पटना: बिहार की राजधानी पटना के निजी हॉस्टल्स में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ गए हैं। नीट की छात्रा की मौत का मामला अभी पूरी तरह से सामने भी नहीं आया था कि राजधानी के एक और छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाली नाबालिग छात्रा की संदिग्ध मौत हो गई। इस मामले में परिजनों ने पुलिस और हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे साजिश के तहत हत्या करार दिया है।

ताजा घटना एक्जीबिशन रोड स्थित परफेक्ट गर्ल्स पीजी हॉस्टल की है, जो औरंगाबाद से जुड़ा है। परिवार का कहना है कि 6 जनवरी को उनकी 15 वर्षीय बेटी की हत्या की गई। परिजनों के अनुसार, हॉस्टल में उनके आने से पहले ही छात्रा की डेड बॉडी को फंदे से उतारकर बेड पर रख दिया गया। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू की है, लेकिन परिजनों का आरोप है कि मामले में गंभीर लापरवाही और मिलीभगत की आशंका है।
परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
परिजनों ने प्राथमिकी में हॉस्टल संचालक मुसाहीद रेजा और मुकर्रम रेजा, वार्डन खुशबू कुमारी, हॉस्टल इंचार्ज और छात्रा की सहेलियों समेत अन्य अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया है। उनका दावा है कि इन सभी की मिलीभगत से उनकी बेटी की हत्या की गई।
मृतका की मां ने रोते हुए कहा, “हमारी बेटी 4 जनवरी को पटना पहुंची और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। 6 जनवरी की रात करीब 1 बजे हमें अचानक कॉल आया कि हमारी बेटी की मौत हो गई। लेकिन जब हम पहुंचे, तो बेटी की डेड बॉडी फंदे से उतराकर बेड पर रखी गई थी, और होस्टल संचालक पहले ही वहां से चला गया था। हमारी बेटी ने कभी किसी परेशानी की बात नहीं बताई। हमें पूरा यकीन है कि यह हत्या है।”
परिवार का यह भी आरोप है कि बेटी के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि यदि मामला आत्महत्या का होता, तो छात्रा किसी तरह संकेत देती या परेशानी के बारे में बताती।
अज्ञात लड़कों की मौजूदगी ने बढ़ाई शंकाएं
छात्रा के पिता ने हॉस्टल प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सूचना मिली कि दो लड़के हॉस्टल में प्रबंधन की अनुमति के बिना पहुंचे थे। उन्होंने आशंका जताई कि ये लड़के ही छात्रा की हत्या में शामिल हो सकते हैं। पुलिस ने दो आरोपियों को पकड़ा था, लेकिन एक को छोड़ दिया। परिवार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है और पुलिस मामले में पूरी तरह गंभीर नहीं दिख रही।
मृतका की मौत से पहले और बाद के घटनाक्रम
परिवार के अनुसार, 4 जनवरी को बेटी पटना पहुंची और 5-6 जनवरी तक उनसे नियमित संपर्क में थी। लेकिन 6 जनवरी की रात अचानक उनके पास कॉल आया कि बेटी ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। परिवार के पहुंचने से पहले ही डेड बॉडी को बेड पर रख दिया गया, जिससे मामले में लापरवाही और साजिश की आशंका और बढ़ गई।
परिजनों ने पुलिस से मांग की है कि मामले की तत्परता से और निष्पक्ष जांच की जाए, और दोषियों को सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़े। उन्होंने कहा कि हॉस्टल संचालक, वार्डन और अन्य लोग मामले में जिम्मेदार हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना बिहार में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के दौर में चिंता पैदा करती है। कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि निजी हॉस्टल्स में छात्रों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है। यह घटना यह भी दिखाती है कि नाबालिग छात्राओं की सुरक्षा के लिए कानून और प्रशासन दोनों को सतर्क रहना होगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि हॉस्टल प्रबंधन, वार्डन और पुलिस की मिलीभगत या लापरवाही से ऐसे मामले और बढ़ सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा, मानसिक और शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर स्तर पर कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।
पुलिस की जांच जारी
गोह थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज की मदद से हत्या या आत्महत्या की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की जा रही है। लेकिन परिजनों का आरोप है कि पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं हो रही।
पटना में यह घटना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए संदेश है कि निजी हॉस्टल्स में नाबालिग लड़कियों की सुरक्षा कितनी गंभीर रूप से ली जा रही है। परिजनों और समाज की मांग है कि दोषियों को जल्द पकड़ कर न्याय सुनिश्चित किया जाए।







