पूर्णिया में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। प्रधानमंत्री आवास योजना में कार्यरत 35 वर्षीय सहायक पवन कुमार की ड्यूटी से घर लौटते समय सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। इस हादसे ने न सिर्फ एक जिम्मेदार कर्मचारी को खो दिया, बल्कि चार छोटे बच्चों के सिर से पिता का साया भी छीन लिया। घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और इलाके में शोक की लहर है।

यह हादसा मधुबनी थाना क्षेत्र के भोतहा मोड़ के पास हुआ। मृतक की पहचान चंपानगर वार्ड संख्या 16 निवासी स्वर्गीय वंशीधर मस्ताना के पुत्र पवन कुमार के रूप में हुई है। वह पूर्णिया पूर्व प्रखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना के सहायक के पद पर कार्यरत थे। अपने मिलनसार स्वभाव और जिम्मेदार कार्यशैली के कारण वे सहकर्मियों और स्थानीय लोगों के बीच काफी लोकप्रिय थे।
परिजनों के अनुसार पवन कुमार को सांस फूलने की पुरानी बीमारी थी। स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वह आमतौर पर कार्यालय आने-जाने के लिए ऑटो का इस्तेमाल करते थे, ताकि थकान या किसी अप्रत्याशित स्थिति से बचा जा सके। लेकिन गुरुवार को उन्होंने किसी कारणवश बाइक से ही प्रखंड कार्यालय जाने का निर्णय लिया। सुबह वे सामान्य रूप से घर से निकले थे और दिनभर की ड्यूटी के बाद शाम को वापस लौट रहे थे।
बताया जाता है कि जब वह भोतहा मोड़ के पास पहुंचे, तभी उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई। संतुलन बिगड़ने से वे सड़क पर गिर पड़े। गिरने के दौरान उनके सिर में गंभीर चोट लगी। राहगीरों ने उन्हें सड़क पर घायल अवस्था में देखा और तुरंत पुलिस को सूचना दी। कुछ लोगों ने उनकी मदद करते हुए एंबुलेंस बुलाने का प्रयास किया।
सूचना मिलते ही मधुबनी थाना पुलिस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। घायल अवस्था में पवन कुमार को तत्काल इलाज के लिए पूर्णिया के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पूर्णिया (जीएमसीएच) ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सिर में आई गंभीर चोट के कारण उन्होंने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार सिर में गहरी चोट और अत्यधिक रक्तस्राव उनकी मौत का मुख्य कारण बना।
घटना की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे। पत्नी और बच्चों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। परिवार के लिए यह यकीन कर पाना मुश्किल था कि सुबह जो व्यक्ति हंसते-मुस्कुराते घर से निकला था, वह शाम को हमेशा के लिए लौटकर नहीं आएगा।
पवन कुमार अपने पीछे पत्नी और चार छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। वह परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनकी असमय मृत्यु से परिवार आर्थिक और मानसिक दोनों तरह के संकट में आ गया है। पड़ोसियों के अनुसार पवन मेहनती और जिम्मेदार इंसान थे, जो अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर बेहद चिंतित रहते थे। वे चाहते थे कि उनके बच्चे अच्छी शिक्षा प्राप्त करें और जीवन में आगे बढ़ें।
मधुबनी थाना पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस को भोतहा मोड़ के पास सड़क किनारे उनकी बाइक खड़ी मिली। प्रारंभिक जांच में यह प्रतीत होता है कि बाइक अनियंत्रित होकर गिर गई, जिससे यह हादसा हुआ। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना का कारण केवल संतुलन बिगड़ना था या इसके पीछे कोई अन्य वजह भी हो सकती है।
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। थाना अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल मामले में किसी अन्य वाहन की टक्कर की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन हर एंगल से जांच जारी है।
इस हादसे ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी सतर्कता की जरूरत को रेखांकित किया है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्या हो, तो वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अचानक चक्कर आना, सांस फूलना या कमजोरी जैसी स्थितियां वाहन चलाते समय गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती हैं।
पवन कुमार की मृत्यु से उनके कार्यालय में भी शोक की लहर है। सहकर्मियों ने उन्हें एक ईमानदार और समर्पित कर्मचारी बताया, जो अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा से करते थे। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वे जरूरतमंद लोगों को सरकारी आवास दिलाने की प्रक्रिया में सहयोग करते थे। उनके जाने से विभाग को भी एक सक्रिय कर्मी का नुकसान हुआ है।
चंपानगर और आसपास के इलाके में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य सुरक्षित रह सके। कई सामाजिक संगठनों ने भी मदद का आश्वासन दिया है।
यह घटना सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि एक परिवार के सपनों के टूटने की कहानी है। चार मासूम बच्चों के सिर से पिता का साया उठ जाना किसी भी परिवार के लिए असहनीय दुख है। अब सबकी निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस पीड़ित परिवार की किस प्रकार मदद करता है।







