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मिथिला के महान लोकपर्व जुड़शीतल के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व को जनमानस तक पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को सामाजिक संस्था मोद मंडली के तत्वावधान में जुड़शीतल महोत्सव का आयोजन किया गया। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा के संचालन में शहर के शुभंकरपुर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डा ओम प्रकाश ने किया। अपने संबोधन में उन्होंने इस पर्व की परंपरा में निहित लोकाचारों को विस्तार से रेखांकित करते कहा कि इस पर्व में सत्तू और बासी भात खाने का प्रचलन है। यह इसलिए कि गर्मी के महीने में इसे ग्रहण करने से आम व खास लोगों के शरीर को भरपूर मात्रा में प्रोटीन मिल सके।
डा सुषमा झा ने कहा कि मिथिला में आज भी पुरानी परंपराओं का जीवित होना अपने आप में बहुत बड़ी बात है। जुड़शीतल पर्व शीतलता और आशीर्वाद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जुड़शीतल के अवसर पर तुलसी में मिट्टी का बना मटका और कुश सहित जल अर्पण करने का आध्यात्मिक के साथ ही पर्यावरणीय महत्व सन्निहित है। इन्द्र मोहन झा ने अपने संबोधन में
इस पर्व में निहित पर्यावरण संरक्षण के संदेश की विस्तार से चर्चा की। अखिलेश चौधरी ने कहा कि वर्तमान समय में यह पर्व पर्यावरण संरक्षण और सामुदायिक एकता का प्रतीक बन गया है।
अध्यक्षता करते हुए विनय कुमार झा ने जुड़शीतल पर्व के लोक जीवन में महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह आस्था के साथ-साथ प्रकृति से भी जुड़ा हुआ त्यौहार है। इस दिन पेड़ों में पानी दिया जाता है ताकि आने वाली गर्मी से राहत मिलने के साथ ही वातावरण में शुद्ध कायम हो सके।
कार्यक्रम के दूसरे सत्र में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन का आयोजन किया गया। इसमें मणिकांत झा, डा सुषमा झा, विजय कुमार झा, नवल किशोर झा, प्रवीण कुमार झा आदि ने मिथिला की वर्तमान सामाजिक एवं सांस्कृतिक दशा व दिशा पर केंद्रित रचनाएं पढी। कार्यक्रम में आगत अतिथियों का स्वागत बालेंदु झा बाला जी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन मोद मंडली के सचिव संतोष कुमार झा ने किया। मौके पर विनोद कुमार झा, पुष्कर ठाकुर, बंटी, रमण कुमार झा, माधव झा, गुंजन, राकेश प्रकाश आदि की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।







