औरंगाबाद जिले के नक्सल प्रभावित देव प्रखंड में सुरक्षा बलों ने अवैध अफीम की खेती पर बड़ी कार्रवाई की। रविवार को ढिबरा थाना क्षेत्र के बनुआ टोले पक्का में लगभग पांच बीघे में लगाई गई अफीम की फसल नष्ट कर दी गई। पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की संयुक्त कार्रवाई में लाखों रुपये की अफीम की फसल रौंदी गई और अज्ञात तस्करों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, लगातार चलाए जा रहे नक्सल विरोधी सर्च ऑपरेशनों से नक्सलियों की लेवी की आय प्रभावित हुई है। इसके चलते नक्सली वैकल्पिक रूप से अफीम की खेती को अपने लिए आय का स्रोत बना रहे हैं। अति नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नक्सली भोले-भाले ग्रामीणों को प्रलोभन या डर-धमकी देकर अफीम की खेती करवाते हैं, ताकि लेवी की कमी को यह अवैध खेती पूरा कर सके।
जंगली और दुर्गम इलाके में कार्रवाई
ढिबरा थानाध्यक्ष रितेश कुमार उपाध्याय ने बताया कि बनुआ टोले पक्का के पहाड़ी मैदानी इलाके में बड़ी मात्रा में अफीम की खेती की जा रही थी। गुप्त सूचना मिलने के बाद बिहार पुलिस और एसएसबी के अर्द्धसैनिक बलों ने संयुक्त रूप से अभियान चलाया। जंगली और दुर्गम इलाके में सुरक्षा बलों ने ट्रैक्टर और अन्य उपकरणों का उपयोग कर पूरी फसल रौंद दी और बाद में आग लगाकर नष्ट कर दिया।
पुलिस ने बताया कि इस कार्रवाई से मादक पदार्थ तस्करों के मंसूबों पर बड़ा आघात लगा है। फसल की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लाखों रुपये है। कार्रवाई की भनक लगते ही खेती में जुड़े लोग जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए।
संयुक्त अभियान और समन्वय
इस अभियान में एसएसबी के भलुआही कैंप के जवान, ढिबरा थाना पुलिस टीम और वन विभाग के अधिकारी व कर्मी शामिल रहे। सभी ने मिलकर पूरी योजना के तहत अभियान को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। ढिबरा थानाध्यक्ष ने कहा कि यह कार्रवाई नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत भी महत्वपूर्ण कदम है।
पुलिस ने मामले में अज्ञात तस्करों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है और आरोपियों की तलाश जारी है। सुरक्षा बलों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई नियमित रूप से की जाती रहेगी, ताकि नक्सल प्रभावित इलाके में अवैध मादक पदार्थों की खेती और तस्करी पर रोक लगाई जा सके।
विशेष जानकारी
कार्रवाई के दौरान कुल पांच बीघा जमीन पर लगाई गई अफीम की फसल नष्ट की गई।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस फसल की कीमत लाखों रुपये आंकी जा रही है।
अभियान में वन विभाग और पुलिस का समन्वय मुख्य रहा, जिससे दुर्गम इलाके में भी सफलतापूर्वक कार्रवाई हो सकी।
नक्सलियों द्वारा ग्रामीणों को प्रलोभन या धमकी देकर अवैध खेती कराई जाती है, जिसे सुरक्षा बल रोकने के लिए सक्रिय हैं।
यह कार्रवाई राज्य और केंद्र सरकार की मादक पदार्थ नियंत्रण नीतियों के अनुरूप है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे अभियान न केवल नशा मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करेंगे, बल्कि नक्सल प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था स्थापित करने और ग्रामीणों को मादक पदार्थों के प्रभाव से बचाने में भी सहायक होंगे।
इस अभियान ने साबित किया कि कठिन और दुर्गम इलाके में भी सुरक्षा बलों की सक्रियता और समन्वय के माध्यम से अवैध मादक पदार्थों के नेटवर्क पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।







