नकली और नशीली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा को एक और बड़ी सफलता मिली है। बिहार के गया जिले में चल रही एक अवैध दवा निर्माण इकाई का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी अरुण (59) को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई अपराध शाखा की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) द्वारा की गई, जिसने एक सप्ताह के भीतर दूसरी बड़ी फैक्टरी का खुलासा किया है।

लगातार कार्रवाई से खुली परतें
अपराध शाखा के अनुसार, सितंबर 2025 से नकली दवाइयों के नेटवर्क के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गया में हुई इस कार्रवाई के साथ अब तक कुल नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
इस पूरे अभियान का नेतृत्व अपराध शाखा के पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव के निर्देशन में किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि नकली दवाओं का यह गिरोह पिछले करीब तीन वर्षों से बिना किसी वैध लाइसेंस के अवैध उत्पादन में लिप्त था। गिरोह खासतौर पर साइकोट्रोपिक (नशीली) दवाओं का निर्माण कर उन्हें बाजार में सप्लाई कर रहा था।
भारी मात्रा में बरामदगी
पुलिस ने गया स्थित फैक्टरी से 1.20 लाख नकली जिंक टैबलेट, 42,480 नकली एजिथ्रोमाइसिन टैबलेट, 27 किलोग्राम पैरासिटामोल पाउडर और डिलोना एक्वा के 444 नकली इंजेक्शन बरामद किए हैं। इसके अलावा दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें, पैकेजिंग यूनिट और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए।
प्राथमिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पांच करोड़ रुपये कीमत के ट्रामाडोल पाउडर का इस्तेमाल कर नशीली दवाएं तैयार कर रहा था। इन टैबलेट्स का इस्तेमाल कथित तौर पर हेरोइन के विकल्प के रूप में किया जा रहा था, जिससे यह मामला और गंभीर हो गया है।
पटना से जुड़ा था तार
इस कार्रवाई से पहले पुलिस ने पटना में भी एक नकली दवा फैक्टरी का खुलासा किया था। 9 फरवरी को पटना से तनिष्क झा (24) नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से भारी मात्रा में नकली दवाएं और कफ सिरप की खाली बोतलें बरामद हुई थीं।
तनिष्क से पूछताछ के दौरान ही गया में चल रही दूसरी फैक्टरी की जानकारी सामने आई। एसीपी सत्येंद्र मोहन और इंस्पेक्टर नितिश कुमार की टीम ने पूछताछ के आधार पर अरुण की पहचान की और उसके ठिकाने की पुष्टि की।
‘लाइफ केयर साइंस’ के नाम पर चल रहा था धंधा
जांच में पता चला कि अरुण ‘लाइफ केयर साइंस’ नाम से नकली दवा निर्माण इकाई संचालित कर रहा था। शुक्रवार को पुलिस टीम गया पहुंची और स्थानीय प्रशासन तथा ड्रग विभाग की मौजूदगी में फैक्टरी पर छापा मारा। मौके से भारी मात्रा में नकली दवाएं और कच्चा माल बरामद हुआ।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, फैक्टरी बिना किसी लाइसेंस के संचालित की जा रही थी। वहां न तो गुणवत्ता जांच की कोई व्यवस्था थी और न ही वैध उत्पादन अनुमति। इससे साफ है कि आरोपी पूरी तरह अवैध तरीके से लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे थे।
गिरोह की कार्यप्रणाली
जांच में सामने आया है कि गिरोह बाजार में लोकप्रिय ब्रांड की दवाओं की नकली पैकेजिंग तैयार कर उन्हें असली उत्पाद के रूप में बेचता था। खासकर ट्रामाडोल जैसे साइकोट्रोपिक पदार्थों का उपयोग कर नशीली दवाएं बनाई जाती थीं, जिन्हें अवैध नेटवर्क के जरिए सप्लाई किया जाता था।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी नकली दवाएं न केवल मरीजों की जान के लिए खतरा होती हैं, बल्कि नशे की लत को भी बढ़ावा देती हैं। यदि समय रहते इन पर रोक न लगाई जाए तो यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर संकट बन सकता है।
तीन साल से सक्रिय था नेटवर्क
पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि आरोपी करीब तीन वर्षों से इस अवैध कारोबार में सक्रिय था। गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
अपराध शाखा का कहना है कि सितंबर 2025 में दर्ज एफआईआर के बाद से यह नेटवर्क एक-एक कर उजागर हो रहा है। सबसे पहले अनिरुद्ध नामक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, जिसके पास से भारी मात्रा में ट्रामाडोल पाउडर मिला था। उसी कड़ी में आगे की कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया और अब गया फैक्टरी के मुख्य संचालक को भी पकड़ लिया गया है।
स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़
नकली दवाओं का कारोबार सीधे तौर पर आम जनता की जान के साथ खिलवाड़ है। जिंक, एजिथ्रोमाइसिन और पैरासिटामोल जैसी दवाएं आमतौर पर बुखार, संक्रमण और अन्य बीमारियों में इस्तेमाल होती हैं। यदि इनकी गुणवत्ता मानकों के अनुरूप न हो तो मरीजों को गंभीर दुष्परिणाम झेलने पड़ सकते हैं।
पुलिस ने कहा है कि जब्त की गई दवाओं के नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सप्लाई चेन में शामिल अन्य लोगों की भी तलाश जारी है।
आगे की जांच जारी
फिलहाल आरोपी अरुण से गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकली दवाओं की सप्लाई किन-किन राज्यों में की जा रही थी और इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।
अधिकारियों का कहना है कि नकली दवाओं के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा। आम जनता से भी अपील की गई है कि दवाएं केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस या ड्रग विभाग को दें।
कुल मिलाकर, गया में हुई यह कार्रवाई नकली दवा कारोबार पर बड़ी चोट मानी जा रही है। पुलिस की सतत कार्रवाई से इस अवैध नेटवर्क की परतें खुल रही हैं और उम्मीद है कि जल्द ही इसके बाकी सदस्य भी कानून के शिकंजे में होंगे।







