बेतिया के नरकटियागंज अंतर्गत शिकारपुर थाना क्षेत्र में मानवता को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। हड़बोड़ा नदी के किनारे एक महिला का शव फेंकते हुए दो व्यक्तियों को ग्रामीणों ने रंगे हाथ पकड़ा, जिनमें एक रिक्शा चालक भी शामिल था। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग तुरंत पुलिस को अवगत कराते हैं, जिसके बाद मामला गंभीर मोड़ ले गया।

ग्रामीणों ने आरोपियों को पकड़ने के बाद तुरंत शिकारपुर पुलिस को सूचित किया। मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों से पूछताछ की, और जो खुलासा हुआ उसने सभी को स्तब्ध कर दिया।
आरोप: रेल पुलिस ने दिया शव फेंकने का आदेश
पकड़े गए व्यक्तियों की पहचान सुरदास (चमुआ गांव) और रामचंद (पोखरा चौक) के रूप में हुई। उन्होंने दावा किया कि महिला की मौत रेल परिसर में हुई थी और शव को नदी में फेंकने का निर्देश रेल पुलिस के प्रेम कुमार नामक कर्मी ने दिया।
दोनों आरोपियों के अनुसार मृतका मोतिहारी जिले के चइलहा गांव की तेतरी देवी थी, जो स्टेशन परिसर के आसपास रहती थी। इस खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया।
घटना की जानकारी मिलते ही नरकटियागंज रेल पुलिस भी मौके पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में ले लिया।
पुलिस ने किया मामला दर्ज, जांच में जुटी टीम
शिकारपुर थाना प्रभारी ज्वाला कुमार सिंह ने बताया कि सूचना मिलने पर एसआई जयभगवान कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल मौके पर भेजा गया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रेल परिसर में महिला की मौत के बाद शव को ठिकाने लगाने का प्रयास किया जा रहा था।
रेल थाना प्रभारी राजकुमार ने कहा कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। वहीं रेल एसपी वीणा कुमारी ने पूरे मामले की जांच के लिए रेल डीएसपी को निर्देश दिए हैं।
हालांकि रेल पुलिस की ओर से यह भी कहा गया कि मृतका एक भिखारी महिला थी और उसकी पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है। लेकिन इस बयान के बावजूद लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।
गंभीर सवाल और लोगों में रोष
रेल पुलिस पर लगे आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं:
महिला की मौत रेल परिसर में कैसे हुई?
शव को नदी में फेंकने की जरूरत क्यों पड़ी?
अगर आरोप सही हैं, तो क्या कानून की रक्षा करने वाले ही कानून तोड़ते पाए गए?
इन सवालों ने मामले को और अधिक गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने न केवल एक अनजान महिला की मौत की दुखद सच्चाई उजागर की है, बल्कि रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बीच गांव में शोक और चिंता की लहर है। लोग चाहते हैं कि दोषियों को कठोर सजा मिले और घटना की पूरी सच्चाई सामने आए।
निगाहें अब जांच पर टिकी
अब सबकी निगाहें रेल डीएसपी और स्थानीय पुलिस की जांच पर टिकी हैं। लोगों की आशंका है कि अगर मामला गंभीरता से न लिया गया, तो यह भी किसी फाइल में दफन होकर रह जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि रेलवे परिसर में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होनी चाहिए और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। अगर पुलिस या रेलकर्मी कानून की रक्षा की बजाय उसके खिलाफ कार्य कर रहे हैं, तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल उठाता है।
इस घटना ने न केवल बेतिया के नरकटियागंज इलाके में बल्कि पूरे बिहार में रेल सुरक्षा और मानवता के मुद्दे पर चिंता बढ़ा दी है। अब जनता और प्रशासन दोनों की निगाहें जांच पर हैं, ताकि यह साफ हो सके कि इस मामले में कौन दोषी है और न्याय किस हद तक पहुंचता है।







