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पटना में साइबर ठगी का बड़ा रैकेट पकड़ा, 13 लड़कियां और युवक हिरासत में

February 3, 20261 Mins Read
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पटना में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस की बड़ी कार्रवाई ने राजधानी में हड़कंप मचा दिया। दानापुर और आसपास के इलाकों में पुलिस ने एक बड़े साइबर ठगी रैकेट का पर्दाफाश किया और इस कार्रवाई में 13 लड़कियों और एक युवक को हिरासत में लिया गया। यह गिरोह विभिन्न सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगने का काम करता था। इस दौरान पुलिस ने दर्जनभर लैपटॉप और मोबाइल बरामद किए हैं, जो इस ठगी रैकेट में इस्तेमाल किए जा रहे थे।

घटना की जानकारी साइबर थाने की पुलिस को रविवार को मिली थी। सूचना के अनुसार, शहर के अलग-अलग इलाकों में किराये के मकानों में छोटे-छोटे कार्यालय चलाकर अपराधी लोगों से ठगी करते थे। इसके बाद पुलिस ने सभी कार्यालयों के आसपास निगरानी रखी और सोमवार की रात करीब 10 बजे, रूपसपुर थाना क्षेत्र के मनोकामना मंदिर के पास, रुकनपुरा के वेदनगर, गोला रोड, राम जयपाल नगर और सगुना मोड़ पर एक साथ छापेमारी की।

हिरासत में लिया गया गिरोह

पुलिस की कार्रवाई में वेदनगर स्थित कार्यालय से छह लड़कियां, राम जयपाल नगर स्थित कार्यालय से पांच लड़कियां और सगुना मोड़ स्थित निजी मकान से दो लड़कियां हिरासत में ली गईं। इसके अलावा एक युवक भी पुलिस की हिरासत में है। इस रैकेट का संचालन धर्मेंद्र कुमार कर रहा था, जो दानापुर का रहने वाला है। दो महीने पहले उसने किराए पर दो कमरे का फ्लैट लिया था और यहां लड़कियों को साइबर ठगी के लिए नियुक्त किया।

कार्यप्रणाली और ठगी का तरीका

पुलिस के अनुसार, यह लड़कियां प्रायः सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में ड्यूटी करती थीं। उनके काम का तरीका बेहद संगठित था। वे अलग-अलग मोबाइल नंबरों से लोगों को फोन करती थीं और सरकारी योजनाओं जैसे कि किसान सम्मान निधि योजना, वृद्धा पेंशन योजना और सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना का झांसा देकर ओटीपी प्राप्त करती थीं। प्राप्त ओटीपी का इस्तेमाल करके वे लोगों के बैंक खाते से रुपये निकाल लेती थीं। यह सब कार्य वेतन देकर करवाया जाता था।

लड़कियों ने पुलिस को बताया कि वे प्रतिदिन अलग-अलग लोगों के मोबाइल नंबर पर कॉल करती थीं। जो लोग उनके झांसे में आते थे, उनसे ओटीपी लेकर राशि निकाल ली जाती थी। इस पूरी प्रक्रिया में लड़कियों का काम सिर्फ संपर्क करना और ओटीपी लेना था। इस साइबर ठगी का सरगना आकाश कुमार है, जो फिलहाल फरार है। पुलिस इस समय उसकी तलाश में जुटी है।

छापेमारी की योजना और कार्रवाई

साइबर पुलिस ने बताया कि रविवार को मिली सूचना के आधार पर उन्होंने पूरे इलाके में नजर रखी। इस दौरान पुख्ता जानकारी मिलने पर सोमवार की रात सभी कार्यालयों पर एक साथ छापेमारी की गई। दो कार्यालयों में पुलिस पहुंचने से पहले ही अपराधी भाग गए, जबकि तीन जगह से लड़कियों और युवक को दबोच लिया गया।

साइबर ठगी रैकेट के सरगना के बारे में पूछताछ जारी है। हिरासत में ली गई लड़कियों से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि गिरोह की संरचना कैसी थी, और कितने लोगों को इसमें शामिल किया गया था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के बाद और भी कई महत्वपूर्ण सुराग हाथ लग सकते हैं।

स्थानीय पुलिस की सतर्कता

थानाध्यक्ष रूपसपुर ने बताया कि यह रैकेट काफी लंबे समय से सक्रिय था। गिरोह ने शहर के अलग-अलग इलाकों में छोटे-छोटे कार्यालय बनाए थे, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो रहा था। जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारी और सबूत जुटाने में सफलता हासिल की।

हिरासत में ली गई लड़कियों और युवक के पास से कई लैपटॉप, मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए। यह उपकरण ठगी के काम में इस्तेमाल किए जाते थे। पुलिस ने यह भी कहा कि हिरासत में ली गई लड़कियों में अधिकांश पटना शहर के विभिन्न इलाकों की रहने वाली हैं। उनकी निशानदेही पर वेदनगर से धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया।

साइबर अपराध की गंभीरता

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की ठगी आधुनिक तकनीक का गलत इस्तेमाल है। लोग सरकारी योजनाओं के नाम पर अपने पैसे ठगने वालों के हाथों गंवा देते हैं। यह घटना समाज के लिए चेतावनी है कि साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना कितना जरूरी है।

साइबर अपराधियों की इस घटना ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि अपराधियों ने अपनी गतिविधियों को इस तरह व्यवस्थित किया कि वे बड़े पैमाने पर लोगों को झांसा देकर ठगी कर सकें। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध कॉल या मैसेज पर भरोसा न करें और तुरंत साइबर पुलिस को सूचित करें।

पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई

पुलिस हिरासत में ली गई लड़कियों और युवक से लगातार पूछताछ कर रही है। उनके बयान और गिरफ्तार किए गए उपकरणों की जांच से पुलिस को गिरोह के और अन्य सदस्यों और सरगना आकाश कुमार तक पहुंचने में मदद मिलेगी। पुलिस का कहना है कि जल्दी ही पूरे गिरोह का पर्दाफाश किया जाएगा और सरगना को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इस पूरे मामले में यह भी देखा गया कि गिरोह ने लड़कियों को नियमित वेतन देकर काम कराया, जिससे यह साफ है कि अपराध में आर्थिक लाभ मुख्य उद्देश्य था। पुलिस ने कहा कि लड़कियों को इस गतिविधि में शामिल होने के पीछे मजबूरी या छल-कपट की स्थिति भी हो सकती है, इसलिए उनकी सही स्थिति का पता लगाया जा रहा है।

पटना में यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के लिए चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। प्रशासन और पुलिस की सतर्कता के कारण यह बड़ा रैकेट पकड़ा गया और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार के रैकेट का पर्दाफाश करके अन्य अपराधियों को भी डराना और रोकना संभव होगा।

इस तरह पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने साइबर अपराधियों के लिए एक संदेश दिया है कि किसी भी प्रकार की ठगी और फ्रॉड को बख्शा नहीं जाएगा। हिरासत में ली गई लड़कियों और युवक से आगे की पूछताछ के बाद पूरे गिरोह और उनके सरगना तक पुलिस पहुंचने की उम्मीद है।

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