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दरभंगा में बच्ची से दरिंदगी के बाद बवाल, आगजनी-पत्थरबाजी; त्वरित सजा की मांग तेज

February 9, 20261 Mins Read
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दरभंगा जिले के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित कादिराबाद पटवा पोखर के पास छह वर्षीया बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना ने पूरे शहर को झकझोर दिया। शनिवार रात घटी इस अमानवीय वारदात की खबर रविवार सुबह फैलते ही लोगों का आक्रोश सड़कों पर फूट पड़ा। जगह-जगह सड़क जाम, आगजनी, तोड़फोड़ और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए लोगों ने आरोपित को सख्त सजा देने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग की।

सुबह होते-होते कादिराबाद और आसपास के इलाकों में सैकड़ों की संख्या में लोग जुटने लगे। गुस्साए लोगों ने आरोपित के ऑटो को क्षतिग्रस्त कर दिया और उसके पिता की कटघरा स्थित दुकान में आग लगा दी। इसके बाद कादिराबाद चौक पर टायर जलाकर सड़क जाम कर दी गई। भीड़ ने बांस-बल्ले लगाकर यातायात बाधित कर दिया, जिससे इलाके में अफरातफरी का माहौल बन गया।

आक्रोश का केंद्र सिर्फ घटनास्थल तक सीमित नहीं रहा। बेला दुर्गा मंदिर के पास भी सैकड़ों की भीड़ जमा हो गई। महिला-पुरुष और बच्चे तक विरोध में शामिल दिखे। लोग प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और दोषी को उनके हवाले करने की मांग कर रहे थे। हालात बिगड़ते देख ट्रैफिक डीएसपी प्रकाश कुमार समेत आधा दर्जन थानों की पुलिस, दंगा नियंत्रण बल और अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर पहुंचाए गए। करीब दो घंटे तक पुलिस समझाने की कोशिश करती रही, लेकिन भीड़ शांत होने को तैयार नहीं थी।

तनाव तब और बढ़ गया जब बेला दुर्गा मंदिर से भीड़ लाठी-डंडे के साथ विश्वविद्यालय थाने की ओर बढ़ने लगी। पुलिस ने रास्ते में रोकने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ आगे बढ़ती रही। बाघ मोड़ पहुंचते-पहुंचते हालात और गंभीर हो गए। सड़क किनारे खड़ी एक बस और कई वाहनों में तोड़फोड़ की गई। सदर एसडीएम और एसडीपीओ के समझाने के दौरान धक्का-मुक्की और पत्थरबाजी शुरू हो गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए। उपद्रवियों ने कुछ दुकानों में भी आगजनी और तोड़फोड़ की। स्थिति नियंत्रण से बाहर होती देख अतिरिक्त बल तैनात किया गया और पूरे इलाके में फ्लैग मार्च किया गया।

घटना के संबंध में बताया गया कि वारदात के समय तीन बच्चियां तालाब किनारे खेल रही थीं। इसी दौरान आरोपित वहां पहुंचा और तीनों को पकड़ने की कोशिश की। दो बच्चियां किसी तरह भाग निकलीं, जबकि एक बच्ची उसके कब्जे में आ गई। आरोप है कि आरोपी उसे अंधेरे की ओर ले गया, जहां उसके साथ दुष्कर्म कर हत्या कर दी। देर रात आरोपित को हिरासत में ले लिया गया। प्रशासन का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की जा रही है।

हालात काबू में आने के बाद भी पुलिस ने इलाके में कैंप कर रखा है। विश्वविद्यालय थाने में डीएम और एसएसपी स्वयं मौजूद रहे और स्थिति पर नजर बनाए रखी। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात है, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या नई हिंसा को रोका जा सके।

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। सीपीआई (एम) राज्य सचिव मंडल सदस्य श्याम भारती ने इस नृशंस अपराध की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को कठोर सजा देने की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है और महिलाओं व बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। पार्टी ने पीड़ित परिवार को न्याय, उचित मुआवजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित सुनवाई की मांग की है।

मिथिला मुक्ति मोर्चा के संस्थापक सह लोकतांत्रिक संघर्ष मोर्चा के सह संयोजक श्याम कुमार सिंह ने भी घटना को समाज की आत्मा को झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि आरोपित की गिरफ्तारी सराहनीय है, लेकिन अब उदाहरणात्मक सजा जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई ऐसी घिनौनी हरकत करने की हिम्मत न कर सके।

इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सह नगर विधायक संजय सरावगी ने रविवार को उप मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री सम्राट चौधरी से बातचीत कर मामले में स्पीडी ट्रायल की मांग की। उन्होंने कहा कि अभियुक्त को शीघ्र से शीघ्र सजा दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया तेज की जानी चाहिए। श्री सरावगी ने दरभंगा के एसएसपी से भी बात कर मामले की जानकारी ली और त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया। उन्होंने इस घटना पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि दोषी को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

शहर में तनाव को देखते हुए प्रशासन लगातार लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि कानून अपने हाथ में लेने से स्थिति और बिगड़ सकती है। फिलहाल जांच जारी है और मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाने की प्रक्रिया पर विचार किया जा रहा है।

इस दर्दनाक घटना ने दरभंगा ही नहीं, पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। एक मासूम की निर्मम हत्या के बाद उठे आक्रोश ने कानून-व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर कर दिया। अब सबकी निगाहें प्रशासन की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हैं—ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और समाज में यह संदेश जाए कि ऐसी दरिंदगी का अंजाम सिर्फ सख्त सजा ही है।

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