बिहार के वैशाली जिले स्थित हाजीपुर सदर अस्पताल में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रसव वार्ड में एक नवजात को लेकर गंभीर आरोप सामने आए। एक प्रसूता के परिजनों ने दावा किया कि उन्हें बेटे के जन्म की सूचना दी गई, लेकिन बाद में बेटी सौंपने की कोशिश की गई। आरोप लगते ही अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और मामला पुलिस तक पहुंच गया।

प्रसव वार्ड में मचा बवाल
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में लोग सदर अस्पताल में जुट गए। परिजनों ने डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर नवजात की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। हालात बिगड़ते देख ड्यूटी पर तैनात अस्पताल कर्मियों ने नगर थाना पुलिस को सूचना दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने के साथ मामले की जांच शुरू की।
परिजनों का आरोप: बेटा बताया, बेटी थमा दी
पीड़िता के भाई संजय कुमार के अनुसार, बुधवार सुबह उन्होंने अपनी बहन गुंजन को प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया था। करीब दोपहर 12 बजे डॉक्टरों ने उसे ऑपरेशन थियेटर में ले जाया। कुछ देर बाद अस्पताल के एक कर्मचारी ने परिजनों को बताया कि बेटा हुआ है और नसबंदी की प्रक्रिया करानी होगी।
परिजनों का कहना है कि पहले से महिला की चार बेटियां थीं, इसलिए बेटे के जन्म की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल नसबंदी करवा दी। हालांकि, लगभग एक घंटे बाद जब अस्पताल कर्मियों ने उन्हें नवजात सौंपा, तो वह बेटी थी। इस पर परिजनों ने बच्ची लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल स्टाफ पर गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।
दो घंटे तक चला हंगामा
आक्रोशित परिजनों के विरोध को देखते हुए प्रसव वार्ड और ओटी में तैनात कई कर्मचारी वार्ड छोड़कर बाहर निकल गए। इस बीच नगर थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और परिजनों को शांत कराने का प्रयास किया। करीब दो घंटे तक हंगामा चलता रहा। बाद में उचित जांच और कार्रवाई के आश्वासन के बाद स्थिति शांत हुई।
पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले
बताया जा रहा है कि हाजीपुर सदर अस्पताल में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी नवजात की अदला-बदली को लेकर विवाद हो चुका है। बीते वर्ष अगस्त में नवजात शिशु चिकित्सा इकाई में इलाज के दौरान दो बच्चों की पहचान को लेकर गड़बड़ी सामने आई थी। उस समय भी परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए थे।
उस मामले में दोनों माताओं का नाम एक जैसा होने के कारण अस्पताल कर्मियों से गलती हो गई थी, जिसके बाद काफी देर तक हंगामा चला था। इस पृष्ठभूमि के चलते मौजूदा घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासन का पक्ष
पूरे मामले पर सिविल सर्जन डॉ. श्याम नंदन प्रसाद ने कहा कि संबंधित महिला ने बेटी को ही जन्म दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जांच की जाएगी कि परिजनों को बेटे के जन्म की गलत जानकारी किसने दी। मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है और दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जांच के दायरे में अस्पताल स्टाफ
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कहा गया है कि जांच में प्रसव से जुड़े सभी रिकॉर्ड, ओटी रजिस्टर और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा की जाएगी। प्रशासन यह भी पता लगाएगा कि नसबंदी की प्रक्रिया किस आधार पर कराई गई और किस स्तर पर लापरवाही हुई।
विश्वास पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में प्रसव व्यवस्था और मरीजों के विश्वास को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।







