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उच्च शिक्षा को नई रफ्तार: 1 जुलाई से 213 नए डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई शुरू

February 14, 20261 Mins Read
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बिहार में उच्च शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-30 से, यानी 1 जुलाई से, 213 नए डिग्री महाविद्यालयों में पढ़ाई शुरू कर दी जाएगी। ये कॉलेज उन प्रखंडों में खोले जा रहे हैं जहां अब तक कोई डिग्री कॉलेज संचालित नहीं था। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को उनके घर के पास ही स्नातक स्तर की पढ़ाई का अवसर उपलब्ध कराना है।

पहले चरण में इन नए महाविद्यालयों में कला संकाय के प्रमुख विषयों की पढ़ाई शुरू की जाएगी। जिन विषयों को प्राथमिकता दी गई है, उनमें इतिहास, राजनीति विज्ञान, भूगोल, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान और हिंदी/अंग्रेजी साहित्य शामिल हैं। ये विषय कक्षा 11-12 और स्नातक स्तर पर समान रूप से लोकप्रिय माने जाते हैं। इसलिए विभाग ने इन्हें शुरुआती सत्र में शुरू करने पर सहमति दी है। संबंधित विषयों के विभाग भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि शैक्षणिक ढांचा व्यवस्थित तरीके से विकसित हो सके।

उच्च शिक्षा विभाग के अनुसार, कला संकाय में अनिवार्य और वैकल्पिक विषयों का संतुलित मिश्रण होता है, जिससे अधिकतम छात्रों को लाभ मिलता है। इसके अलावा दर्शनशास्त्र, शिक्षा शास्त्र, ललित कला और गृह विज्ञान जैसे विषयों को भी ‘कामन विषय’ मानते हुए पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी। जहां आवश्यकता होगी, वहां विज्ञान और वाणिज्य संकाय भी खोले जाएंगे। जिन प्रखंडों में इन विषयों के विद्यार्थियों की संख्या अधिक पाई जाएगी, वहां चरणबद्ध तरीके से विज्ञान और कॉमर्स के विभाग स्थापित करने की तैयारी की जा रही है।

इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन के नेतृत्व में की जा रही है। उन्होंने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि ‘सात निश्चय-तीन’ योजना के तहत डिग्री महाविद्यालय विहीन प्रखंडों में कॉलेज स्थापना की प्रक्रिया तेज की जाए। आगामी सत्र से पढ़ाई शुरू कराने के लिए प्रशासनिक और शैक्षणिक तैयारियां युद्ध स्तर पर की जा रही हैं।

इन 213 प्रखंडों की सूची विश्वविद्यालयों से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर तैयार की गई है। यह स्पष्ट किया गया है कि कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय के अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालयों को इस सूची में शामिल नहीं किया गया है। सूची में केवल वे प्रखंड हैं, जहां वर्तमान में कोई डिग्री कॉलेज संचालित नहीं हो रहा है। विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि सूची में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए—यानी कोई ऐसा प्रखंड शामिल न हो जहां पहले से कॉलेज मौजूद हो, या कोई ऐसा प्रखंड छूट न जाए जहां कॉलेज की जरूरत है।

नए कॉलेजों के लिए भवन चयन की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। फिलहाल प्लस-टू स्कूलों के नए भवनों का उपयोग प्रारंभिक चरण में डिग्री कॉलेज के रूप में किया जाएगा। सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में उपलब्ध भवनों की समीक्षा कर उपयुक्त भवनों का चयन करें। यह कार्य एक सप्ताह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

बिहार राज्य शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड ने संबंधित प्रखंडों में उपलब्ध भवनों की सूची पहले ही जिलों को उपलब्ध करा दी है। अब जिला स्तर पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि चयनित भवन डिग्री कॉलेज के संचालन के लिए उपयुक्त हों—जैसे पर्याप्त कक्षाएं, पुस्तकालय की व्यवस्था, प्रशासनिक कक्ष और अन्य बुनियादी सुविधाएं।

यदि किसी प्रखंड में भवन उपलब्ध नहीं है या सूची में किसी प्रकार की विसंगति पाई जाती है, तो उसकी समीक्षा कर अंतिम सूची की पुष्टि की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में ऐसा न हो कि डिग्री कॉलेज विहीन प्रखंड इस योजना से वंचित रह जाएं।

सिर्फ भवन ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक संसाधनों की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और कुलसचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि नए कॉलेजों को संबद्धता देने और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू करने में कोई बाधा न आए। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने को भी कहा गया है।

प्राध्यापकों की नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया भी समानांतर रूप से चलाई जाएगी। जहां स्थायी नियुक्ति में समय लगेगा, वहां अतिथि शिक्षकों (गेस्ट फैकल्टी) की तैनाती की जाएगी, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो। विभाग का लक्ष्य है कि 1 जुलाई से कक्षाएं विधिवत शुरू हो जाएं और छात्रों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। लंबे समय से ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा के लिए जिला मुख्यालय या अन्य शहरों पर निर्भर थे। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता था और कई बार पढ़ाई बीच में ही छूट जाती थी। अब अपने ही प्रखंड में डिग्री कॉलेज खुलने से विशेषकर छात्राओं को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और संसाधनों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की गई, तो यह पहल राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। उच्च शिक्षा तक पहुंच बढ़ने से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और युवाओं का पलायन कम हो सकता है।

कुल मिलाकर, 213 नए डिग्री कॉलेजों की शुरुआत बिहार में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक निर्णायक कदम है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि तय समयसीमा के भीतर सभी व्यवस्थाएं पूरी होती हैं या नहीं, और 1 जुलाई से नई ऊर्जा के साथ शैक्षणिक सत्र की शुरुआत किस तरह होती है।

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