बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए 2026 महत्वपूर्ण साल है। 2025 में उन्होंने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। लेकिन राजनीतिक मंच पर लगातार उनकी उम्र और स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष लगातार प्रचार करता रहा कि:

भाजपा उन्हें मुख्यमंत्री का चेहरा नहीं बनाएगी।
चुनाव जीतने के बाद भी वे सीएम नहीं बने रहेंगे।
उनकी उम्र और बीमारियों के कारण मतदाता उन्हें नहीं चुनेंगे।
इन आरोपों और अफवाहों का जवाब नीतीश कुमार काम और सक्रियता से दे रहे हैं, बयान या भाषण से नहीं।
बीमारी और उम्र का जवाब
नीतीश कुमार करीब 74 साल के हैं और पिछले कुछ वर्षों में कई बार बीमार भी रहे। बावजूद इसके उन्होंने लगातार जनता के बीच रहकर काम किया। चुनाव के दौरान उन्होंने हेलीकॉप्टर की बजाय सड़क मार्ग से सभाएं कीं, लोगों से मिले और विकास योजनाओं का जायजा लिया।
चुनाव के बाद भी सक्रिय
2025 के विधानसभा चुनाव में 243 में से 202 सीटें जीतकर 10वीं बार मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार आराम नहीं कर रहे। ठंड और मौसम की परेशानियों के बावजूद वे सप्ताह में तीन-चार दिन जिलों का दौरा कर रहे हैं। पटना में तो एक दिन में कई जगहों का निरीक्षण कर चुके हैं।
16 जनवरी से शुरू हो रही समृद्धि यात्रा
नीतीश कुमार 16 जनवरी से समृद्धि यात्रा पर निकल रहे हैं। यात्रा की शुरुआत पश्चिम चंपारण से होगी और 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण तक जाएगी। इसके बाद क्रमशः सीतामढ़ी-शिवहर, गोपालगंज, सीवान, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली होते हुए यात्रा 24 जनवरी को पटना लौटकर समाप्त होगी।
इस यात्रा के दौरान वे सात निश्चय योजना और दिसंबर 2024 की प्रगति यात्रा में शुरू की गई योजनाओं की समीक्षा करेंगे। उद्घाटन, शिलान्यास और जन-संवाद के जरिए जनता से सीधे जुड़ेंगे।
मीडिया से दूरी, जनता के बीच सक्रियता
नीतीश कुमार अक्सर मीडिया से दूरी रखते हैं। इंटरव्यू कम लेते हैं और वीडियो संदेशों को म्यूट करके जारी किया जाता है। लेकिन जनता के बीच जाकर वे लगातार सक्रिय हैं। चाणक्य इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिकल राइट्स के अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा के अनुसार, “नीतीश कुमार का एक्शन ही उनकी सक्रियता और जवाबदेही को दिखाता है।”
यात्रा की परंपरा
नीतीश कुमार की यात्राओं की परंपरा 2005 से शुरू हुई। न्याय यात्रा, विकास यात्रा, धन्यवाद यात्रा, प्रवास यात्रा, विश्वास यात्रा, सेवा यात्रा, अधिकार यात्रा और निश्चय यात्रा जैसी कई पहल उन्होंने ठंड, गर्मी या बारिश में शुरू कीं। अब समृद्धि यात्रा भी इसी क्रम का हिस्सा है, जिसमें वे जन-संवाद और समीक्षा के जरिए बिहार में विकास की गति बनाए रखेंगे।
निष्कर्ष:
विपक्ष के रिटायरमेंट और स्वास्थ्य के सवालों के प्रचार के बावजूद नीतीश कुमार सक्रिय और जनता के बीच बने रहने का संदेश दे रहे हैं। 16 जनवरी से शुरू हो रही समृद्धि यात्रा इसका सबसे बड़ा सबूत होगी।







