बिहार के पूर्णिया शहर में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब लॉ कॉलेज के पास स्थित मंडल लॉज में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और एक-एक कर छह गैस सिलिंडर धमाके के साथ फट गए। धमाकों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। राहत की बात यह रही कि लॉज में रह रहे 50 से अधिक छात्र किसी तरह अपनी जान बचाने में सफल रहे। हालांकि इस हादसे में छात्रों का भारी नुकसान हुआ है—कमरों में रखा सामान, नकदी, किताबें और जरूरी दस्तावेज जलकर राख हो गए।

घटना हाट थाना क्षेत्र की बताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग लगने की वजह बिजली के मीटर में शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि सबसे पहले एक कमरे से धुआं उठता दिखाई दिया, जिसके बाद आग तेजी से फैलती चली गई।
मीटर से उठता धुआं बना खतरे की घंटी
लॉज में रहने वाले छात्रों ने बताया कि इग्नू से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहे छात्र मुकेश कुमार के कमरे में बिजली का मीटर लगा हुआ था। दोपहर के समय कुछ छात्रों ने उसी कमरे से धुआं निकलते देखा। शुरुआत में किसी को अंदेशा नहीं था कि आग इतनी तेजी से फैल जाएगी। जब तक छात्र कुछ समझ पाते, कमरे में लपटें उठने लगीं।
कुछ ही मिनटों में आग ने कमरे में रखे सामान को अपनी चपेट में ले लिया। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कमरे में रखे गैस सिलिंडर ने भी आग पकड़ ली और जोरदार धमाके के साथ फट गया। इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से कुल छह सिलिंडर ब्लास्ट हो गए। धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोग भी दहशत में आ गए।
छात्रों ने दिखाई हिम्मत
लॉज में उस समय 30 से अधिक छात्र मौजूद थे, जबकि कुल मिलाकर 50 से ज्यादा छात्र वहां रहते थे। आग लगते ही छात्रों में भगदड़ मच गई। कई छात्र बिना कुछ उठाए बाहर की ओर भागे। कुछ ने हिम्मत दिखाते हुए तीन गैस सिलिंडरों को बाहर निकालने की कोशिश की ताकि और बड़ा हादसा न हो।
इंटर साइंस के छात्र रवनीश कुमार ने बताया कि उनका एडमिट कार्ड और परीक्षा से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज जल गए। उनका परीक्षा केंद्र बायसी में है और अब वे चिंता में हैं कि परीक्षा कैसे देंगे। कई अन्य छात्रों ने भी बताया कि उनकी किताबें, प्रमाण पत्र और नकदी पूरी तरह जल चुकी है।
सागर कुमार झा ने बताया कि आग लगते ही दमकल विभाग को सूचना दी गई, लेकिन फायर ब्रिगेड की टीम को पहुंचने में काफी समय लग गया। उनके मुताबिक, आग लगने के करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। तब तक लॉज का बड़ा हिस्सा जल चुका था।
‘पहले जान बचाई, फिर सोचा सामान’
अररिया के गुड्डू कुमार गौरव ने बताया कि आग खाना बनाने के दौरान लगी। जिस छात्र ने आग देखी, उसने तुरंत शोर मचाया। जब वे कमरे में पहुंचे तो आग बेकाबू हो चुकी थी। स्थिति को देखते हुए सभी ने पहले अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी। कुछ छात्र अपने जरूरी दस्तावेज लेकर बाहर निकल पाए, जबकि अधिकांश का सब कुछ जल गया।
छात्रों का कहना है कि अगर आग और कुछ देर तक फैलती रहती तो बड़ी जनहानि हो सकती थी। सिलिंडर ब्लास्ट के कारण आग और भी भयावह हो गई थी।
लाखों का नुकसान, मुआवजे की मांग
प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस हादसे में करीब छह लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। छात्रों का कहना है कि वे ज्यादातर मध्यमवर्गीय या ग्रामीण पृष्ठभूमि से आते हैं और पढ़ाई के लिए लॉज में रह रहे थे। उनके लिए किताबें, प्रमाण पत्र और एडमिट कार्ड बेहद अहम थे, जो अब राख में बदल चुके हैं।
छात्रों ने जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि प्रशासन को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो।
दमकल ने पाया काबू
सूचना मिलने पर दो फायर ब्रिगेड की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। दमकल कर्मियों ने आसपास के इलाकों को भी सुरक्षित किया, ताकि आग अन्य भवनों तक न फैले।
पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। शॉर्ट सर्किट की संभावना को देखते हुए विद्युत विभाग को भी जांच के लिए बुलाया गया है। आग के सही कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।
सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल
इस घटना के बाद लॉज और छात्रावासों में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर दमकल पहुंच जाती या पहले से अग्निशमन के पर्याप्त इंतजाम होते, तो नुकसान कम हो सकता था।
फिलहाल, इस भीषण हादसे में किसी की जान नहीं गई, जो सबसे बड़ी राहत है। लेकिन छात्रों के भविष्य और उनकी मेहनत पर जो असर पड़ा है, उसे लेकर चिंता बनी हुई है। प्रशासन की अगली कार्रवाई और सहायता का इंतजार अब सभी को है।







