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पटना

**पटना के गर्ल्स हॉस्टल में मौत नहीं, साजिश थी!

January 16, 20261 Mins Read
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली नीट छात्रा के साथ हुई दरिंदगी की परतें**

पटना।

बिहार की राजधानी एक बार फिर शर्मसार है। जिस शहर में सपनों को पंख मिलने चाहिए थे, वहीं एक 18 साल की नीट छात्रा का सपना, उसकी साँसें और उसका भरोसा — तीनों बेरहमी से छीन लिए गए। चित्रगुप्त नगर स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में जहानाबाद की छात्रा की मौत अब “सुसाइड” नहीं, बल्कि सुनियोजित अपराध की कहानी बनती जा रही है।

शुरुआत में सब कुछ सामान्य दिखाने की कोशिश हुई। हॉस्टल प्रबंधन ने कहा — “नींद की गोलियाँ खा ली थीं”। पुलिस ने भी शुरुआती बयान में यही दोहराया — “डिप्रेशन का मामला है”। लेकिन जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो झूठ की इमारत दरकने लगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने जो कहा, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है

मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार छात्रा के शरीर पर कई जगह संघर्ष के साफ़ निशान मिले हैं।

कंधों और गर्दन के आसपास खरोंच

सिर के पीछे गहरी चोट

शरीर के अलग‑अलग हिस्सों पर नाखूनों के निशान

नशे की सूई दिए जाने की आशंका

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मौत सिर्फ दवा के ओवरडोज़ से नहीं हुई हो सकती। यानी यह सवाल अब सीधे खड़ा है — क्या बेहोश कर छात्रा के साथ यौन हिंसा की गई?

जिस हॉस्टल में पढ़ाई का सपना था, वहीं मिली लाश

जहानाबाद के शुकराबाद थाना क्षेत्र की रहने वाली यह छात्रा पटना में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। 6 जनवरी को वह अपने कमरे में बेहोश मिली। पहले कंकड़बाग के एक निजी अस्पताल, फिर दूसरे अस्पताल में इलाज चला, लेकिन रविवार को उसने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल और हॉस्टल दोनों ने मिलकर सच्चाई छिपाने की कोशिश की।

पिता का कहना है —

“मेरी बेटी बेहोश थी, बोल नहीं पा रही थी। उसके शरीर पर ऐसे निशान थे जो कोई हादसा नहीं हो सकता। उसे मारकर फेंका गया है।”

सबूत मिटाने का खेल और CCTV डिलीट होने का आरोप

परिवार का दावा है कि हॉस्टल प्रबंधन ने घटना के बाद कमरे से सामान हटाया, दवाइयाँ रखीं और CCTV फुटेज डिलीट कर दी। यही नहीं, छात्रा के पैसे और निजी सामान भी गायब बताए जा रहे हैं।

जब मामला बढ़ा और दबाव बना, तब जाकर पुलिस ने हॉस्टल वार्डन मनीष कुमार रंजन को गिरफ्तार किया — वह भी सबूत मिटाने के आरोप में। लेकिन सवाल अब भी कायम है —

क्या सिर्फ वार्डन ही दोषी है, या इसके पीछे बड़ा नेटवर्क है?

पुलिस की भूमिका पर भी सवाल

शुरुआत में पुलिस ने कहा था — “कोई रेप नहीं हुआ”।

गायनेकोलॉजिस्ट का बयान लिया गया, मामला हल्का दिखाया गया।

लेकिन पोस्टमार्टम के बाद पुलिस का रुख बदल गया।

एएसपी सदर‑1 अभिनव कुमार ने माना है कि रिपोर्ट में यौन हिंसा की आशंका से इनकार नहीं किया गया है। अब मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को AIIMS पटना भेजा गया है ताकि अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सके।

चित्रगुप्त नगर थाना में छात्रा के पिता के बयान पर कांड संख्या 14/26 दर्ज की जा चुकी है।

एक पिता की चीख और सिस्टम की खामोशी

पिता की आवाज़ में गुस्सा भी है, टूटन भी —

“ये एक आदमी का काम नहीं है। मेरी बेटी के साथ दरिंदगी हुई है। हॉस्टल, वार्डन, शायद बाहर के लोग — सब मिले हुए हैं। हमें इंसाफ चाहिए, कोई समझौता नहीं।”

पटना की सड़कों पर अब एक ही सवाल गूँज रहा है —

अगर हॉस्टल में भी बेटियाँ सुरक्षित नहीं हैं, तो आखिर जाएँ कहाँ?

अब सवाल सिर्फ एक मौत का नहीं

यह मामला अब केवल एक छात्रा की मौत नहीं, बल्कि

छात्राओं की सुरक्षा

हॉस्टलों की जवाबदेही

पुलिस की शुरुआती लापरवाही

निजी अस्पतालों की भूमिका

इन सब पर बड़ा सवाल बन चुका है।

परिवार की माँग साफ़ है —

“रेप के बाद हत्या करने वालों को फाँसी दो। मुआवज़ा नहीं, इंसाफ चाहिए।”

क्या इस बार सच जीतेगा?

या फिर एक और फाइल बंद कर दी जाएगी?

पटना, बिहार और पूरा देश — जवाब का इंतज़ार कर रहा है।

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