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बिहार में अपराध पर सख्ती का संदेश: डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी बोले– कानून तोड़ने वालों पर होगी निर्णायक कार्रवाई

February 16, 20261 Mins Read
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बिहार की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के केंद्र में इन दिनों कानून-व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उभर रहा है। इसी कड़ी में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि राज्य में अपराध और अराजकता के लिए अब कोई जगह नहीं छोड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य बिहार को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है, और इसके लिए पुलिस तथा प्रशासन को सख्ती से काम करने की पूरी छूट दी गई है।

यह बयान उन्होंने राज्य के गया जिले के परैया प्रखंड स्थित अमोखर गांव में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यहां शहीद सूबेदार संतोष कुमार की स्मृति में बने स्मारक का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

शहीद को श्रद्धांजलि, परिवार के सम्मान की बात

कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री ने शहीद सूबेदार को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सैनिक परिवारों का सम्मान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने अपने निजी जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वे स्वयं सैनिक परिवार से आते हैं और उनके पिता ने 1962, 1965 और 1971 के युद्धों में देश की सेवा की थी। उन्होंने कहा कि उस दौर में संसाधन सीमित थे, लेकिन सैनिकों का मनोबल ऊंचा था। आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और केंद्र सरकार सैनिकों तथा शहीद परिवारों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है।

सुरक्षा नीति और सख्त जवाब का संदेश

राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि अब देश की सुरक्षा नीति पहले से अधिक स्पष्ट और दृढ़ है। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी प्रकार की सीमा पार उकसावे की स्थिति में देश की प्रतिक्रिया पहले से अधिक मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुरक्षा बलों को आवश्यक निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की संप्रभुता और सम्मान से समझौता नहीं किया जाएगा और यदि पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से कोई भी आक्रामक गतिविधि होती है, तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।

राज्य में अपराध पर जीरो टॉलरेंस

अपने संबोधन में उपमुख्यमंत्री ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में अपराध के खिलाफ अभियान लगातार चल रहा है और अपराधियों को किसी भी हालत में नहीं छोड़ा जाएगा।

उन्होंने दावा किया कि हाल के महीनों में कई कुख्यात अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा। उनका कहना था कि अपराधी की पहचान उसकी जाति, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसके अपराध से होती है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को स्पष्ट निर्देश हैं कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और निर्दोष लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने विपक्ष पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी की और कहा कि राज्य की व्यवस्था सुधारने के लिए सरकार गंभीरता से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि विकास, सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर सरकार की नीति स्पष्ट है।

इस मौके पर बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार भी उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में शहीद परिवार के योगदान को याद करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं।

आर्थिक बदलाव का जिक्र

उपमुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए राज्य की आर्थिक स्थिति में हुए बदलावों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि लगभग तीन दशक पहले जब वे पहली बार विधानसभा पहुंचे थे, तब राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर थी और बजट बहुत सीमित था।

उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल रही है और विकास योजनाओं, सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में निवेश बढ़ा है। उनका कहना था कि मजबूत अर्थव्यवस्था ही मजबूत कानून-व्यवस्था की नींव बनती है।

गांव में उत्साह, सुरक्षा पर भरोसा

अमोखर गांव में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह देखा गया। ग्रामीणों ने कहा कि शहीद के सम्मान में बने स्मारक से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी।

कई लोगों ने उम्मीद जताई कि सरकार के सख्त रुख से अपराध पर नियंत्रण होगा और गांव-शहर दोनों जगह सुरक्षा बेहतर होगी।

राजनीतिक संकेतों के मायने

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान केवल एक समारोह का हिस्सा नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था पर सरकार की प्राथमिकता का संकेत है। राज्य में आगामी राजनीतिक समीकरणों के बीच सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दे सरकार के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासनिक सख्ती के साथ विकास योजनाएं भी समान गति से चलती रहीं, तो इसका असर सामाजिक माहौल और निवेश दोनों पर पड़ सकता है।

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