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7वीं मंजिल से गिरने का सच क्या है? डमी पुतलों से सीन दोहराकर SIT ने शुरू की वैज्ञानिक जांच

February 19, 20261 Mins Read
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बिहार की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में 12वीं कक्षा की एक छात्रा की सातवीं मंजिल से गिरकर हुई मौत के मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह अब सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि रहस्य में बदलता जा रहा है—क्या छात्रा खुद गिरी थी या उसे धक्का दिया गया था? इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए पुलिस ने वैज्ञानिक तरीके से क्राइम सीन को दोबारा तैयार किया है। विशेष जांच दल (SIT) और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम ने मृतका के वजन के बराबर चार डमी पुतलों को अलग-अलग कोणों से सातवीं मंजिल से नीचे गिराकर घटना का रीक्रिएशन किया।

घटना 12 फरवरी की बताई जा रही है, जब फुलवारी शरीफ थाना क्षेत्र के एम्स गोलंबर के पास स्थित एक अपार्टमेंट की छत से गिरकर 16 वर्षीय छात्रा की मौत हो गई थी। छात्रा 12वीं कक्षा की थी और कथित तौर पर कोचिंग सेंटर गई हुई थी। बताया जाता है कि वह हरी नगर स्थित सुमित्रा हाइट्स अपार्टमेंट की सातवीं मंजिल पर पहुंची और वहीं से नीचे गिर गई। घटना के तुरंत बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने 11 सदस्यीय एसआईटी का गठन किया। सिटी एसपी वेस्ट भानु प्रताप सिंह के नेतृत्व में गठित इस टीम में फुलवारी शरीिफ थाना समेत अन्य थानों के अधिकारी भी शामिल किए गए। शुरुआती जांच में सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, जिनमें छात्रा को सीढ़ियों से छत की ओर जाते हुए देखा गया। हालांकि, गिरने के ठीक पहले क्या हुआ, यह स्पष्ट नहीं हो पाया।

इसी अनिश्चितता को दूर करने के लिए मंगलवार को पुलिस ने वैज्ञानिक आधार पर सीन रीक्रिएशन कराया। सिटी एसपी भानु प्रताप सिंह ने बताया कि एफएसएल विशेषज्ञों के निर्देश पर मृतका के वजन के अनुपात में चार डमी तैयार की गई थीं। इन डमी पुतलों को अलग-अलग एंगल और पोजिशन से नीचे गिराया गया, ताकि यह समझा जा सके कि यदि कोई व्यक्ति खुद कूदे, फिसले या उसे धक्का दिया जाए तो गिरने का पैटर्न कैसा होगा।

पुलिस के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना है कि छात्रा की मौत सिंगल इम्पैक्ट से हुई या उसके शरीर पर मल्टीपल इंजरी के संकेत थे। यदि किसी ने धक्का दिया होगा तो गिरने की दिशा और शरीर की स्थिति अलग होगी, जबकि खुद कूदने या फिसलने की स्थिति में अलग परिणाम सामने आ सकते हैं। विशेषज्ञ अब इन सभी एंगल का विश्लेषण करेंगे और अपनी रिपोर्ट पुलिस को सौंपेंगे।

एसपी ने यह भी स्पष्ट किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यौन शोषण या दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, परिजनों द्वारा आशंका जताए जाने के बाद मेडिकल बोर्ड से दोबारा विस्तृत जांच कराई गई थी। पुलिस का कहना है कि फिलहाल किसी भी संभावना को नकारा नहीं जा रहा है। वैज्ञानिक जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम निष्कर्ष निकाला जाएगा।

घटना के बाद पुलिस ने अपार्टमेंट में काम करने वाले एक बढ़ई, एक गार्ड और दो अन्य लोगों को हिरासत में लिया था। उनसे पूछताछ की गई, लेकिन अब तक उनकी संलिप्तता के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं। फिर भी, पुलिस सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि सीन रीक्रिएशन के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोबारा पूछताछ की जाएगी और जरूरत पड़ी तो नए सवाल तैयार किए जाएंगे।

सीन रीक्रिएशन को जांच की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, कई बार घटनास्थल की परिस्थितियां और फॉरेंसिक विश्लेषण मिलकर ऐसे सुराग दे देते हैं, जो सामान्य जांच में सामने नहीं आते। गिरने की ऊंचाई, शरीर की दिशा, चोटों का स्वरूप और जमीन पर मिलने वाले निशान—इन सभी को ध्यान में रखकर विशेषज्ञ यह तय करेंगे कि यह दुर्घटना थी, आत्महत्या थी या फिर किसी साजिश का परिणाम।

स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग इसे आत्महत्या मान रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इतने ऊंचे अपार्टमेंट की छत से गिरना सामान्य दुर्घटना नहीं हो सकती। परिजन भी स्पष्ट जवाब चाहते हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक उन्हें चैन नहीं मिलेगा।

पुलिस का दावा है कि जांच निष्पक्ष और वैज्ञानिक आधार पर की जा रही है। एसपी भानु प्रताप सिंह ने कहा कि “सीन रीक्रिएशन बहुत कारगर तरीका है। इससे यह स्पष्ट होता है कि घटना के समय परिस्थितियां कैसी रही होंगी। विशेषज्ञों की राय आने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ऊंची इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी पुख्ता है। क्या छत तक जाने की पहुंच नियंत्रित थी? क्या वहां पर्याप्त सुरक्षा गार्ड या निगरानी व्यवस्था मौजूद थी? ऐसे कई प्रश्न हैं जिनका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल पाएगा।

फिलहाल, पुलिस रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। विशेषज्ञों की राय सामने आने के बाद ही यह तय हो सकेगा कि छात्रा की मौत एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा थी, आत्मघाती कदम था या फिर किसी और वजह का परिणाम। जब तक फॉरेंसिक रिपोर्ट और एसआईटी की अंतिम जांच पूरी नहीं होती, तब तक यह मामला रहस्य बना रहेगा।

पटना के इस चर्चित मामले में अब सबकी नजर जांच एजेंसियों पर टिकी है। क्या डमी पुतलों से किया गया यह प्रयोग सच्चाई उजागर करेगा? क्या इससे यह साफ हो पाएगा कि छात्रा गिरी थी या गिराई गई? आने वाले दिनों में रिपोर्ट सामने आने के बाद ही इन सवालों का जवाब मिल

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