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काली मंदिर की दान की जमीन पर फिर मंडराया कब्जे का खतरा, पुराने जख्मों के साथ लौटा भूमि विवाद

January 26, 20261 Mins Read
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भागलपुर के उर्दू बाजार इलाके में स्थित काली मंदिर की जमीन को लेकर चला आ रहा पुराना विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। वर्षों पहले शांत हो चुका यह मामला अब दोबारा तनाव की वजह बनता जा रहा है। मंदिर को दान में मिली जमीन पर कथित कब्जे की कोशिशों ने स्थानीय लोगों के बीच डर और आक्रोश दोनों पैदा कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि काली मंदिर की यह जमीन कंठी देवी द्वारा दान की गई थी और तब से इसका उपयोग धार्मिक कार्यों के लिए होता आ रहा है। लेकिन समय-समय पर कुछ लोगों की नजर इस कीमती जमीन पर पड़ती रही है। आरोप है कि भूमाफिया किस्म के तत्व एक बार फिर सक्रिय हो गए हैं और जमीन को हथियाने की कोशिश की जा रही है।

इस विवाद का इतिहास बेहद संवेदनशील रहा है। पहले भी मंदिर की जमीन की रक्षा के दौरान पूजा समिति के तत्कालीन अध्यक्ष धूरी यादव की हत्या कर दी गई थी। यह घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। अब एक बार फिर उसी तरह की परिस्थितियां बनती दिख रही हैं, जिससे मुहल्ले के लोग सहमे हुए हैं। उनका कहना है कि जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां तक दी जा रही हैं।

सोमवार को हालात उस समय और गंभीर हो गए, जब सैकड़ों की संख्या में स्थानीय लोग तातारपुर थाना पहुंचे। सभी ने एक सुर में मंदिर की जमीन को अतिक्रमण से बचाने की मांग की। लोगों ने पुलिस अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर प्रशासन से हस्तक्षेप की अपील की और कहा कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति बेकाबू हो सकती है।

मामले की नाजुकता को देखते हुए प्रशासन की ओर से अंचल अधिकारी की मौजूदगी में अमीन से जमीन की मापी कराने का आश्वासन दिया गया है। बताया गया है कि विवादित जमीन लगभग डेढ़ कट्ठा है, जिसकी स्पष्ट पैमाइश कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाएगी। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल मापी से नहीं, बल्कि जमीन को कानूनी रूप से सुरक्षित घोषित कर कब्जे की हर कोशिश पर रोक लगाई जानी चाहिए।

इलाके में इस पूरे घटनाक्रम के बाद तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। लोग आशंका जता रहे हैं कि यदि प्रशासन ने ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह विवाद आगे चलकर हिंसक रूप भी ले सकता है। धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला होने के कारण सामाजिक सौहार्द बिगड़ने का खतरा भी बना हुआ है।

अब यह विवाद प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता नजर आ रहा है। लोगों की मांग है कि पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जाएं, दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो और मंदिर की दान की गई जमीन को पूरी तरह सुरक्षित किया जाए। समय रहते समाधान नहीं निकला, तो काली मंदिर की यह जमीन आने वाले दिनों में एक बार फिर बड़े टकराव की वजह बन सकती है।

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