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फरवरी में ही गर्मी का अलर्ट: 30°C पार पटना, गंगा का जलस्तर घटा

February 14, 20261 Mins Read
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बिहार में फरवरी का महीना अभी आधा ही गुजरा है, लेकिन मौसम ने जिस तरह करवट ली है, उसने लोगों को चौंका दिया है। आमतौर पर इस समय तक हल्की ठंड का एहसास बना रहता है, मगर इस बार दिन के समय धूप में तीखापन महसूस होने लगा है। राजधानी पटना समेत कई जिलों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जो सामान्य से करीब 2 से 4 डिग्री अधिक है। बदलते मौसम के इस रुख को देखकर लोग सवाल उठाने लगे हैं—क्या यह आने वाली भीषण गर्मी का संकेत है?

सुबह और रात में हल्की ठंड जरूर बनी हुई है, लेकिन दोपहर होते-होते तेज धूप और बढ़ता तापमान गर्मी का आभास करा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार पिछले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। फरवरी के शुरुआती दिनों में जहां अधिकतम तापमान 25 डिग्री के आसपास था, वहीं अब यह 30 डिग्री तक पहुंच चुका है। न्यूनतम तापमान भी 8-10 डिग्री से बढ़कर कई स्थानों पर 15-20 डिग्री के बीच दर्ज किया जा रहा है। यह अंतर दर्शाता है कि मौसम सामान्य पैटर्न से हटकर चल रहा है।

सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि गंगा के जलस्तर में गिरावट भी चिंता बढ़ा रही है। फागुन का महीना आमतौर पर ऐसा समय होता है जब नदी में पर्याप्त जल प्रवाह बना रहता है। लेकिन इस बार कई घाटों पर पानी काफी पीछे हट गया है। चौड़े-चौड़े रेतीले मैदान नजर आने लगे हैं, जिससे स्थानीय लोग हैरान हैं। खासकर पटना के घाटों पर पानी का स्तर कम होने की तस्वीरें चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

‘डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स ऑफ इंडिया’ के आंकड़ों के मुताबिक गंगा किनारे बसे शहरों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। 2024-25 की तुलना में 2025-26 में पटना का भूजल स्तर 98219.10 एचएम से घटकर 37595.63 एचएम तक आ गया है। यही स्थिति बक्सर, लखीसराय, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर जैसे जिलों में भी देखने को मिल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गिरावट जारी रही, तो आने वाले महीनों में जल संकट गहरा सकता है।

रात के तापमान में भी बढ़ोतरी चिंता का विषय है। बांका में न्यूनतम तापमान 20.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो फरवरी के लिए असामान्य माना जा रहा है। कटिहार और खगड़िया में 17.3 डिग्री, पटना में 15.7 डिग्री, कैमूर में 15.4 डिग्री और फारबिसगंज में 15 डिग्री तापमान रिकॉर्ड हुआ। रात में तापमान बढ़ने का मतलब है कि ठंड का असर तेजी से खत्म हो रहा है और गर्मी का दौर जल्दी शुरू हो सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी तक कोई प्रभावी पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं हुआ है, जिसके कारण आसमान साफ बना हुआ है। साफ आसमान और तेज धूप की वजह से दिन का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 16 फरवरी के आसपास एक नया पश्चिमी विक्षोभ हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका बिहार पर कितना असर होगा, यह स्पष्ट नहीं है। फिलहाल अगले पांच दिनों तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है। न घना कोहरा दिख रहा है, न ही बारिश के संकेत।

कृषि क्षेत्र पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है। फरवरी और मार्च का समय रबी फसलों के लिए महत्वपूर्ण होता है। यदि तापमान समय से पहले बढ़ता है, तो गेहूं और अन्य फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसान पहले ही बदलते मौसम के कारण चिंता में हैं। विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि सिंचाई और फसल प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाए।

जल विशेषज्ञों का मानना है कि भूजल स्तर में गिरावट और गंगा के जलस्तर का कम होना सिर्फ मौसमी कारणों का परिणाम नहीं हो सकता। शहरीकरण, अत्यधिक जल दोहन और वर्षा के असंतुलित पैटर्न भी इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। यदि समय रहते जल संरक्षण के उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले समय में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

हालांकि अभी 30 डिग्री का तापमान मई-जून जैसी तपिश नहीं दर्शाता, लेकिन फरवरी में इस स्तर तक पहुंचना सामान्य नहीं माना जाता। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार तापमान का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है। यही वजह है कि लोग इसे संभावित हीट वेव की शुरुआती आहट मान रहे हैं।

फिलहाल मौसम विभाग ने किसी भी प्रकार की लू या अत्यधिक गर्मी की आधिकारिक चेतावनी जारी नहीं की है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मार्च में भी यही रुझान जारी रहा, तो अप्रैल और मई में तापमान नए रिकॉर्ड बना सकता है।

बदलते मौसम के इस दौर में आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। पर्याप्त पानी पीना, दोपहर की तेज धूप से बचना और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। साथ ही जल संरक्षण की दिशा में छोटे-छोटे प्रयास भी भविष्य में बड़े संकट को टाल सकते हैं।

कुल मिलाकर, बिहार में फरवरी की यह असामान्य गर्मी और गंगा के घटते जलस्तर ने आने वाले महीनों के लिए चेतावनी जरूर दे दी है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि मौसम आगे किस दिशा में करवट लेता है और क्या यह शुरुआती संकेत वाकई भीषण गर्मी में बदलते हैं या फिर कोई नया मौसमीय बदलाव राहत लेकर आता है।

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