अररिया। जमीन के लालच में अपनी सगी मां को जिंदा जला देने वाले क्रूर बेटे को आखिरकार सजा मिल गई। अररिया की अदालत ने शनिवार को शंकर मंडल को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 60 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। यह फैसला मानवता को झकझोरने वाली उस नृशंस हत्या के दो साल बाद आया, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।सतबेर की दिल दहला देने वाली वारदातबरदाहा थाना क्षेत्र के सतबेर (गरही टोला), वार्ड-7 में 13 मई 2024 को प्राइमरी स्कूल से महज 100 मीटर दूर मसोमात फेकनी देवी का अधजला शव मिला था। शव पर पेट और गले के गंभीर जख्म साफ बयां कर रहे थे कि हत्या कितनी बेरहम थी। आरोपी शंकर मंडल (पिता-स्व. सहजन मंडल) ने जमीन विवाद के चलते अपनी ही मां को आग के हवाले कर दिया। पुलिस जांच में पता चला कि जेल से छूटे महज एक महीने बाद उसने यह जघन्य अपराध रच लिया।अदालत का सख्त फैसला: दो धाराओं में सजाअपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एडीजे चतुर्थ) रवि कुमार की अदालत ने शंकर मंडल को निम्न सजाएं सुनाईं:धारा 302 भादवि (हत्या): आजीवन कारावास + 50,000 रुपये जुर्मानाधारा 201 भादवि (साक्ष्य मिटाना): 5 वर्ष सश्रम कारावास + 10,000 रुपये जुर्मानाकोर्ट ने चेतावनी दी कि जुर्माना न चुकाने पर एक साल का अतिरिक्त कारावास काटना पड़ेगा। अपर लोक अभियोजक प्रभा कुमारी ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के दम पर मजबूत पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष से अधिवक्ता छंगुरी मंडल व किशोर कुमार श्रीवास्तव ने दलीलें दीं। 30 अक्टूबर 2024 को दाखिल आरोप पत्र ने आरोपी को फंसाया।पुराना विवाद और साजिशअभियोजन पक्ष के मुताबिक, शंकर का मां से जमीन को लेकर लंबे समय से झगड़ा चल रहा था। पहले भी उसने मां पर हमला किया था, जिसके बाद जेल की हवा खाई। रिहाई के तुरंत बाद उसने हत्या की साजिश रची।

आरोपी की पत्नी वीणा देवी भी केस में नामजद है, जिसका मुकदमा अदालत में लंबित है।यह फैसला न सिर्फ पीड़ित परिवार को न्याय दिलाता है, बल्कि जमीन विवादों में अपनों पर अत्याचार रोकने की चेतावनी भी है। बिहार पुलिस की तत्परता और अदालत की सख्ती सराहनीय रही।







