बिहार विधानसभा चुनाव में अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद राष्ट्रीय जनता दल की मुश्किलें थमती नजर नहीं आ रही हैं। चुनावी नतीजों के बाद जहां पार्टी को आत्ममंथन की जरूरत बताई जा रही थी, वहीं अब एक वायरल वीडियो ने राजद के एक वरिष्ठ नेता के व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक कथित वीडियो में राजद के जहानाबाद सांसद, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता डॉ. सुरेंद्र प्रसाद यादव ग्रामीणों से बातचीत करते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान चुनावी हार को लेकर पूछे गए सवालों पर सांसद अपना संयम खो बैठे और आम लोगों के प्रति आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।
हालांकि दैनिक जागरण इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता, लेकिन वीडियो को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
वीडियो में सांसद यह कहते सुने जा रहे हैं कि उन्हें उस क्षेत्र से मात्र 15 हजार वोट मिले हैं, ऐसे में वहां विकास कार्य कैसे संभव है। इसी दौरान उन्होंने कुछ लोगों का नाम लेकर कथित तौर पर अभद्र टिप्पणियां कीं और वोट न देने वालों को लेकर नाराजगी जाहिर की। आरोप है कि उन्होंने अपमानजनक शब्दों के साथ भविष्य में “देख लेने” जैसी बातें भी कहीं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चुनावी हार के बाद राजद के भीतर बढ़ते असंतोष और तनाव की झलक भी देता है। विधानसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा और वह महज 25 सीटों तक सिमट गई, जिसे राजद के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
इधर, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर राजद पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि जनादेश को स्वीकार करने के बजाय जनता पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वहीं राजद समर्थकों का दावा है कि वीडियो को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है और पूरे संदर्भ में बात को गलत तरीके से दिखाया जा रहा है।
फिलहाल यह वायरल वीडियो एक अहम सवाल छोड़ गया है—
क्या चुनावी हार के बाद नेताओं को आत्मचिंतन करना चाहिए या जनता को ही दोषी ठहराना सही है?
आने वाले दिनों में यही सवाल राजद की राजनीति और सार्वजनिक छवि की दिशा तय कर सकता है।







