वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के मदनपुर क्षेत्र में लगी भीषण आग ने प्रकृति की गोद में बसे एक अनमोल वन क्षेत्र को गहरी चोट पहुंचाई है। वन प्रमंडल-दो अंतर्गत मदनपुर वन प्रक्षेत्र के सिरिसिया जंगल में आग लगने से करीब चार एकड़ सदाबहार जंगल पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। हरियाली से भरपूर इलाका कुछ ही घंटों में धुएं और राख के ढेर में तब्दील हो गया।

सूखे खर-पतवार, झाड़ियां और सागवान के गिरे पत्ते आग के लिए ईंधन बन गए। तेज पछुआ हवा ने आग को और भड़का दिया, जिससे लपटें तेजी से फैलती चली गईं। जंगल की शांति पलभर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई। जान बचाने के लिए सांप, हिरण, सांभर, चीतल, बंदर और खरगोश जैसे कई वन्यजीव अपने प्राकृतिक ठिकानों को छोड़कर इधर-उधर भागते नजर आए।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग हरकत में आया। प्रभारी वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी नसीम अंसारी के नेतृत्व में वनकर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। अधिकारियों का कहना है कि यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं किया जाता, तो यह आसपास के गांवों तक फैल सकती थी और नुकसान कई गुना बढ़ सकता था।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि जंगल से जलावन चुनने वाले कुछ लोग और चरवाहों की लापरवाही अक्सर ऐसी घटनाओं की वजह बनती है। ठंड के मौसम में चलने वाली तेज हवाएं आग को और खतरनाक बना देती हैं। इस बार भी आग गांवों के काफी नजदीक तक पहुंच गई, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
ग्रामीणों के मुताबिक, हाल के दिनों में मदनपुर जंगल में आग लगने की यह दूसरी घटना है, जिससे वन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। वन विभाग ने माना है कि आग से जंगल की जैव विविधता को गंभीर नुकसान पहुंचा है। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है और दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ वन अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की बात कही गई है।







