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मोबाइल विवाद के बाद किशोरी का कदम, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

February 13, 20261 Mins Read
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मुंगेर शहर के कासिम बाजार थाना क्षेत्र के लल्लू पोखर मोहल्ले में गुरुवार को एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 16 वर्षीय छात्रा वैष्णवी ने कथित रूप से घर में फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया और मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया। एक साधारण-सी लगने वाली बात—मोबाइल फोन को लेकर हुआ विवाद—इतना बड़ा रूप ले लेगा, किसी ने सोचा भी नहीं था।

मृतका वैष्णवी, संतोष साह की पुत्री थी और मध्य विद्यालय बेलन बाजार में कक्षा आठवीं की छात्रा थी। परिवार और आसपास के लोगों के अनुसार, वह पढ़ाई में औसत थी, लेकिन हाल के दिनों में उसका व्यवहार कुछ बदला-बदला लग रहा था। बताया जा रहा है कि पिछले करीब दस दिनों से वह नियमित रूप से स्कूल नहीं जा रही थी। इस बात की जानकारी तब हुई जब विद्यालय के एक शिक्षक स्वयं उसके घर पहुंचे और परिजनों से शिकायत की।

शिक्षक ने बताया कि वैष्णवी अक्सर स्कूल देर से पहुंचती थी और कई बार तो केवल मध्याह्न भोजन के समय ही आती थी। इस शिकायत के बाद उसकी मां बेबी देवी ने उसे डांटा-फटकारा। परिवार का कहना है कि डांट के बाद से वह कुछ ज्यादा ही चुप रहने लगी थी। धीरे-धीरे उसने स्कूल जाना लगभग बंद कर दिया। परिजनों को लगा कि समय के साथ वह सामान्य हो जाएगी, लेकिन भीतर ही भीतर वह किस मानसिक दबाव से गुजर रही थी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।

गुरुवार की सुबह घटना से पहले भी घर का माहौल सामान्य था। बताया गया कि वैष्णवी ने अपनी मां से मोबाइल फोन देने की जिद की। मां ने उसे मोबाइल देने से इनकार कर दिया और फोन छिपाकर गंगा स्नान के लिए घाट चली गईं। परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद साधारण है, ऐसे में मोबाइल को लेकर घर में अक्सर सीमाएं तय रहती थीं। मां शायद यह समझ नहीं पाईं कि यह मामूली-सा विवाद उनकी बेटी को कितना आहत कर सकता है।

मां के घर से निकलने के कुछ समय बाद वैष्णवी अपने कमरे में चली गई। जब बेबी देवी गंगा घाट से वापस लौटीं तो घर का दरवाजा अंदर से बंद था। आवाज देने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। जब किसी तरह दरवाजा खोला गया तो अंदर का दृश्य देख मां के पैरों तले जमीन खिसक गई। वैष्णवी गले में फंदा लगाकर झूल रही थी। यह दृश्य देख मां चीख पड़ीं और शोर सुनकर आसपास के लोग जमा हो गए।

स्थानीय लोगों की मदद से किशोरी को तुरंत फंदे से उतारा गया और इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल ले जाया गया। वहां ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक डॉ. हर्षवर्धन ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी सांसें थम चुकी थीं।

घटना की सूचना मिलते ही कासिम बाजार थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू की और परिजनों से पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि किशोरी के मानसिक हालात, पारिवारिक परिस्थितियों और हालिया घटनाओं को ध्यान में रखते हुए मामले की तह तक जाने की कोशिश की जा रही है।

वैष्णवी अपने माता-पिता की पांच बेटियों में सबसे छोटी थी। पिता संतोष साह नीलम चौक स्थित एक बिरयानी हाउस में दिहाड़ी मजदूरी करते हैं, जबकि मां बेबी देवी घरों में चौका-बर्तन का काम कर परिवार चलाती हैं। सीमित आय में बड़ी मुश्किल से घर का खर्च चलता था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटियां पढ़-लिखकर भविष्य में घर की हालत सुधारेंगी। लेकिन इस घटना ने उनके सारे सपनों को चकनाचूर कर दिया।

मोहल्ले के लोगों के अनुसार, वैष्णवी शांत स्वभाव की लड़की थी। किसी ने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि वह ऐसा कदम उठा सकती है। कुछ पड़ोसियों का कहना है कि मोबाइल और पढ़ाई को लेकर घर में तनाव जरूर था, लेकिन वह सामान्य पारिवारिक बातों जैसा ही था। किसी को अंदाजा नहीं था कि किशोरी इसे दिल पर इस कदर ले लेगी।

यह घटना कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। आज के समय में मोबाइल फोन बच्चों और किशोरों के जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। लेकिन इसके साथ-साथ यह मानसिक तनाव और भावनात्मक निर्भरता का कारण भी बन रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किशोरावस्था में बच्चे बेहद संवेदनशील होते हैं। डांट-फटकार या किसी छोटी-सी बात को वे गहराई से महसूस कर लेते हैं। ऐसे में माता-पिता और शिक्षकों को संवाद का तरीका बेहद संतुलित रखना चाहिए।

पुलिस ने बताया कि मामले में यूडी केस दर्ज कर लिया गया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। परिवार गहरे सदमे में है और घर में मातम पसरा हुआ है। मां खुद को कोस रही हैं कि काश उन्होंने बेटी की जिद को हल्के में न लिया होता या उससे थोड़ी देर और बात कर ली होती।

मुंगेर के लल्लू पोखर की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि समाज के लिए भी चेतावनी है। किशोरों के मन में चल रही भावनाओं को समझना और उनसे खुलकर बातचीत करना बेहद जरूरी है। एक छोटी-सी अनदेखी या कठोर शब्द कभी-कभी ऐसा घाव दे सकते हैं, जिसकी भरपाई संभव नहीं होती।

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