ऊधमसिंह नगर जिले के सितारगंज क्षेत्र में अवैध खनन माफियाओं का दुस्साहस एक बार फिर सामने आया है। रनसाली रेंज में नियमित गश्त पर निकली वन विभाग की टीम पर खनन से जुड़े आरोपियों ने न केवल हमला किया, बल्कि उन्हें ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलने की कोशिश भी की। इस दौरान वन दरोगा के साथ मारपीट की गई और उनकी वर्दी तक फाड़ दी गई। घटना के बाद पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, वन दरोगा नंद किशोर पांडे बुधवार को अपनी टीम के साथ आरक्षित वन क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। उनके साथ वन आरक्षी शक्ति सिंह, वन बीट अधिकारी भूपेंद्र कुमार और सूरज सिंह कार्की भी मौजूद थे। टीम का उद्देश्य इलाके में अवैध खनन गतिविधियों पर नजर रखना और नियमों का पालन सुनिश्चित कराना था। इसी दौरान टीम कैलाश नदी के किनारे पहुंची, जहां उन्हें संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं।
मौके पर पहुंचने पर वन विभाग की टीम ने देखा कि आरक्षित वन क्षेत्र के भीतर तीन ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में अवैध रूप से खनन सामग्री भरी जा रही थी। टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए वहां मौजूद लोगों से खनन से संबंधित वैध कागजात दिखाने को कहा। लेकिन आरोप है कि खनन में लगे लोग कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।
वन विभाग के अधिकारियों ने जब नियमों के अनुसार ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को जब्त कर अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की, तभी माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। आरोप है कि साधुनगर गांव निवासी राजकुमार, उसका पुत्र राजा और उनके साथ मौजूद तीन अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने वन टीम के साथ अभद्रता शुरू कर दी। पहले गाली-गलौज की गई और फिर मामला मारपीट तक पहुंच गया।
वन दरोगा नंद किशोर पांडे के मुताबिक, आरोपियों ने टीम को डराने-धमकाने की कोशिश की और ट्रैक्टर-ट्रॉली से कुचलने का प्रयास किया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि वन कर्मियों को अपनी जान बचाने के लिए पीछे हटना पड़ा। हमले के दौरान वन दरोगा के साथ हाथापाई की गई और उनकी वर्दी फाड़ दी गई, जो सरकारी कार्य में बाधा और हमला माने जाने के लिहाज से गंभीर अपराध है।
इतना ही नहीं, आरोपियों ने वन दरोगा को एससी-एसटी एक्ट के तहत झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी। इस धमकी को अधिकारियों ने दबाव बनाने की कोशिश के तौर पर देखा है। घटना के बाद वन विभाग की टीम ने किसी तरह खुद को सुरक्षित किया और पूरे मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों तथा पुलिस को दी।
वन दरोगा की लिखित तहरीर के आधार पर पुलिस ने राजकुमार, उसके बेटे राजा और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है और आरोपियों की तलाश की जा रही है। फरार आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी का प्रयास किया जा रहा है।
रनसाली रेंज के रेंजर महेंद्र सिंह रैकुनी ने घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी कीमत पर अवैध खनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि कोई पट्टाधारक अवैध रूप से खनन करने वालों को रॉयल्टी देता पाया गया तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में उच्चाधिकारियों को पत्र लिखने की बात भी उन्होंने कही है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सितारगंज और आसपास के क्षेत्रों में अवैध खनन लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। नदी किनारे और वन क्षेत्रों में चोरी-छिपे खनन की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। कई बार कार्रवाई के बावजूद खनन माफिया नए तरीकों से सक्रिय हो जाते हैं, जिससे वन और राजस्व विभाग के सामने लगातार मुश्किलें बनी रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाता है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा है। नदी तटों और आरक्षित जंगलों में बिना अनुमति खनन से भूमि कटाव, जलस्तर में गिरावट और जैव विविधता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं प्रशासन की सख्ती और प्रभावी निगरानी की जरूरत को और भी रेखांकित करती हैं।
घटना के बाद वन विभाग के कर्मचारियों में भी आक्रोश देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान उन पर लगातार हमलों का खतरा बना रहता है, इसलिए फील्ड में काम करने वाली टीमों की सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि अवैध खनन के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाकर माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने और वन कर्मियों पर हमला करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
यह घटना एक बार फिर यह दिखाती है कि अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई करने वाली टीमों को किस तरह के जोखिम का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे हमले भविष्य में और बढ़ सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि कानून का डर कायम किया जाए और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए प्रशासन और समाज दोनों मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।







