Shopping cart

Breaking News :
  • Home
  • बिहार
  • मरीज सौदेबाजी विवाद में रंगदारी का मामला, वायरल ऑडियो से खुली परतें
बिहार

मरीज सौदेबाजी विवाद में रंगदारी का मामला, वायरल ऑडियो से खुली परतें

February 17, 20261 Mins Read
9

गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित एक निजी अस्पताल से जुड़े रंगदारी प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। मानसी अस्पताल के संचालक डॉ. पंकज कुमार दीक्षित से कथित रूप से 15 लाख रुपये की मांग और धमकी के मामले में पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। शुरुआती पड़ताल में मामला सिर्फ रंगदारी का नहीं, बल्कि मरीजों की कथित खरीद-फरोख्त और कमीशन आधारित व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा सामने आ रहा है।

वायरल ऑडियो बना जांच की अहम कड़ी

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप ने पूरे घटनाक्रम को सार्वजनिक कर दिया। करीब 3 मिनट 31 सेकंड की इस रिकॉर्डिंग में डॉक्टर किसी राजेश नामक व्यक्ति से बातचीत करते हुए कथित लेन-देन और पैसों के विवाद का जिक्र करते सुनाई दे रहे हैं। ऑडियो में डॉक्टर यह कहते हुए सुनाई देते हैं कि बिट्टू खान नामक व्यक्ति ने उनसे करीब 20 लाख रुपये लिए हैं और रकम वापस नहीं की गई है।

डॉक्टर यह भी कहते हैं कि यदि संबंधित लोग रकम वापस नहीं करते तो सामने वाला पक्ष ही भुगतान कर दे। साथ ही, उन्होंने यह दावा भी किया कि पूरी रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंप दी गई है। इस ऑडियो के सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को महज धमकी का नहीं, बल्कि संगठित तरीके से चल रहे मरीजों के कथित ट्रांसफर नेटवर्क के रूप में देखना शुरू कर दिया है।

मरीज लाने पर कमीशन का खेल?

पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि डॉ. पंकज अपने अस्पताल में बिहार से मरीज लाने के लिए एंबुलेंस संचालक बिट्टू खान की सेवाएं लेते थे। इसके एवज में कथित तौर पर कमीशन दिया जाता था। आरोप है कि हाल के दिनों में बिट्टू खान ने मरीजों को मानसी अस्पताल की बजाय सान्वी अस्पताल भेजना शुरू कर दिया।

यहीं से विवाद की शुरुआत बताई जा रही है। मरीजों के रुख बदलने से आर्थिक नुकसान की आशंका के चलते डॉ. पंकज ने इस पर आपत्ति जताई और सान्वी अस्पताल के मालिक अजय शर्मा से बात की। पुलिस को संदेह है कि यही व्यावसायिक तनातनी आगे चलकर रंगदारी और धमकी के आरोपों में बदल गई।

15 लाख की मांग और धमकी का आरोप

डॉ. पंकज का आरोप है कि उन्हें राहुल शर्मा नामक व्यक्ति ने फोन कर 15 लाख रुपये की मांग की। आरोप है कि रकम न देने पर परिवार और अस्पताल को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी गई।

पुलिस के अनुसार, राहुल शर्मा सान्वी अस्पताल में प्रबंधक के रूप में कार्यरत है और उसका आपराधिक इतिहास भी रहा है। वह सिकरीगंज थाने का हिस्ट्रीशीटर बताया जा रहा है। इसके अलावा, उसका नाम कैंट थाना क्षेत्र में डीआईजी बंगले के सामने हुई फायरिंग की घटना में भी सामने आ चुका है।

इस पृष्ठभूमि को देखते हुए पुलिस मामले को गंभीरता से ले रही है और संभावित आपराधिक नेटवर्क की जांच कर रही है।

व्यवसायिक संबंध और पुरानी जान-पहचान

जांच में यह भी सामने आया है कि डॉ. पंकज, राहुल शर्मा और अजय शर्मा के बीच वर्षों से व्यवसायिक जान-पहचान रही है। निजी अस्पतालों के बीच मरीजों को रेफर करने, एंबुलेंस नेटवर्क के जरिए लाने और उसके बदले भुगतान की व्यवस्था पहले से चलती आ रही थी।

पुलिस का मानना है कि जब यह संतुलन बिगड़ा और मरीजों का प्रवाह एक अस्पताल से दूसरे की ओर मुड़ा, तो आर्थिक हितों पर असर पड़ा। इसी से असंतोष पैदा हुआ और मामला विवाद में तब्दील हो गया।

पुलिस की बहुस्तरीय जांच

सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि वायरल ऑडियो से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि यह मामला महज व्यक्तिगत दुश्मनी का नहीं, बल्कि व्यावसायिक सौदे और आर्थिक लेन-देन से जुड़ा है। फिलहाल पुलिस कॉल डिटेल, बैंक ट्रांजैक्शन और संबंधित पक्षों के बयान जुटा रही है।

एंबुलेंस नेटवर्क, मरीज रेफरल सिस्टम और कथित कमीशन मॉडल की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या बिहार से मरीजों को सुनियोजित तरीके से अलग-अलग अस्पतालों में भेजा जाता था और इसके बदले तय रकम ली जाती थी।

यदि यह साबित होता है कि मरीजों की खरीद-फरोख्त या अवैध आर्थिक समझौते किए जा रहे थे, तो मामला और गंभीर धाराओं में दर्ज हो सकता है।

स्वास्थ्य सेवा में नैतिकता पर सवाल

यह प्रकरण निजी अस्पतालों के कामकाज और मरीज रेफरल प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि मरीजों को चिकित्सा जरूरत के बजाय आर्थिक समझौते के आधार पर इधर-उधर भेजा जा रहा था, तो यह चिकित्सा नैतिकता के विरुद्ध माना जाएगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। मरीजों का भरोसा अस्पतालों की सबसे बड़ी पूंजी होता है। ऐसे विवाद न केवल संबंधित संस्थानों की छवि को प्रभावित करते हैं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर अविश्वास पैदा कर सकते हैं।

आगे क्या?

फिलहाल पुलिस सभी पक्षों से पूछताछ कर रही है। वायरल ऑडियो की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है, ताकि उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित की जा सके।

यदि रंगदारी की मांग और धमकी के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो संबंधित आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, यदि जांच में मरीजों की खरीद-फरोख्त या अवैध कमीशन तंत्र की पुष्टि होती है, तो यह मामला बड़े नेटवर्क के खुलासे का कारण बन सकता है।

निष्कर्ष

गोरखपुर में सामने आया यह मामला सिर्फ रंगदारी तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि निजी अस्पतालों के बीच मरीजों के कथित लेन-देन और कमीशन आधारित व्यवस्था की ओर इशारा कर रहा है। वायरल ऑडियो ने पूरे विवाद को सार्वजनिक कर दिया है और पुलिस अब हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।

आने वाले दिनों में जांच की दिशा और अदालत में पेश होने वाले साक्ष्य तय करेंगे कि यह मामला केवल व्यावसायिक विवाद था या स्वास्थ्य सेवा से जुड़े एक बड़े अनियमित नेटवर्क का हिस्सा।

Related Posts