बिहार के मुजफ्फरपुर से सामने आया यह मामला सिर्फ एक मौत की कहानी नहीं, बल्कि सिस्टम की उस खामोशी का आईना है जिसने एक परिवार से उसके बेटे की आखिरी झलक तक छीन ली। गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज होने के ठीक अगले दिन युवक का शव मिला — लेकिन परिजनों को बुलाने के बजाय पुलिस ने उसे “अज्ञात” बताकर दाह संस्कार करा दिया।

दवा लेने निकला, मौत बन गई मंज़िल
सकरा थाना क्षेत्र का रहने वाला मनीष कुमार फास्ट फूड की छोटी-सी दुकान चलाकर अपने परिवार का पेट पालता था। 15 जनवरी को वह बीमार मां के लिए दवा लेने बाजार गया था। दुकान खुली थी, मोबाइल पर पेमेंट के मैसेज भी आ रहे थे, लेकिन रात होते-होते मनीष घर नहीं लौटा।
परिवार ने पहले खुद तलाश की, फिर थाने पहुंचकर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्हें भरोसा था कि पुलिस मदद करेगी।
रेल ट्रैक के पास मिला शव… और कहानी यहीं खत्म कर दी गई
अगले ही दिन मनियारी थाना क्षेत्र में रेलवे लाइन के किनारे एक युवक का शव बरामद हुआ। पुलिस ने उसे अज्ञात करार दिया, पोस्टमार्टम कराया और नियमानुसार अंतिम संस्कार भी कर दिया।
परिवार को न कॉल, न सूचना, न पहचान की कोशिश — जैसे मामला निपटा दिया गया हो।
जब सच्चाई सामने आई, तो टूट गया परिवार
कुछ समय बाद जब परिजनों को पता चला कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह मनीष का ही था — तब मातम गुस्से में बदल गया। परिवार का कहना है कि उन्हें बेटे का चेहरा तक देखने का मौका नहीं दिया गया।
मां बार-बार यही सवाल करती रही —
“अगर मेरा बेटा मिल ही गया था, तो मुझे क्यों नहीं बुलाया?”
सड़कों पर उतरा गुस्सा, हाईवे जाम
आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने मारकण चौक के पास मुजफ्फरपुर–समस्तीपुर एनएच-28 जाम कर दिया। टायर जलाए गए, नारे लगे और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध हुआ। घंटों तक यातायात ठप रहा।
पुलिस की दलील बनाम जनता के सवाल
डीएसपी पूर्वी टू मनोज कुमार सिंह ने कहा कि शव की पहचान नहीं हो सकी थी, इसलिए नियमों के तहत दाह संस्कार कराया गया। साथ ही यह भी कहा कि मामले में कुछ संदिग्धों को पकड़ा गया है।
लेकिन जनता सवाल पूछ रही है—
क्या गुमशुदगी की रिपोर्ट और अज्ञात शव की जानकारी को मिलाया गया?
क्या जिले के थानों में सूचना साझा की गई?
इतनी जल्दबाजी किस दबाव में दिखाई गई?
न्याय से ज़्यादा जवाब चाहते हैं परिजन
परिवार अब सिर्फ मौत की जांच नहीं, बल्कि उस प्रक्रिया की जवाबदेही चाहता है, जिसने एक बेटे की पहचान और एक मां का हक दोनों छीन लिया।
गांव में चर्चा है —
“अगर सिस्टम ही पहचान मिटा दे, तो इंसाफ किससे मांगा जाए?”







