बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने के संकेत उस वक्त मिले, जब पार्टी की एक अहम बैठक से आधे विधायक नदारद दिखे। इस घटनाक्रम के बाद सियासी गलियारों में दलबदल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

दरअसल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की अध्यक्षता में पटना स्थित पार्टी कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी। बैठक का मकसद 10 जनवरी से 25 फरवरी तक प्रस्तावित ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ की रणनीति तय करना था। इसमें पार्टी के सांसदों, जिला अध्यक्षों और विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों को शामिल होना था, लेकिन कांग्रेस के कुल 6 विधायकों में से 3 का बैठक में न पहुंचना पार्टी के लिए असहज स्थिति बनाता नजर आया।
JDU का तंज, NDA में जाने का दावा
कांग्रेस विधायकों की गैरहाजिरी पर जेडीयू ने बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। पार्टी प्रवक्ता अभिषेक झा ने दावा किया कि कांग्रेस के कुछ विधायक अब NDA की ओर झुकाव दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर खरमास के बाद ये विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए NDA में शामिल हो जाएं, तो इसमें कोई हैरानी नहीं होगी। साथ ही उन्होंने तेजस्वी यादव की विपक्षी भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।
कांग्रेस ने किया पलटवार
वहीं, कांग्रेस ने टूट की अटकलों को पूरी तरह खारिज किया है। पार्टी प्रवक्ता असित नाथ तिवारी ने साफ कहा कि कुछ विधायकों की अनुपस्थिति को राजनीतिक साजिश का रूप दिया जा रहा है। उनका कहना है कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और असली टूट तो भाजपा खेमे में देखने को मिलेगी।
खरमास के बाद बढ़ेगा सियासी ताप?
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी बड़े आंदोलन से पहले हुई बैठक में विधायकों की गैरमौजूदगी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। खासकर जब सत्ता पक्ष के नेता खुद कांग्रेस विधायकों से संपर्क की बात कर रहे हों। ऐसे में खरमास के बाद बिहार की राजनीति में कोई बड़ा ‘खेला’ होने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया जा सकता।







