बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से शनिवार देर शाम एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही एक 20 वर्षीय छात्रा ने दारोगा भर्ती परीक्षा से ठीक एक दिन पहले ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना खबड़ा गुमटी के पास हुई, जहां छात्रा ने अपनी साइकिल खड़ी कर ट्रेन का इंतजार किया और उसके आते ही छलांग लगा दी। इस दर्दनाक हादसे ने न सिर्फ एक होनहार छात्रा की जिंदगी छीन ली, बल्कि उसके पिता का दारोगा बनाने का सपना भी हमेशा के लिए चूर-चूर हो गया।

मृतका की पहचान वैशाली जिले के बलिगांव थाना क्षेत्र के गोविंदपुर बेला गांव निवासी सानया कुमारी के रूप में हुई है। सानया के पिता दीपक कुमार सिंह किसान हैं और बेटी की पढ़ाई-लिखाई को लेकर उन्होंने बड़े सपने देखे थे। परिवार के अनुसार, सानया शुरू से ही पढ़ाई में मेहनती थी और दारोगा बनने की तैयारी में पूरी तरह जुटी हुई थी। रविवार को उसकी बिहार पुलिस अवर निरीक्षक (दारोगा) भर्ती परीक्षा होनी थी, जिसके लिए वह काफी समय से तैयारी कर रही थी।
सानया मुजफ्फरपुर के खबड़ा इलाके में अपनी छोटी बहन के साथ डेरा लेकर रहती थी। वह खुद प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती थी, जबकि उसकी छोटी बहन कॉलेज की पढ़ाई कर रही थी। दोनों बहनें साथ रहकर एक-दूसरे का सहारा बनी हुई थीं। शनिवार को भी सानया रोज की तरह कोचिंग से पढ़ाई करके डेरा लौट रही थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसकी जिंदगी की आखिरी शाम होगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सानया ने खबड़ा गुमटी के पास अपनी साइकिल खड़ी की और रेलवे ट्रैक के पास खड़ी हो गई। कुछ देर बाद जैसे ही ट्रेन आई, उसने अचानक ट्रेन के आगे छलांग लगा दी। घटना इतनी अचानक हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही सब खत्म हो चुका था। ट्रेन की चपेट में आने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद वहां अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही सबसे पहले जीआरपी (रेलवे पुलिस) की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन घटनास्थल को आउटर सिग्नल के बाहर का बताते हुए मामले की जानकारी स्थानीय काजी मोहम्मदपुर थाना पुलिस को दी गई। इसके बाद काजी मोहम्मदपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेज दिया।
घटना की जानकारी मिलने पर सानया के चाचा मुकेश सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पुलिस को बताया कि सानया तीन बहनों में मझली थी। बड़ी बहन की शादी महज डेढ़ महीने पहले ही हुई थी, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था। लेकिन इस घटना ने उस खुशी को गहरे मातम में बदल दिया। सानया की मौत की खबर सुनते ही परिवार में कोहराम मच गया।
सबसे ज्यादा बुरा हाल सानया की छोटी बहन का था, जो उसके साथ ही खबड़ा में रहती थी। बहन के शव को देखकर वह बार-बार बेहोश हो जा रही थी। आसपास मौजूद लोग और पुलिसकर्मी उसे संभालने की कोशिश कर रहे थे। वहीं, पिता दीपक कुमार सिंह का रो-रोकर बुरा हाल था। बेटी की मौत ने उन्हें पूरी तरह तोड़ दिया। वह बार-बार यही कह रहे थे कि उन्होंने बेटी को बड़े सपने दिखाए थे और आज सब कुछ खत्म हो गया।
पुलिस जांच में एक अहम बात सामने आई है कि सानया का मोबाइल फोन घटनास्थल से बरामद नहीं हुआ है। काजी मोहम्मदपुर थानाध्यक्ष नवलेश कुमार आजाद ने बताया कि यह पता लगाया जा रहा है कि छात्रा का मोबाइल उसके डेरा पर था या किसी और जगह। मोबाइल और उसके सोशल मीडिया अकाउंट की जांच की जाएगी, ताकि यह समझा जा सके कि आत्महत्या के पीछे कोई मानसिक दबाव, तनाव या अन्य कारण तो नहीं था।
पुलिस का कहना है कि शुरुआती तौर पर यह मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है। परिजनों ने पहले पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था। वे मानसिक रूप से इतने टूट चुके थे कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया के लिए तैयार नहीं थे। हालांकि, पुलिस द्वारा समझाने-बुझाने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए।
फिलहाल पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि सानया परीक्षा के दबाव में थी या किसी निजी कारण से परेशान थी। पुलिस का कहना है कि स्थिति सामान्य होने के बाद छोटी बहन से सानया की दिनचर्या, मानसिक स्थिति और दोस्तों के बारे में जानकारी ली जाएगी। उसके दोस्तों और कोचिंग से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जाएगी, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
यह घटना एक बार फिर प्रतियोगी परीक्षाओं के बढ़ते दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर सवाल खड़े करती है। दारोगा बनने का सपना देखने वाली सानया की मौत ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता की दौड़ में कहीं हम अपने बच्चों पर जरूरत से ज्यादा बोझ तो नहीं डाल रहे। एक होनहार छात्रा की असमय मौत ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है और उसके परिवार के लिए यह ऐसा घाव है, जो शायद कभी भर न पाए।







