बिहार के बांका जिले में एक नाबालिग छात्रा के साथ हुई घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। स्कूल से घर लौट रही छात्रा की मांग में जबरन सिंदूर डालने का मामला सामने आया है, जिसके बाद परिजन और स्थानीय लोग युवक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। घटना की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी है।

घटना का विवरण
जिले के जयपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में यह घटना घटित हुई। जानकारी के अनुसार, पीड़िता रोज की तरह स्कूल से छुट्टी लेकर घर लौट रही थी। उसी दौरान रास्ते में युवक ने घात लगाकर उसका पीछा किया। छात्रा के विरोध करने के बावजूद उसने उसे रोक लिया और जबरन उसकी मांग में सिंदूर डाल दिया, साथ ही कहा कि “तुमको हमसे प्यार करना ही होगा।”
घटना इतनी अचानक हुई कि छात्रा कुछ समझ पाती, उससे पहले आरोपी मौके से फरार हो गया। छात्रा ने बताया कि युवक काफी समय से उसका पीछा कर रहा था और आए दिन रास्ते में छेड़खानी करता था। वह लगातार उससे मिलने और प्यार जताने का दबाव बनाता था। छात्रा ने विरोध जताया तो भी उसकी हरकतें बढ़ती गईं, जिससे मानसिक रूप से उसे काफी परेशान होना पड़ा।
पीड़िता और परिवार का आक्रोश
घटना के बाद छात्रा भयभीत होकर घर पहुंची और अपने परिजनों को पूरी घटना बताई। छात्रा के पिता ने तुरंत जयपुर थाना पहुंचकर लिखित आवेदन दिया। आवेदन में उन्होंने घटना की पूरी जानकारी दी और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
छात्रा के परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि इस घटना ने न केवल छात्रा को मानसिक रूप से परेशान किया, बल्कि पूरे गांव में आक्रोश फैला दिया। लोग युवक की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
FIR दर्ज, आरोपी की तलाश जारी
छात्रा के पिता के आवेदन के आधार पर पुलिस ने घरचप्या गांव निवासी 25 वर्षीय प्रमोद मुर्मू के खिलाफ मामला दर्ज किया। मामले में POCSO एक्ट सहित अन्य संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।
जयपुर थाना अध्यक्ष आलोक कुमार ने बताया कि आरोपी घटना के दौरान छात्रा के शोर मचाने पर वहां से भाग निकला। पुलिस फिलहाल उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी और तलाश अभियान चला रही है।
युवक की हरकतें और पीछा करना
पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी लंबे समय से उसका पीछा कर रहा था। वह अक्सर रास्ते में उसका इंतजार करता और स्कूल आने-जाने के दौरान लगातार उसे परेशान करता था। छात्रा ने बताया कि युवक पर उसकी नजरें थीं और वह बार-बार मानसिक दबाव डालता था।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि पूरे इलाके में सुरक्षा की चिंता को बढ़ा देने वाला है। नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासन को तुरंत कदम उठाने की आवश्यकता है।
छात्रा की मानसिक स्थिति
घटना के बाद छात्रा मानसिक रूप से भयभीत और डरी-सहमी है। वह अब स्कूल जाने में भी डर महसूस कर रही है। परिजनों ने बताया कि उन्हें लगातार चिंता रहती है कि कहीं ऐसी कोई घटना दोबारा न हो। इस घटना ने परिवार पर भारी मानसिक दबाव डाला है।
स्थानीय लोग और ग्रामीण भी पीड़िता के परिवार के साथ खड़े हैं और प्रशासन से आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे युवक को कानूनी तरीके से सजा मिलनी चाहिए ताकि नाबालिगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
पुलिस की जांच और सुरक्षा उपाय
जयपुर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू कर दी। आरोपी की तलाश के लिए आसपास के सभी गांवों और इलाकों में पुलिस टीमों को लगाया गया है।
पुलिस ने आसपास के साक्ष्य और गवाहों से भी पूछताछ की है। इसमें छात्रा की कहानी, ग्रामीणों की गवाहियां और आरोपी के पिछले व्यवहार की जानकारी शामिल है। पुलिस की कोशिश है कि मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए और आरोपी को पकड़कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा पुलिस ने स्कूल और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाने की भी योजना बनाई है ताकि अन्य छात्राओं को सुरक्षित रखा जा सके।
ग्रामीण और समाज में आक्रोश
घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्रों में भारी आक्रोश है। लोग सोशल मीडिया और स्थानीय प्रशासन से आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नाबालिगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी होगी।
विशेष रूप से माता-पिता ने यह चेतावनी दी है कि अगर आरोपी को समय पर गिरफ्तार नहीं किया गया, तो समाज में असुरक्षा और डर का माहौल बढ़ सकता है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि पीड़िता को मनोवैज्ञानिक और कानूनी सहायता प्रदान की जाए।
निष्कर्ष
बांका जिले की यह घटना न केवल संवेदनशील है, बल्कि पूरे राज्य में नाबालिग छात्रों की सुरक्षा पर सवाल उठाती है। स्कूल जाने वाली छात्राओं को मानसिक और शारीरिक सुरक्षा दोनों की आवश्यकता है।
प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए और न्याय के जरिए पीड़िता को संरक्षण दिया जाए। ग्रामीण और परिवार की निगाहें अब पुलिस की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि नाबालिगों के साथ होने वाली हरकतों पर समाज और प्रशासन को शून्य सहिष्णुता दिखानी होगी। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने तक पीड़िता की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखना जरूरी है।







