पटना। बिहार की राजधानी पटना में नीट की छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की खबर ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। जहानाबाद जिले की रहने वाली इस छात्रा की मौत के बाद उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि छात्रा के साथ हॉस्टल में रहने के दौरान दरिंदगी की गई, और घटना को छुपाने के लिए उसे गलत इंजेक्शन देकर खामोश किया गया।

परिवार ने पटना पुलिस पर भरोसा खो दिया है और मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। परिजन का आरोप है कि हॉस्टल और अस्पताल दोनों में ही साक्ष्यों को मिटाने और मामले को दबाने की कोशिश की गई।
छात्रा के परिजनों की कहानी
मृत छात्रा के मामा ने बताया कि बच्ची नीट की तैयारी कर रही थी, लेकिन एमबीबीएस में एडमिशन के लिए आवश्यक नंबर पूरे नहीं हो पाए थे। इसके बाद वह बीडीएस में दाखिला लेने की इच्छुक नहीं थी।
5 जनवरी को छात्रा घर से पटना पहुंची और उसी रात रात 9 बजे माता-पिता से बात की। परिजनों के अनुसार, उसके अवसाद या मानसिक समस्या का कोई संकेत नहीं था।
6 जनवरी की शाम, हॉस्टल में रहने वाली एक अन्य लड़की के पिता ने परिजनों को फोन करके बताया कि छात्रा अस्पताल में भर्ती है। जब परिवार अस्पताल पहुंचे, तो वे भौंचक्के रह गए, क्योंकि उस समय तक कई महत्वपूर्ण सबूत मिटा दिए जा चुके थे।
परिजन का आरोप है कि गर्ल्स हॉस्टल होने के बावजूद भवन का मालिक मनीष कुमार रंजन और उसका बेटा वहां रह रहे थे।
हॉस्टल संचालक और मालिक पर गंभीर आरोप
सवर्ण सेना के राष्ट्रीय संयोजक और अध्यक्ष भागवत शर्मा ने बताया कि हॉस्टल संचालक श्रवण अग्रवाल, उनकी पत्नी नीलम अग्रवाल और भवन का मालिक मनीष कुमार रंजन गलत कामों में लिप्त हैं। उनका कहना है कि छात्रा उसी की शिकार हुई और सामूहिक दुष्कर्म के बाद स्थिति बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद हॉस्टल संचालक ने परिजन को मामला दबाने के लिए 10 से 15 लाख रुपये का ऑफर दिया।
परिजन के अनुसार, छात्रा अस्पताल में होश में आने के बाद अपनी मां को यह बताने लगी कि उसके साथ गलत हुआ है, लेकिन अस्पताल के कर्मियों ने मां को वहां से हटा दिया और गलत इंजेक्शन देकर उसे कोमा में डाल दिया।
पुलिस जांच और एसआईटी का गठन
बिहार पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया है। इसकी कमान पटना पूर्वी सिटी एसपी को सौंपी गई है। गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को इसकी जानकारी दी।
गौरतलब है कि गुरुवार को आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में छात्रा के साथ दरिंदगी की बात सामने आई थी। इससे पहले पुलिस इसे आत्महत्या का मामला बता रही थी।
हॉस्टल और सबूतों की सफाई
छात्रा पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में अपने कमरे में 6 जनवरी को बेहोश पाई गई थी। उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन बीते रविवार को उसने दम तोड़ दिया।
पुलिस ने अब तक हॉस्टल मालिक को साक्ष्य मिटाने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने कमरे की सफाई कर दी थी ताकि कदम-कदम पर सबूत मिट जाएं।
परिजन की मांग: सीबीआई जांच
परिजन ने बार-बार यह जताया कि पटना पुलिस पर भरोसा नहीं है और मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए। उनका कहना है कि हॉस्टल और अस्पताल दोनों ही जगह मामलों को दबाने की कोशिश की गई।
परिवार ने कहा कि न्याय मिलने तक वे लगातार आवाज उठाएंगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार और प्रशासन भी सतर्क हो गया है।
निष्कर्ष
पटना में नीट छात्रा के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म और मर्डर ने एक बार फिर हॉस्टल सुरक्षा, छात्रा सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस केस की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और हॉस्टल संचालन पर कड़े नियम अब पहले से ज्यादा जरूरी हो गए हैं।







