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बिहार राजनीति: ‘लालू से द्वेष का नतीजा है बिहार निवास तोड़ने का फैसला’, राजद ने नीतीश सरकार पर साधा निशाना

January 7, 20260 Mins Read
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दिल्ली में स्थित बिहार निवास को ध्वस्त करने के नीतीश सरकार के निर्णय को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सियासी बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी का आरोप है कि यह कदम पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के प्रति ईर्ष्या और चुनिंदा ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

राजद की बिहार इकाई के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा कि वर्ष 1994 में निर्मित बिहार निवास आज भी पूरी तरह मजबूत और उपयोगी है। हाल ही में इस भवन के सौंदर्यीकरण पर लगभग दो करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बावजूद इसे तोड़कर नया भवन बनाने का फैसला सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

शक्ति सिंह यादव का कहना है कि जब बिहार निवास का निर्माण हुआ था, तब राज्य के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव थे और भवन में उनके नाम का शिलापट्ट भी लगा है। राजद का आरोप है कि उसी शिलापट्ट को हटाने और राजनीतिक इतिहास को मिटाने की नीयत से इस इमारत को गिराने की योजना बनाई गई है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि बिहार निवास में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के लिए आधुनिक और सुविधाजनक सुइट मौजूद हैं। ऊँचाई पर स्थित होने के कारण वहां जलजमाव जैसी कोई समस्या नहीं है और यह भवन आने वाले 50 से 60 वर्षों तक सुरक्षित रह सकता है।

राजद प्रवक्ता ने नीतीश कुमार द्वारा दिल्ली में बनवाए गए बिहार सदन का जिक्र करते हुए कहा कि वहां से पानी टपकने की शिकायतें सामने आ रही हैं और लोग वहां ठहरना भी पसंद नहीं करते। इसके बावजूद सरकार एक सुचारु भवन को तोड़ने पर आमादा है।

आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए शक्ति सिंह यादव ने कहा कि बिहार पहले से ही तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज में डूबा हुआ है। राज्य पर प्रतिदिन करोड़ों रुपये का ब्याज बोझ है। ऐसे में सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर नया भवन बनाना जनता के पैसे की बर्बादी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि एक मजबूत इमारत को गिराकर 500 करोड़ रुपये से अधिक खर्च करने की तैयारी सिर्फ इसलिए है ताकि मुख्यमंत्री अपना नाम चमका सकें। राजद ने चेतावनी दी कि इस फैसले को जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी और इतिहास में असली पहचान उन्हीं की रहेगी, जिन्होंने बिहार को सम्मान दिलाया।

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