बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी क्षेत्र से एक बेहद हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने पूरे गांव को शोक में डुबो दिया। भगवानगंज थाना क्षेत्र के दानारा गांव में शनिवार शाम एक पुआल की झोपड़ी में अचानक आग लग गई। इस हादसे में एक ही परिवार के दो छोटे बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि तीसरा बच्चा संयोग से बच गया। आग इतनी तेज थी कि पिता और ग्रामीण चाहकर भी बच्चों को नहीं बचा सके।

जानकारी के अनुसार, किसान विकास कुमार की झोपड़ी गांव के खलिहान के पास बनी हुई थी। शनिवार की शाम उनके तीन छोटे बच्चे झोपड़ी के अंदर खेल रहे थे। इसी दौरान बिजली की अस्थायी वायरिंग में शॉर्ट सर्किट हुआ और पुआल में आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरी झोपड़ी धधकने लगी।
आग की चपेट में आने से छह साल के प्रियांशु कुमार और दो साल की मानसी कुमारी झोपड़ी के अंदर फंस गए। दोनों बच्चे आग से बचने के लिए चीखते-चिल्लाते रहे, लेकिन कुछ ही मिनटों में लपटें इतनी तेज हो गईं कि अंदर जाना नामुमकिन हो गया। खेत में काम कर रहे पिता विकास कुमार ने जब धुआं उठता देखा तो वह दौड़ते हुए मौके पर पहुंचे। उन्होंने बच्चों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग और धुएं के कारण वह बेबस हो गए।
शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और पानी व मिट्टी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन पुआल होने की वजह से आग तेजी से फैलती चली गई। काफी देर बाद आग पर काबू पाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। झोपड़ी के अंदर दोनों बच्चों की जलकर मौत हो चुकी थी।
इस हादसे में विकास कुमार के तीन साल के बेटे अंशु की जान बच गई। बताया गया कि आग लगने से कुछ देर पहले ही वह झोपड़ी से बाहर निकल गया था, जिससे वह सुरक्षित बच गया। हालांकि, भाई-बहन की मौत के बाद वह भी सदमे में है।
घटना की सूचना मिलते ही भगवानगंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने दोनों बच्चों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) भेज दिया। थाना प्रभारी सुजीत कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है और जांच जारी है।
हादसे के बाद पूरे दानारा गांव में मातम का माहौल है। मृत बच्चों की मां का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं पिता सदमे में हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
यह दर्दनाक हादसा एक बार फिर कच्चे मकानों और झोपड़ियों में रहने वाले गरीब परिवारों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करता है, जहां थोड़ी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।







