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साबरमती एक्सप्रेस में फर्जी टीटीई गिरफ्तार, समस्तीपुर में जीआरपी के हवाले

February 19, 20261 Mins Read
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बिहार में चल रही Sabarmati Express में उस समय अफरातफरी मच गई जब टिकट जांच के दौरान एक युवक खुद को टीटीई बताकर यात्रियों से टिकट चेक करता पाया गया। संदेह होने पर रेल अधिकारियों ने उससे पूछताछ की और जब वह कोई वैध पहचान पत्र या नियुक्ति संबंधी दस्तावेज पेश नहीं कर सका, तो उसे हिरासत में ले लिया गया। बाद में ट्रेन के समस्तीपुर स्टेशन पहुंचने पर आरोपी को उतारकर जीआरपी के सुपुर्द कर दिया गया।

दरभंगा-समस्तीपुर के बीच हुई कार्रवाई

घटना गाड़ी संख्या 19166 साबरमती एक्सप्रेस में उस समय सामने आई, जब ट्रेन दरभंगा से समस्तीपुर की ओर बढ़ रही थी। नियमित टिकट जांच अभियान के दौरान एक युवक यात्रियों से टिकट दिखाने को कह रहा था। शुरुआत में यात्रियों को लगा कि वह अधिकृत टीटीई है, लेकिन उसकी वर्दी और व्यवहार को लेकर कुछ लोगों को शक हुआ।

बताया जाता है कि युवक के पास टीटीई जैसा बैग और टिकट जांच से जुड़ा सामान था, जिससे वह असली कर्मचारी जैसा दिखने की कोशिश कर रहा था। हालांकि जब ड्यूटी पर तैनात रेल कर्मियों ने उसे देखा, तो उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं।

पहचान पत्र मांगते ही खुली पोल

रेलवे अधिकारियों ने युवक से अधिकृत पहचान पत्र, नियुक्ति पत्र और ड्यूटी चार्ट दिखाने को कहा। वह कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका। पूछताछ के दौरान उसके जवाब भी संतोषजनक नहीं पाए गए। इसके बाद अधिकारियों ने तत्काल उसे हिरासत में ले लिया।

यात्रियों के बीच यह खबर फैलते ही हलचल मच गई। कई यात्रियों ने बताया कि युवक उनसे टिकट मांग रहा था और कुछ को सीट से जुड़ी जानकारी भी दे रहा था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि उसने किसी से अवैध वसूली की या नहीं।

समस्तीपुर स्टेशन पर उतारकर जीआरपी को सौंपा

जैसे ही ट्रेन समस्तीपुर स्टेशन पहुंची, आरोपी को उतारकर रेलवे सुरक्षा बल और जीआरपी के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने आरोपी की पहचान श्रवण कुमार कपर के रूप में की है। वह नेपाल के धनुषा जिले के मणिपट्टी गांव का रहने वाला बताया जा रहा है।

पुलिस के अनुसार, आरोपी नेपाली नागरिक है। उसके पिता का नाम रामउद्गार कपर बताया गया है। फिलहाल उससे गहन पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वह अकेले काम कर रहा था या किसी गिरोह का हिस्सा है।

रेल थानाध्यक्ष का बयान

रेल थानाध्यक्ष बीरबल कुमार राय ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है। यह जांच की जा रही है कि क्या उसने किसी यात्री से पैसे वसूले या नहीं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि उसके पास टीटीई जैसा सामान कहां से आया और क्या किसी अन्य व्यक्ति की इसमें संलिप्तता है।

उन्होंने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। प्रारंभिक जांच में यह मामला धोखाधड़ी और सरकारी कर्मचारी बनकर छल करने से जुड़ा प्रतीत हो रहा है।

आरोपी का दावा—मैं निर्दोष हूं

गिरफ्तार युवक ने पूछताछ के दौरान खुद को निर्दोष बताया है। उसका कहना है कि वह किसी प्रकार की अवैध गतिविधि में शामिल नहीं था। हालांकि पुलिस उसके दावों की पुष्टि करने में जुटी है। जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, यदि यह साबित होता है कि उसने यात्रियों से अवैध वसूली की है, तो उसके खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा। साथ ही यदि किसी गिरोह का नेटवर्क सामने आता है, तो अन्य आरोपियों की तलाश भी की जाएगी।

यात्रियों में चिंता

इस घटना के बाद यात्रियों के बीच सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रेलवे में टीटीई जैसी जिम्मेदार भूमिका का फर्जी रूप धारण कर ट्रेन में घूमना गंभीर सुरक्षा चूक मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते संदेह नहीं होता, तो आरोपी बड़ी रकम की ठगी कर सकता था।

रेलवे अधिकारियों ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना दें। साथ ही केवल अधिकृत पहचान पत्र दिखाने वाले कर्मचारियों को ही आधिकारिक मानें।

सुरक्षा व्यवस्था पर जोर

रेलवे प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों का कहना है कि ट्रेनों में नियमित जांच अभियान और सघन किया जाएगा। स्टाफ को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

विशेषज्ञों के अनुसार, भीड़भाड़ वाली ट्रेनों में फर्जी कर्मचारी बनकर धोखाधड़ी करने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। ऐसे में यात्रियों को भी सतर्क रहना आवश्यक है।

आगे की कार्रवाई

फिलहाल आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी की जा रही है। पुलिस उसकी पृष्ठभूमि और संभावित आपराधिक रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं वह पहले भी इस तरह की घटनाओं में शामिल तो नहीं रहा।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि सार्वजनिक परिवहन में सतर्कता कितनी जरूरी है। रेलवे अधिकारियों की त्वरित कार्रवाई से एक संभावित बड़ी ठगी को रोका जा सका। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि आरोपी की मंशा क्या थी और उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क था या नहीं।

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