पटना, 30 जनवरी 2026: बिहार सरकार ने तकनीकी उद्योगों और स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 को मंजूरी दी गई। इस नई नीति के तहत राज्य में सेमीकंडक्टर उद्योग लगाने वाले उद्यमियों को सिर्फ 1 रुपये में 1 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, उद्यमियों को रजिस्ट्रेशन, स्टांप शुल्क और भूमि संपरिवर्तन शुल्क में छूट जैसी कई अन्य सुविधाएँ भी प्रदान की जाएँगी।

नीतीश सरकार की इस नीति का मुख्य उद्देश्य बिहार को पूर्वी भारत का टेक हब बनाना और प्रदेश में रोजगार सृजन के अवसर बढ़ाना है। उद्योग विभाग के अनुसार, सेमीकंडक्टर क्षेत्र आज के आधुनिक युग में सबसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में से एक है। यह क्षेत्र स्वास्थ्य सेवा, संचार, परिवहन, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को तकनीकी समर्थन प्रदान करता है। भारत का सेमीकंडक्टर बाजार तेजी से बढ़ रहा है और विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2030 तक यह 100 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुँच जाएगा।
बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 में उद्यमियों को कई तरह की आर्थिक छूट और प्रोत्साहन दिए गए हैं। उदाहरण के लिए, किसी प्रोजेक्ट की लागत के प्रति 100 करोड़ रुपये पर 1 रुपये की टोकन राशि पर 1 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, परियोजना के लिए आवश्यक पंजीयन शुल्क, स्टांप शुल्क और भूमि संपरिवर्तन शुल्क में भी छूट दी जाएगी। ये प्रावधान राज्य में निवेशकों और उद्योगपतियों के लिए बड़े प्रोत्साहन के रूप में काम करेंगे।
नीतीश सरकार का मानना है कि बिहार में तकनीकी उद्योगों का विकास न केवल राज्य के आर्थिक विकास में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगा। मुख्यमंत्री ने अपने सात निश्चय पार्ट-3 के कार्यक्रम के तहत राज्य में आधुनिक तकनीकी उद्योगों को बढ़ावा देने का संकल्प लिया है। इस नीति के तहत स्थापित होने वाले सेमीकंडक्टर प्लांट्स न केवल स्थानीय जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिहार की पहचान को भी मजबूत करेंगे।
इस नीति का एक और प्रमुख पहलू यह है कि यह छोटे और मध्यम उद्यमियों को भी लाभान्वित करेगी। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि बड़ी कंपनियों के साथ-साथ स्थानीय स्टार्टअप्स और उद्यमियों को भी प्रोत्साहन मिले, जिससे राज्य में इनोवेशन और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिले।
उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, सेमीकंडक्टर उद्योग आधुनिक तकनीक का केंद्र है और इसमें निवेश से राज्य की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि भारत की डिजिटल और तकनीकी मांग बढ़ रही है, और बिहार इस क्षेत्र में सही अवसर प्रदान करके निवेशकों को आकर्षित कर सकता है।
नीतीश सरकार की यह नीति सिर्फ निवेश और रोजगार तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य राज्य में स्थानीय विकास, तकनीकी शिक्षा और रिसर्च सेंटर स्थापित करना भी है। पॉलिसी के तहत स्थापित होने वाले प्लांट्स में प्रशिक्षित कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाएगी और राज्य में तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान भी विकसित किए जाएंगे। इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि बिहार का मानव संसाधन कौशल भी मजबूत होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में इस तरह की नीति से पूर्वी भारत में निवेश का वातावरण सुधरेगा। न केवल सेमीकंडक्टर उद्योग, बल्कि इससे जुड़े क्षेत्रों जैसे एलेक्ट्रॉनिक्स, संचार, ऑटोमेशन और डेटा सेंटर को भी प्रोत्साहन मिलेगा। निवेशकों के लिए यह नीति काफी आकर्षक है क्योंकि इसके तहत जमीन, कर और शुल्क में छूट दी जा रही है।
राज्य सरकार का यह भी कहना है कि इस नीति के माध्यम से बिहार को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए पसंदीदा स्थान बनाया जाएगा। सेमीकंडक्टर और उच्च तकनीक उद्योगों में निवेश से राज्य के आर्थिक ढांचे को मजबूती मिलेगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
नीतीश कुमार ने कैबिनेट बैठक में कहा कि बिहार को केवल कृषि पर आधारित राज्य नहीं रहना चाहिए। राज्य में तकनीकी उद्योगों और नवाचार को बढ़ावा देकर हम बिहार को आर्थिक और तकनीकी दृष्टि से मजबूत राज्य बना सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नई पॉलिसी के तहत जो उद्योग स्थापित होंगे, उनसे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और राज्य के आर्थिक विकास की गति बढ़ेगी।
इस पहल के तहत बिहार सरकार ने टेक्नोलॉजी निवेश और उद्योग स्थापना के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज तैयार किया है। इसके तहत, निवेशकों को वित्तीय और प्रशासनिक दोनों तरह के लाभ मिलेंगे। निवेशकों को भूमि पर आसान पहुँच, पंजीकरण प्रक्रिया में सुविधा और अन्य प्रशासनिक छूट दी जाएगी।
इस नीति से बिहार में उच्च तकनीकी उद्योगों का वातावरण विकसित होगा और राज्य की इनोवेशन क्षमता भी बढ़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह नीति बिहार को डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में एक नई पहचान दिलाने में मदद करेगी।
अंततः, बिहार सेमीकंडक्टर पॉलिसी-2026 राज्य की आर्थिक प्रगति, रोजगार सृजन और तकनीकी विकास के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी। इस नीति के लागू होने के बाद, बिहार को न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक तकनीकी हब के रूप में पहचाना जाएगा।







