पटना के एक शांत समझे जाने वाले इलाके में स्थित हॉस्टल के भीतर जो हुआ, उसने हर किसी को सन्न कर दिया। नीट की तैयारी कर रही जहानाबाद की छात्रा की मौत अब केवल एक घटना नहीं रही, बल्कि यह एक ऐसा रहस्य बन चुकी है, जिसकी हर परत के नीचे नया सवाल छिपा है।

अब इस पूरे मामले में सबसे अहम कड़ी बनकर सामने आया है—मृतका का मोबाइल फोन। पुलिस ने जैसे ही मोबाइल को जब्त किया, वैसे ही जांच की दिशा बदल गई। मोबाइल की कॉल डिटेल्स में कुछ ऐसे नंबर मिले हैं, जिन पर छात्रा ने अपनी मौत से ठीक पहले सबसे ज़्यादा बातचीत की थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, घटना से एक दिन पहले और घटना वाले दिन लगातार कुछ नंबरों पर कॉल और बातचीत हुई थी। इन नंबरों की पहचान की जा रही है और उनसे जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू हो चुकी है। जांच टीम का मानना है कि छात्रा किसी दबाव, डर या परेशानी में थी, जिसकी झलक उसकी आख़िरी बातचीत में मिल सकती है।
एसआईटी और क्राइम ब्रांच ने हॉस्टल की सहेलियों से पूछताछ की, लेकिन हर कोई या तो अनजान बना रहा या फिर चुप्पी साधे रहा। किसी ने खुलकर यह नहीं बताया कि छात्रा किन परिस्थितियों से गुजर रही थी। यही चुप्पी अब शक को और गहरा कर रही है।
हॉस्टल के आसपास रहने वाले लोगों की बातें भी कई सवाल खड़े करती हैं। उनका कहना है कि अक्सर हॉस्टल के बाहर रात के समय गाड़ियां खड़ी रहती थीं। कुछ लोग आते-जाते दिखते थे, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब वही लापरवाही जांच के घेरे में है।
शनिवार को क्राइम ब्रांच की टीम जब छात्रा के घर जहानाबाद पहुंची, तो माहौल गमगीन था। परिजनों से लंबी पूछताछ हुई। पुलिस जानना चाहती थी कि छात्रा पटना आने के बाद किन-किन लोगों के संपर्क में थी। परिजनों का कहना है कि उनकी बेटी सीधी-सादी थी, पढ़ाई के अलावा कुछ नहीं सोचती थी।
लेकिन सवाल अब भी वही है—अगर वह सिर्फ पढ़ाई में व्यस्त थी, तो फिर आख़िरी समय में वह किससे इतनी बातचीत कर रही थी? क्या कोई ऐसा राज है, जिसे वह किसी को बताना चाहती थी?
जांच अभी जारी है, मोबाइल की हर कॉल, हर मैसेज और हर लोकेशन को खंगाला जा रहा है। शायद इसी मोबाइल में वह सच कैद है, जो इस खामोश हॉस्टल और बंद हो चुके फोन के पीछे छिपा हुआ है।







