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दरभंगा

Darbhanga Royal Legacy: महारानी कामसुंदरी देवी का राजसी श्राद्ध, ब्राह्मणों को मिले एसी-कूलर और चांदी के बर्तन

January 23, 20260 Mins Read
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दरभंगा में महारानी कामसुंदरी देवी का श्राद्ध समारोह इस बार राजसी वैभव और आधुनिक सुविधाओं के संग आयोजित हुआ। महारानी के पौत्र युवराज कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह ने विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म संपन्न कराया, जिसमें परंपरा के साथ आधुनिक युग की झलक भी देखने को मिली।

श्राद्ध कार्यक्रम के लिए मधुबनी जिले के जितवारपुर गांव से 15 ब्राह्मण आमंत्रित किए गए। राज परिवार की ओर से ब्राह्मणों को एसी, कूलर, टीवी, फ्रिज के साथ चांदी की थाली, बिस्किट, चम्मच, ग्लास और कटोरी भेंट की गई। मुख्य ब्राह्मण महोदय झा और सहयोगियों ने इस आधुनिक दान को देखकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि पहले महाराजाओं की ओर से दान में हाथी, घोड़ा, गाय और भैंस दिया जाता था, लेकिन अब समय बदल गया है।

युवराज कपिलेश्वर सिंह ने कहा, “हमारा उद्देश्य ब्राह्मणों का सम्मान करना और उन्हें संतुष्ट विदा करना है। आधुनिक युग में भी परंपरा और श्रद्धा का महत्व कम नहीं हुआ है।”

श्राद्ध समारोह में बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी, पूर्व मंत्री जीवेश कुमार, सांसद गोपाल जी ठाकुर, विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा, और विश्व हिंदू परिषद के उत्तर बिहार संभाग के संजीव सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। सभी ने महारानी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

भोज के लिए कल्याणी निवास में विशेष पंडाल लगाए गए, जहां 56 प्रकार के व्यंजन तैयार किए गए। महारानी और महाराज कामेश्वर सिंह का परिवार हमेशा से सामाजिक और जनहित कार्यों के लिए दान देने के लिए प्रसिद्ध रहा है। महाराज के जीवन में मोतिमहल परिसर के लिए विशेष रेलवे स्टेशन और आधुनिक रेल बोगियों की व्यवस्था की गई थी, ताकि परिवार की यात्राएं भव्य और सुविधाजनक हों।

महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह ने 5 जुलाई 1961 को संपत्ति की देखरेख के लिए वसीयत बनाई थी, जिसमें महारानी कामसुंदरी देवी और दूसरी महारानी राजलक्ष्मी को अधिकार से अलग रखा गया। वसीयत के अनुसार संपत्ति और बकाया के दस्तावेज तैयार किए गए और 1987 में सर्वोच्च न्यायालय ने फैमिली सेटलमेंट को मंजूरी दी। इसके बाद संपत्ति का हिस्सा जनहित और सार्वजनिक कार्यों के लिए सुरक्षित रखा गया।

श्राद्ध समारोह ने दरभंगा के राजसी इतिहास और आधुनिक युग का शानदार संगम पेश किया। राज परिवार ने परंपरा का सम्मान करते हुए आधुनिक सुविधाओं से कार्यक्रम को और भव्य बनाया, जिससे यह समारोह एक यादगार अनुभव बन गया।

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