पूर्णिया (बिहार)। एक ओर मां टीबी जैसी गंभीर बीमारी से अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रही थी, वहीं दूसरी ओर उसकी दुनिया उस समय उजड़ गई जब जीएमसीएच परिसर से उसके दो मासूम बेटे रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। दिनदहाड़े हुई इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन, बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं बच्चों को अपने साथ ले जाती दिखाई दे रही हैं, जिसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच तेज कर दी है।

इलाज के दौरान हुआ दर्दनाक घटनाक्रम
मिली जानकारी के अनुसार, नेवालाल चौक निवासी गुड़िया देवी 27 जनवरी से पूर्णिया जीएमसीएच के महिला वार्ड में भर्ती हैं। वह टीबी से पीड़ित हैं और उनका इलाज चल रहा है। उनके साथ अस्पताल में उनकी 9 वर्षीय बेटी और दो बेटे, जिनकी उम्र 5 और 7 वर्ष बताई जा रही है, भी रह रहे थे।
सोमवार की दोपहर करीब 3 बजे, महिला वार्ड में एक जैसी ड्रेस पहने दो अज्ञात महिलाएं पहुंचीं। उन्होंने बच्चों से घुलने-मिलने की कोशिश की और कथित तौर पर उन्हें सामान दिलाने का लालच दिया। कुछ ही देर बाद वे दोनों भाइयों को अपने साथ वार्ड से बाहर ले गईं। उस समय किसी को इस बात का अंदेशा नहीं हुआ कि यह एक सोची-समझी साजिश हो सकती है।
बहन ने खोले राज, मचा हड़कंप
जब काफी देर तक दोनों बच्चे वापस नहीं लौटे, तो उनकी 9 साल की बहन ने उन्हें ढूंढना शुरू किया। अस्पताल परिसर में तलाश के बाद भी जब भाई नहीं मिले, तो वह घबराकर रोते हुए अस्पताल कर्मचारियों के पास पहुंची और बताया कि दो महिलाएं उसके भाइयों को अपने साथ ले गई हैं।
यह सुनते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। फणीश्वरनाथ रेणु टीओपी, के हाट थाना सहित तीन थानों की पुलिस टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू की।
CCTV फुटेज में दिखी संदिग्ध महिलाएं
पुलिस ने अस्पताल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है कि दो महिलाएं दोनों बच्चों का हाथ पकड़कर तेजी से अस्पताल से बाहर जा रही हैं। इससे यह आशंका बलवती हो गई है कि घटना पूरी योजना के तहत अंजाम दी गई।
फुटेज मिलने के बाद पुलिस ने शहर से बाहर जाने वाले प्रमुख मार्गों पर नाकेबंदी कर दी है। वाहनों की सघन जांच की जा रही है और संदिग्ध महिलाओं की पहचान के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
जीएमसीएच जैसे भीड़-भाड़ वाले सरकारी अस्पताल से दिनदहाड़े दो बच्चों का इस तरह गायब हो जाना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। अस्पताल परिसर में रोजाना सैकड़ों मरीज और परिजन आते-जाते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को लेकर पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे, इस पर भी चर्चा तेज हो गई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में बाहरी लोगों की आवाजाही पर निगरानी मजबूत होनी चाहिए। खासकर जब छोटे बच्चे अपने परिजनों के साथ इलाज के दौरान वहीं रह रहे हों।
मां की हालत और बिगड़ी
अपने बच्चों के गायब होने की खबर सुनते ही गुड़िया देवी की तबीयत और बिगड़ गई। पहले से ही बीमारी से जूझ रही मां के लिए यह सदमा बेहद भारी साबित हुआ। अस्पताल के डॉक्टरों ने उनकी स्थिति को देखते हुए अतिरिक्त चिकित्सकीय निगरानी शुरू की है।
परिवार के अन्य सदस्य और रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए हैं और बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
पुलिस की कार्रवाई जारी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीमों का गठन किया गया है। अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों के सभी सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच की जा रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि महिलाएं किस दिशा में गईं और क्या उनके साथ कोई और व्यक्ति भी शामिल था।
संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और शहर के बाहरी मार्गों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि बच्चों को सुरक्षित बरामद करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
शहर में चिंता और आक्रोश
घटना के बाद पूरे शहर में चिंता का माहौल है। लोगों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर डर और गुस्सा दोनों देखा जा रहा है। सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से अस्पतालों और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है।
फिलहाल पुलिस जांच में जुटी है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही दोनों मासूम भाइयों का सुराग मिल जाएगा। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सार्वजनिक संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की कितनी जरूरत है, ताकि कोई मां इलाज के दौरान अपने बच्चों को यूं न खो दे।







