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दरभंगा

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष से सी. एम. लॉ. कॉलेज की अस्मिता बचाने की मांग

January 20, 20261 Mins Read
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दरभंगा:- मिथिला के पावन भूमि दरभंगा में स्वाधीनता से पूर्व वर्ष 1944 से विधि स्नातक की हो रही पढ़ाई में अब आई बाधाओं को दूर कराने की मांग दरभंगा के अधिवक्ताओं ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष से किया है। जिला बार एसोसिएशन दरभंगा के अधिवक्ताओं ने बार काऊंसिल ऑफ इण्डिया के अध्यक्ष को स्मार पत्र भेजकर मिथिला के ऐतिहासिक सी. एम. लॉ. कॉलेज की अस्मिता बचाने की मांग किया है। वहीं गैर विधि डिग्रीधारी प्रभारी प्राचार्य की जगह विधि डिग्रीधारी प्रभारी प्राचार्य या प्राचार्य का पदस्थापन करने के लिए कुलाधिपति और कुलपति ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय कामेश्वर नगर दरभंगा को संसूचित करने की भी मांग किया गया है। प्रेषित स्मार पत्र में अंकित किया है कि आजादी से पूर्व वर्ष 1944/45 में बैचलर ऑफ लॉ कि यहां पढ़ाई शुरू की गई। वर्ष 1971 ई० से सत्र 2010- 11 तक लगातार एल. एल. बी. कोर्स में 320 छात्रों का नामांकन और पढ़ाई होती रही। बी.सी.आई. के मानक के अनुरूप इस विधि महाविद्यालय में पूर्णकालिक प्रार्चाय, 11 पूर्णकालिक शिक्षक का पदस्थापन नहीं किये जाने तथा वर्ग संचालन के लिए वांछित आधार भूत संरचना के आभाव में ल.ना.मि.वि. विश्वविद्यालय दरभंगा का यह अंगीभूत ईकाई सी.एम. लॉ.कॉलेज में वर्ष 2021 से 2024 /25 तक छात्रों के नामांकन पर रोक लगा दी गई। बी.सी.आई के निरीक्षण के पश्चात सत्र 2025/26 में स्वीकृत बल 320 छात्रों का नामांकन की जगह मात्र 60 छात्रों के नामांकन की सर्शत अनुमति दी गई है और छात्रों की पढ़ाई हो रही है। स्मार पत्र में अंकित है कि कॉलेज में पूर्ण कालिक प्रार्चाय, पूर्णकालिक शिक्षकों की पदस्थापना और आधार भूत संरचना के साथ- साथ आवश्यक उपकरणों की व्यवस्था करना विश्वविद्यालय प्रशासन का कर्तव्य और नैतिक दायित्व है। इस विधि महा विधालय की पुरानी गरिमा को बहाल करने और मिथिला के छात्रों को लॉ की पढ़ाई से वंचित नहीं किये जाने हेतु अपने स्तर से बिहार के कुलाधिपति को संसूचित कर मिथिला के इस प्रतिष्ठित सी.एम.लॉ.‌ कॉलेज दरभंगा में बी.सी.आई.‌ के मानक के अनुरूप पूर्णकालिक प्रार्चाय, शिक्षकों की पदस्थापना और शिक्षण कार्य के लिए आधारभूत भवन संरचना का निर्माण कराकर कॉलेज में पूर्व से स्वीकृत संख्या 320 छात्रों के नामांकन का मार्ग प्रशस्त कराने की मांग किया है। स्मार पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले में अधिवक्ता सुधीर कुमार चौधरी, विजय नारायण चौधरी, अनिल कुमार मिश्रा, बुलन कुमार झा, कुमार उत्तम, मुरारी लाल केवट, सनोज कुमार, मनोज कुमार, हीरानंद मिश्रा, संपुर्णानंद झा सहित दर्जनों से अधिक अधिवक्ताओं का हस्ताक्षर है।

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